
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
बिलासपुर / बिलासपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन के संबंध में खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद्यान्न भंडारण एवं वितरण कार्य सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।
खाद्य नियंत्रक, जिला बिलासपुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 तक तीन माह के खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की व्यवस्था की गई है। इसके तहत जिले में संचालित 695 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में आबंटन के विरुद्ध 70 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न का भंडारण किया जा चुका है।
विभाग ने बताया कि किसी भी उचित मूल्य दुकान में तीन माह के खाद्यान्न भंडारण हेतु स्थान की कोई समस्या नहीं आई है। साथ ही, एपीएल मद के चावल का बीपीएल मद में समायोजन या वितरण नहीं किया जा सकता, जिसका पालन किया जा रहा है।
राशन वितरण प्रक्रिया के तहत हितग्राहियों को तीन माह का राशन प्राप्त करने के लिए ई-पॉस मशीन में छह बार फिंगरप्रिंट सत्यापन करना पड़ रहा है। विभाग के अनुसार, जिले में अब तक 37 प्रतिशत हितग्राहियों को तीन माह का खाद्यान्न वितरित किया जा चुका है तथा वितरण कार्य निरंतर जारी है।
खाद्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-पॉस मशीन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं है तथा एपीएल राशनकार्डधारियों के लिए मासिक आबंटन नियमित रूप से प्राप्त हो रहा है। जिले में राशन वितरण कार्य पूर्णतः व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।
दिव्यांग सोनी
बिलासपुर। जिले में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं पर लगाम कसते हुए बिलासपुर पुलिस एवं एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने एक संगठित बाइक चोरी गैंग का पर्दाफाश किया है। तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर की सटीक सूचना और टीमवर्क के दम पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह शहर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय था और योजनाबद्ध तरीके से बाइक चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में साहिल मरावी, रितेश सेन, निलेश शुक्ला उर्फ राजा, हिमांशु जगत, नंदकुमार रजक एवं सोनू केंवट शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक चोरी के कम से कम 6 प्रकरणों में संलिप्त पाए गए हैं। आरोपियों से पूछताछ जारी है और संभावना जताई जा रही है कि इनके द्वारा अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया गया हो सकता है।
इस सफलता के पीछे पुलिस की सतत निगरानी, तकनीकी इनपुट और मुखबिर तंत्र की अहम भूमिका रही। बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अपराधों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
पुलिस की अपील:
नागरिक अपने वाहनों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सके।
बिलासपुर / शौर्यपथ / अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के यूनिटी ऑडिटोरियम में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायाधीशगण एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन के बाद राष्ट्रीय गान और पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर न्यायपालिका और विधिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कुल 54 महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता तथा उच्च न्यायालय में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों की महिला कर्मचारी शामिल रहीं।
समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी केवल समानता का प्रश्न नहीं है, बल्कि इससे न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील, संतुलित और सशक्त बनती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता और समर्पण न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय और प्रभावी बनाते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के थीम “Give to Gain” का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें बेंच तथा बार में समान अवसर प्रदान करना लोकतांत्रिक मूल्यों और विधि के शासन को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को न्यायपालिका में समान अवसर मिलते हैं, तो उसका लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरा समाज इससे लाभान्वित होता है।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने इस अवसर पर उच्च न्यायालय, जिला न्यायालयों, सिविल न्यायालयों और विभिन्न शासकीय कार्यालयों में कार्यरत महिलाओं के समर्पण और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रतिबद्धता और कार्यकुशलता विधिक क्षेत्र को समृद्ध बनाती है तथा न्याय को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल महिलाओं का सम्मान करने का अवसर नहीं है, बल्कि समाज में समानता, सुरक्षा और समावेशिता सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार व्यास, न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल, न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु और न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद सहित कई वरिष्ठ न्यायाधीश उपस्थित रहे।
इसके अलावा महाधिवक्ता, वरिष्ठ अधिवक्तागण, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारी, न्यायिक कर्मचारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी समारोह में शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश के मार्गदर्शन में राज्य के सभी जिला न्यायालयों में भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को और सशक्त बनाया गया।
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा की पूज्य माता स्वर्गीय श्रीमती कुसुम सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बिलासपुर के बोदरी स्थित मुख्य न्यायाधीश निवास में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंचकर श्रीमती कुसुम सिन्हा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित किए और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने शोक संतप्त परिवारजनों से मुलाकात कर उन्हें ढाढ़स बंधाया और कहा कि माता जी का स्नेह, संस्कार और त्याग जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उनका सरल, स्नेहमयी और अनुपम स्वभाव सदैव स्मरणीय रहेगा।
