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संयंत्रकर्मी गेंन्द्रे ने बीएसपी के तीन अधिकारियों पर लगाया प्रताडऩा का आरोप कहा मेरे नौकरी जाने और मेरे व मेरे परिवार को है इनसे जान का खतरा

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दुर्ग ( भिलाई स्टील प्लांट ) / शौर्यपथ / सेक्टर पांच निवासी एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के आरसीएल विभाग मे ंकार्यरत बेदनलाल गेन्द्रे ने अपने ही विभाग के तीन अधिकारियों के उपर मानिसक रूप से प्रताडि़त करने, अपमानित करने, जातिगत रूप से मजाक उड़ाने के साथ साथ मुझे आत्महत्या के लिए विवश करने के अलावा मुझे झूठे मामले में फंसाने और मेरी नौकरी खाने जैसी धमकियां पिछले कई दिनों से दे रहे हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, एसएसपी दुर्ग। अजाक थानाप्रभारी और कोतवाली थाना प्रभारी भिलाई के पास शिकायती आवेदन दिया है। आवेदन मिलने के बाद कोतवाली थाना प्रभारी त्रिनाथ त्रिपाठी ने बताया कि ेसंयंत्र कर्मी गेन्द्र द्वारा बीएसपी के तीन अधिकारियों के विरूद्ध प्रताडि़त करने का शिकायत प्राप्त हुआ है, मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस मामलें शिफ्ट मैनेजर कुलदीप कुमार शेट्टी ने हमारे संवाददाता ने उनके सेलफोन से चर्चा करने पर उन्होंगे अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैं अभी प्लांट में हूं, यहां शोर गुल अधिक है, मैं आपसे बाद में चर्चा करूंगा।
गेन्द्रे ने अपने आवेदन के माध्यम से बताया कि महाप्रबंधक केे व्ही शंकरराव, सिफ्ट मैेनेजर कुलदीप कुमार शेट्टी जातिगत आधार पर मेंरा बार बार मजाक उडाते है, और मेरी जाति को लेकर अभद्र टिप्पणी करतेहैं। विभाग में हम सभी सहकर्मी आपस मे ंबैठकर चाय नाश्ता करते थे। इन दोनो अधिकारियों ने अपने पद और शक्ति का उपयोग करते हुए उन्हें जातिगत आधार पर मेरे साथ दुव्र्यवहार करने दूसरे कर्मचारियों पर दबाव बनाते है। भोजन करते समय ये लोग मुझे अपने पास भी नही बैठने देते और मेरे साथ छुआछुत वाली स्थिति अपनाते है और मुझे दूर भगाते हैं। मेरे द्वारा इन दोनो अधिकारियों से जब इस प्रकार का कृत्य मेरे साथ नही करने कहा जाता था तो ये नाराज होकर कुलदीप शेट्टी मुझे बहुत बुरा भला कहकर उल्टा सीधा सुनाने लगता था। और कहता था कि अपने अधिनस्थ लोगों के साथ तुम्हारा काम करना मुश्किल कर देेंगे और तुम्हारे उपर झूठी विभागी कार्यवाही करूंगा कहकर मुझे धमकी देते थे। इसके कारण मैं काफी डरा सहमा हुुआ हूं।
मेरे द्वारा इस मामले की शिकायत अनुसूचित जाति आयोग में भी की गई है। इसकी जानकारी मिलते ही ये दोनो अधिकारी मुझसे और अधिक नाराज हो गये। मेरी शिकायत इन लोगों ने मेरी शिकायत कार्मिक महाप्रबंधक संजय द्विवेदी से किये। उसके बाद संजय द्विवेदी ने मुझे अपने कार्यालय बुलाया तो मैं अपने दो सहकर्मियों रिखीराम साहू, कुशलप्रसाद खुंदे को लेकर संजय द्विवेदी के कार्यालय पहुंचा। वहां पर महाप्रबंधक द्विवेदी भी मुझे देखकर जोर जोर से झिल्लाते हुए जातिगत गालियां देने लेगे और कहने लगे कि अनुसूचित जाति आयोग तुम्हारे बाप ने बनाया है क्या जो वहां बार बार पहुंच जाते है, तुमलोगों को मुफ्त में नौकरी मिली है हराम का खा रहे हो,इधर उधर अधिक शिकायत करोंगे तो पूरी नेतागिरी निकाल दूंगा। अच्छे अच्छे कास्ट वालों को मैंने सुधार दिया है, तुम्हारी क्या औकात है अब सिर्फ तुम्हारी पिटाई करना बाकी है, वह भी जल्दी हो जायेगी। उस समय महाप्रबंधक संजय द्विवेदी मुझे मारने के लिए जुता भी निकाल लिये थे। ये तीनों अधिकारी मेरे खिलाफ षडयंत्र रच रहे है। 15 अगस्त 2019 से 16 नवंबर 2019 तक जबरन मेरा हाजिरी भी ये लोट काट दिये। बिना किसी आधार के ये लोग मुझे बार बार मेरी नोैकरी को लेकर पत्र जारी कर रहे है, ताकि ये लोग षडयंत्र रचकर मुझे मेरी नौकरी से ये लोग निकाल सके।
इन दिनों मैं बहुत ही विषम परिस्थितियों से गुजर रहा हूं, इसके कारण मेरी मानसिक स्थिति भी ठीक नही है, मुझे बीएसपी के कार्मिम विभाग से न्याय की कोईउम्मदी नही रही। संजय द्विवेदी पूर्व मे ंभी कई अनु.जाति एवं जनजाति के कर्मचारियों पर अपने पद और प्रभाव का उपयोग कर नौकरी में बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया है। संजय द्विवेदी जातिगत दुर्भावना से ग्रसित है। छोटी जाति वालों पर व्यक्तिगत विद्व्रेष रखता है। कर्मियों का ट्रंास्फर, पोस्टिंग एवं प्रमोशन जैसे कार्यों के लिए ये अधिकारी भ्रष्टाचार में पूर्णत: लिप्त है। इनका जीवन विलासिता से भरा हुआ है। तीनों अधिकारी बहुत ही प्रभावशील है, मुझे किसी भी षडयंत्र से नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके डर से कोई भी बीएसपीकर्मी साहस नही जुटा पता। इनका प्रभाव संयंत्र के अंदर इतना अधिक है, कि इनके द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायत करने का भी कोई साहस नही कर रहा है। इनके अत्याचार से यहां के सभी बीएसपी कर्मचारी चुप है। इन तीनों अधिकारियों ने मुझे जातिगत आधार पर बहुत अधिक प्रताडि़त कर रहे है.
मेरे साथ परिवार की जान को खतरा
गेंद्रे ने कहा कि इन तीनों से मेरे अलावा मेरे परिवार को भी जान से खतरा है। मेरे परिवार और मेरी नौकरी को भी नुकसान पहुंचा सकते है। यदि ये लोग मुझे इसी तरह प्रताडि़त करेंगे तो मैं आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाऊंगा। मेरे और मेरे परिवार के साथ यदि कोई भी घटना होती है तो इसके जिम्मेदारी भी यही तीनों अधिकारी होंगे।

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