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आईटीआई पर बेजा कब्जा क्या नायब तहसीलदार के संरक्षण में , पुलिस विभाग को आबंटित आवास वाली भूमि पर भी कब्जे की चर्चा ...

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बिलासपुर / शौर्यपथ / मस्तूरी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की आपसी लड़ाई का एक अच्छा प्रभाव यह हुआ कि सामान्य जनता बिलासपुर कलेक्ट्रेट आकर ग्रामीण क्षेत्रों में हुए बेजा कब्जे की जानकारी स्वत: दे रही है। इसी क्रम में ग्राम केंवतरा के निवासियों ने बिलासपुर कलेक्ट्रेट में एक शिकायत करते हुए कहा कि ग्राम की खसरा नंबर 634 /1 तथा 630 शासकीय मध्य की जमीनें हैं इन्हीं में से 1 एकड़ 17 डिसमिल भूमि पर आईटीआई बना है आईटीआई की कुल जमीन में से कुछ पर 40 से 50 परिवारों ने कब्जा कर लिया है। आम जनता ने कहा कि शैक्षणिक परिसर में बेजा कब्जा धारी को हटाए असल में कुछ दिन पूर्व इसी गांव में मस्तूरी जनपद के पूर्व जनप्रतिनिधि पृथ्वी पाल राय ने एक लगानी जमीन खरीदी थी जिस पर जाने का रास्ता शासकीय जमीन पर से था।
ऐसा बताया जाता है कि उन्होंने अपनी जमीन पर जाने के लिए विधिवत एसडीएम से मार्ग आवंटन न करा कर सरपंच की सेहमति भर ली और अतिक्रमणकारियों को हटाने का प्रयास किया वह जब कभी भी शासकीय जमीन पर मुरम गिराते थे तो रात के समय मजदूर काम करते थे आम जनता को इस मामले में लुका छुपी समझ आती है इसी कारण अब पूरे गांव के बेजे कब्जे का खेल उजागर हो गया है। बताने वाले तो यहां तक कहते हैं कि इस गांव के 3 किलोमीटर पहले की ग्राम पंचायत में 1996 में 3 एकड़ जमीन पुलिस विभाग को आवास बनाने के लिए आवंटित की गई थी किंतु अब इस जमीन पर एक जनप्रतिनिधि ने कब्जा कर रखा है । चर्चा यहाँ तक चल रही है कि मस्तूरी का एक नायब तहसीलदार बेजा कब्जे को ना हटाकर भेदभाव पूर्ण तरीके से अपना निजी आर्थिक हित साधते हुए कार्यवाही करता है।
अजीत सिंह की रिपोर्ट बिलासपुर से

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