इस अवसर पर केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री एवं सांसद श्री तोखन साहू, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, विधायक श्री सुशांत शुक्ला ने भी श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संवेदना व्यक्त की। कार्यक्रम में उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, महाधिवक्ता कार्यालय के अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
बिलासपुर। जिले में अवैध नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत बेलगहना चौकी क्षेत्र में निर्णायक कार्रवाई की गई है। पुलिस टीम ने सुनियोजित तलाशी अभियान के दौरान 300 ग्राम गांजा के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार कर कानून के समक्ष प्रस्तुत किया है।
प्राप्त प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान देवचरण वैष्णव (50 वर्ष), निवासी ग्राम कोंचरा के रूप में हुई है। पुलिस द्वारा विधिवत तलाशी लेने पर आरोपी के घर से कुल 300 ग्राम गांजा बरामद किया गया। इसके अतिरिक्त नशीले पदार्थ की तौल में प्रयुक्त होने वाला तराजू एवं बाट भी जब्त किया गया है। बरामद मादक पदार्थ एवं उपकरणों की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 16,000 रुपये आंकी गई है।
आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पूर्व में भी एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों में संलिप्त रहा है तथा नशे के अवैध व्यापार से उसका पुराना आपराधिक संबंध रहा है।
विशेष नशा विरोधी अभियान के तहत सतत कार्रवाई
जिले में संचालित विशेष नशा विरोधी अभियान के तहत अवैध शराब, गांजा एवं अन्य मादक पदार्थों के भंडारण, परिवहन एवं विक्रय में लिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से मुक्त रखने तथा समाज को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से यह अभियान सतत जारी रहेगा।
अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अवैध नशे के कारोबार की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
अपराधियों को स्पष्ट संदेश
बेलगहना क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई से नशा तस्करों एवं अवैध कारोबार से जुड़े तत्वों में हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हुई है। पुलिस प्रशासन ने दोहराया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने एवं मादक पदार्थों के अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सभी थाना क्षेत्रों में सघन निगरानी रखी जा रही है।
यह कार्रवाई न केवल विधि के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना को भी सुदृढ़ करती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में नशे के अवैध कारोबारियों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी और भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
10वें दिन 130 से अधिक प्रदर्शनों का आंकड़ा पार; अंतर्राष्ट्रीय नाटकों और नुक्कड़ नाटकों ने जीता दर्शकों का दिल
बिलासपुर / शौर्यपथ / नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल, 25वां भारत रंग महोत्सव (BRM), अपने 10वें दिन भी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सिल्वर जुबली मना रहे इस महोत्सव ने अपनी विविधता और भव्यता से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देशभर के 19 केंद्रों पर थिएटर की एक नई ऊर्जा का संचार किया है। अब तक इस फेस्टिवल में 130 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें माइक्रो ड्रामा, वन-एक्ट प्ले और नुक्कड़ नाटक शामिल हैं।
महोत्सव के 10वें दिन कहानी कहने के कई अनूठे रंग देखने को मिले। दिल्ली के मंच पर "बदज़ात" और "डैडी" जैसे प्रभावशाली नाटकों का मंचन हुआ, वहीं कश्मीरी लोक परंपरा 'भांड पाथर' पर आधारित नाटक “अका नंदन (आँखों का तारा)” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पोलैंड के प्रोडक्शन “उमादेवी ऑब्जर्व्स वांडा डायनोव्स्का” और रूस के नाटक “ए वेरी सिंपल स्टोरी” ने वैश्विक कलात्मक संवाद को मजबूती प्रदान की।एनएसडी स्टूडेंट्स यूनियन की पहल 'आद्वित्य' के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया गया। इसमें बाल शोषण जैसे संवेदनशील विषय पर "कुछ अनसुने", पेरेंटिंग स्टाइल पर आधारित "बेबी शार्क डू डू डू डू" और कैदियों के जीवन के संघर्ष को दर्शाते नाटकों ने युवाओं की रचनात्मक सोच और सामाजिक ज़िम्मेदारी को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही एफटीआईआई की चुनिंदा डिप्लोमा फिल्मों की स्क्रीनिंग ने सिनेमाई बारीकियों से दर्शकों को परिचित कराया।
भारत रंग महोत्सव 2026 की खास बात इसकी व्यापक पहुंच है। दिल्ली के मुख्य केंद्र के साथ-साथ यह महोत्सव छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। रायपुर के रंगमंच प्रेमी इन उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों का गवाह बन रहे हैं, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक अंतरराष्ट्रीय मंच और नई दृष्टि मिल रही है। रायपुर के अलावा बेंगलुरु, पटना, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों में भी नाटकों का मंचन जारी है।
यह 25वां संस्करण 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे 25 दिनों के इस सफर में 9 देशों और भारत के हर राज्य व केंद्र शासित प्रदेश के थिएटर ग्रुप हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर 228 भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रोडक्शन दिखाए जाएंगे, जिनमें कई दुर्लभ और कम बोली जाने वाली भाषाएं भी शामिल हैं।
बिलासपुर / शौर्यपथ /
राष्ट्र निर्माण की दिशा में कौशल विकास को एक सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित करते हुए एनटीपीसी लारा, जिला रायगढ़ ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) पहल के अंतर्गत स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस क्रम में एनटीपीसी लारा द्वारा गुरुवार को युवाओं के पहले बैच को रोजगारोन्मुख व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी), कोरबा के लिए रवाना किया गया।
प्रशासनिक परिसर में आयोजित कार्यक्रम में इस पहल को औपचारिक रूप से श्री सुभाष ठाकुर, परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी लारा द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्री केशव चंद्र सिंघा रॉय, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण), श्री हेमंत पावगी, महाप्रबंधक (परियोजना), श्री जाकिर खान, अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन), श्री मनीष कुमार, अपर महाप्रबंधक (तकनीकी सेवाएं) सहित एनटीपीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षुओं के अभिभावक एवं चयनित युवा उपस्थित रहे।
तीन माह की अवधि का यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोरबा में “असिस्टेंट मशीन ऑपरेटर – इंजेक्शन मोल्डिंग” ट्रेड में संचालित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल प्रदान करना है, जिससे वे शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटते हुए आत्मनिर्भर बन सकें तथा औद्योगिक क्षेत्र में प्रभावी योगदान दे सकें।
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए श्री सुभाष ठाकुर, परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी लारा ने कहा कि कौशल विकास आज के समय में केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और दीर्घकालीन रोजगार क्षमता का मजबूत आधार है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, समर्पण और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रशिक्षण का पूर्ण लाभ उठाने का आह्वान किया।
एनटीपीसी लारा की यह पहल कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के माध्यम से स्थानीय समुदायों के सतत एवं समावेशी विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ऐसे प्रयासों से न केवल युवाओं को कौशल और अवसर प्राप्त हो रहे हैं, बल्कि क्षेत्रीय विकास को गति देते हुए राष्ट्र की प्रगति को भी सुदृढ़ आधार मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने बिलासपुर में फहराया तिरंगा
बिलासपुर / लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की सर्वाेच्चता और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे प्रदेश में हर्षाेल्लास, देशभक्ति और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संयुक्त परेड की सलामी ली। उन्होंने शहीद सैनिकों एवं पुलिस जवानों के परिजनों को सम्मानित किया तथा छत्तीसगढ़ पुलिस बल को राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत का संविधान हमारी लोकतांत्रिक आस्था, समानता और सामाजिक न्याय का मजबूत आधार है। छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा, विकास और समृद्धि के लिए राज्य सरकार पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने गणतंत्र दिवस संदेश में राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं, नक्सल उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति, किसानों-श्रमिकों-महिलाओं के सशक्तीकरण, शिक्षा-स्वास्थ्य-औद्योगिक विकास और सुशासन की विस्तार से जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को स्मरण करने का दिन भी है। उन्होंने संविधान निर्माताओं, विशेषकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए कहा कि संविधान सामाजिक समरसता, समान अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को संविधान की आत्मा बताया और कहा कि भारतीय गणतंत्र ने ऐसा खुला समाज निर्मित किया है, जहां हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में सहभागी बन सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने हाल ही में राज्य स्थापना की रजत जयंती मनाई है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा गठित इस राज्य ने 25 वर्षों में विकास की सशक्त यात्रा तय की है। उन्होंने बताया कि संविधान के मंदिर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों से संपन्न हुआ। धान की बालियों की डिजाइन और बस्तर-सरगुजा की लोककला से सुसज्जित यह भवन छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती राज्यभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। सुकमा जिले के कोंटा से लेकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के सीतामढ़ी हरचौका तक लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को सच्ची श्रद्धांजलि है।
मुख्यमंत्री ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लोकार्पित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डिजिटल संग्रहालय देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जो आज की पीढ़ी को जनजातीय नायकों के बलिदान से परिचित कराता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माओवादी हिंसा लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती रही है, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने निर्णायक रणनीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि जवानों के अदम्य साहस और सतत अभियानों के परिणामस्वरूप माओवादी हिंसा अब अंतिम चरण में है और मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य पूर्ण होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, बस्तर कैफे जैसी पहलों और नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती अन्नदाता की समृद्धि रही है। आज छत्तीसगढ़ के किसान को धान का देश में सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी 5 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। बीते दो वर्षों में किसानों के खातों में डेढ़ लाख करोड़ रुपए अंतरित किए गए हैं। अटल सिंचाई योजना के तहत 115 लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में 26 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए गए हैं और प्रतिदिन लगभग 2 हजार आवासों का निर्माण हो रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य विद्युत उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और शीघ्र ही प्रथम स्थान की ओर अग्रसर है। सौर ऊर्जा, गैस आधारित परियोजनाओं और शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य पर तेजी से काम हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की सम्मान राशि प्रदान किए जाने की जानकारी दी। अब तक 14,948 करोड़ रुपए की राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने श्रमिकों के लिए ईएसआई, श्रम संहिताओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की बात कही।
मुख्यमंत्री ने बताया कि युक्तियुक्तकरण से शिक्षकों की कमी दूर की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, 9 हजार स्मार्ट क्लास और 22 हजार कंप्यूटर की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नए मेडिकल कालेजों की स्वीकृति से अब इनकी संख्या बढ़कर 15 हो गई है। बिलासपुर में मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक 7.83 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नवा रायपुर को आईटी, एआई, फार्मा और मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य एआई का है और छत्तीसगढ़ इसकी धुरी बनेगा।
मुख्यमंत्री ने रामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, बस्तर पंडुम, चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सरगुजा और जशपुर पर्यटन के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने ई-ऑफिस, जेम पोर्टल, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सुशासन की मजबूती पर बल दिया।
समारोह में स्कूली बच्चों द्वारा राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा योजनाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जिन्होंने प्रदेश की विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।
विकसित छत्तीसगढ़ का आह्वान
मुख्यमंत्री ने स्व. लक्ष्मण मस्तूरिया जी की कविता की पंक्तियों के माध्यम से जनभागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने अंत में प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी।
बिलासपुर / शौर्यपथ।
देश की ऊर्जा सुरक्षा, संस्थागत सुधार और दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने बिलासपुर स्थित अपने मुख्यालय में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। यह शिविर आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप एसईसीएल के भविष्य को आकार देने के लिए एक संरचित, सहभागी और नेतृत्व-केंद्रित मंथन मंच के रूप में सामने आया।
यह चिंतन शिविर हाल ही में नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित चिंतन शिविर की पृष्ठभूमि में परिकल्पित किया गया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं के अनुरूप एसईसीएल की रणनीतिक दिशा को और अधिक सुदृढ़ करना रहा। इस प्रक्रिया की शुरुआत एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों में आंतरिक चिंतन शिविरों से हुई, जिन्हें समेकित करते हुए मुख्यालय स्तर पर व्यापक मंथन किया गया, ताकि संगठन के हर स्तर की सहभागिता और समग्र समीक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरिश दुहन के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी सहित मुख्यालय एवं सभी परिचालन क्षेत्रों के लगभग 200 अधिकारी शामिल हुए। इनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष तथा कार्यकारी ग्रेड–5 (ई-5) स्तर तक के बड़ी संख्या में युवा अधिकारी सम्मिलित रहे, जो संगठन की भावी नेतृत्व क्षमता पर विशेष फोकस को दर्शाता है।
अपने संबोधन में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री दुहन ने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की अग्रणी कोयला कंपनी के रूप में स्थापित करने के लिए संगठित और परिणामोन्मुख प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनें। दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए उन्होंने विविधीकरण, औद्योगिक सहभागिता और नेट-जीरो रोडमैप में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई तथा विज़न 2030 और विज़न 2047 को संगठन के मार्गदर्शक ढांचे के रूप में अपनाने का आह्वान किया। युवा अधिकारियों को संगठन की भविष्य की रीढ़ बताते हुए उन्होंने एसईसीएल को भविष्य के लिए तैयार संस्था में रूपांतरित करने में उनकी अग्रणी भूमिका पर विश्वास व्यक्त किया।
चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा, कमियों की पहचान तथा कोयला उत्पादन, डिस्पैच व्यवस्था, खान सुरक्षा, लागत दक्षता, सतत विकास और डिजिटलीकरण को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्य योजनाओं पर मंथन करना रहा। इसके साथ ही विविधीकरण, उद्योग से जुड़ाव और नेट-जीरो लक्ष्य जैसे दीर्घकालिक विषयों पर भी गहन चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें भूमिगत उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी संचालन, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास, पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां, सौर एवं नवीन ऊर्जा, डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग, मानव संसाधन विकास, वित्त और संविदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
प्रत्येक प्रस्तुति के पश्चात संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी की सक्रिय भागीदारी रही। इस खुले और सहभागी मंच ने नवाचारी विचारों, रचनात्मक सुझावों और जमीनी फीडबैक को प्रोत्साहित किया, जिससे शीर्ष-स्तरीय मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अनुभवों के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित हुआ।
एसईसीएल का यह पहला ‘चिंतन शिविर’ नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती देने की दिशा में एक ठोस आधार प्रदान करेगा। साथ ही यह संगठन की परिचालन उत्कृष्टता, सतत विकास और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
