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विधायक ललित चंद्राकर एवं महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
दुर्ग / शौर्यपथ / श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजनाÓ के तहत आज दुर्ग जिले से रामभक्तों का एक बड़ा जत्था स्पेशल ट्रेन से अयोध्या के लिए रवाना हुआ। जय श्री राम नारों से गूंजता दुर्ग रेलवे स्टेशन से 182 श्रद्धालुओं को ट्रेन के माध्यम से रवाना किया गया।
दुर्ग रेलवे स्टेशन से श्रद्धालुओं से भरी स्पेशल ट्रेन को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व विधायक श्री ललित चंद्राकर, महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान स्टेशन परिसर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। यात्रा से पहले सभी यात्रियों को भोजन, पेयजल, चिकित्सकीय सुविधा एवं आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन द्वारा पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधा की विशेष व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर गणमान्य नागरिक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
दुर्ग / शौर्यपथ।
ग्राम चिंगरी में आयोजित शिव महापुराण कथा के षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावविभोर एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पावन कथा श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश एवं कार्तिकेय जन्म-विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ श्रद्धा और दिव्यता के शिखर पर पहुंचा।
कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की अमर लीला का अत्यंत रसपूर्ण, भावनात्मक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। सती के आत्मदाह के पश्चात माता पार्वती का हिमालय के घर जन्म, कठोर तपस्या द्वारा भगवान शिव को पुनः प्रसन्न करना तथा दिव्य विवाह का प्रसंग श्रोताओं को भाव-विभोर कर गया। विवाह अवसर पर हिमालय द्वारा कन्यादान, देवताओं की उपस्थिति और शिव-पार्वती के पावन मिलन ने प्रेम, तप और त्याग की अमर कथा को जीवंत कर दिया।
इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की मार्मिक कथा सुनाई गई। माता पार्वती द्वारा उबटन से निर्मित पुत्र गणेश का द्वारपाल बनना, शिव द्वारा अनजाने में उनका मस्तक विच्छेदन और पश्चात हाथी का मस्तक धारण कर पुनर्जीवन — इस प्रसंग ने माता की ममता और शिव की करुणा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। गणेश के विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य बनने का प्रसंग श्रद्धालुओं के हृदय में गहराई तक उतर गया।
तत्पश्चात भगवान कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से उत्पन्न कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध और धर्म की विजय का प्रसंग शक्ति, साहस और धर्मरक्षा का प्रतीक बना।
समापन अवसर पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से भगवान शिव का अभिषेक किया। तदुपरांत तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां अर्पित की गईं। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद का वितरण हुआ, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से ग्रहण किया।
यह संपूर्ण आयोजन देवी इशर गौरा-गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मिक उन्नति, सुख-शांति एवं सामूहिक कल्याण रहा। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई और पूरा ग्राम ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘जय माता दी’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
शिव महापुराण कथा की यह पावन श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिसने जन-जन के हृदय में शिव-पार्वती भक्ति की अमिट छाप छोड़ दी।
दुर्ग / शौर्यपथ / ग्राम चिंगरी में शिव महापुराण कथा का षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और समापन की दिव्यता से परिपूर्ण रहा। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज द्वारा आयोजित इस पावन श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश जन्म, कार्तिकेय जन्म एवं विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिससे पूरा ग्राम शिव-पार्वती की कृपा से आलोकित हो उठा।
कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की महान लीला का रसपूर्ण वर्णन किया। सती के आत्मदाह के बाद माता पार्वती ने हिमालय के घर जन्म लिया और कठोर तप से भगवान शिव को पुनः प्रसन्न किया। विवाह अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हुआ, जहां हिमालय ने कन्यादान किया, देवताओं ने उपस्थित होकर आशीर्वाद दिया और शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाया। यह कथा प्रेम, तपस्या और दिव्य मिलन की अमर गाथा है।
इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की कथा सुनाई गई। माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपना पुत्र घोषित किया। जब भगवान शिव आए तो गणेश ने माता की आज्ञा से द्वार रक्षक बने, जिससे क्रोधित होकर शिव ने उनका सिर काट दिया। बाद में हाथी का सिर लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया गया, और वे विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य बने। यह कथा माता की ममता और शिव की करुणा का प्रतीक है।
तत्पश्चात कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से व्यथित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से कार्तिकेय का जन्म हुआ। वे छह मुखों वाले, वीर योद्धा के रूप में प्रकट हुए और तारकासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की। बाद में उनका विवाह भी संपन्न हुआ, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है।
समापन पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से लिंग पूजा की। इसके बाद तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों और पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां दी गईं। पूजन पश्चात महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रामवासियों ने भक्ति-भाव से ग्रहण किया।
यह समस्त कार्यक्रम देवी इशर गौरा गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मोन्नति, सुख-शांति तथा पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति प्राप्ति था। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई, और पूरा ग्राम 'हर हर महादेव' तथा 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा।
यह शिव महापुराण कथा श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिससे सभी के हृदय में शिव-पार्वती की भक्ति स्थायी रूप से बस गई।
दुर्ग, / महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 एवं शी-बॉक्स पोर्टल के संबंध में प्रशिक्षण सह कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन 19 जनवरी 2026 को शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग एवं छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में किया गया।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रत्येक कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति एवं जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति के गठन की अनिवार्यता की जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भी महिला के साथ कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की स्थिति में वह संबंधित कार्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष या शी-बॉक्स पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती है। साथ ही समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शिकायत प्राप्त होने पर की जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी शासकीय एवं निजी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन नहीं करने पर 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही सभी कार्यालयों को अपनी आंतरिक शिकायत समिति को शी-बॉक्स पोर्टल पर ऑनबोर्ड करने के निर्देश दिए गए।
इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल विवाह प्रतिषेध, सखी वन स्टॉप सेंटर एवं महिला सशक्तिकरण केंद्र की योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कार्यशाला में महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
दुर्ग, / भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के लिबरल आर्ट्स विभाग ने 15-16 जनवरी 2026 को नालंदा लेक्चर हॉल, आईआईटी भिलाई में "जेंडर मोडालिटीस ऑफ़ रेमेम्बेरिंग इन साउथ एशिएन लिटरेचर" शीर्षक पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह भारत के विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्यों और शोध विद्वानों को दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक और साहित्यिक संदर्भों में लिंग और सन्निहित अभ्यास के रूप में स्मृति की खोज पर अपने शोध को साझा करने के लिए एक साथ लाया।
सम्मेलन की शुरुआत जामिया मिलिया इस्लामिया की प्रोफेसर सिमी मल्होत्रा के एक मुख्य व्याख्यान के साथ हुई, जिसका शीर्षक था "भारत में महिला आंदोलनों की दो शताब्दियों को याद करना: स्मृति और नारीवादी इतिहासलेखन की पुनर्विचार"। व्याख्यान में स्मृति के लेंस के माध्यम से नारीवादी इतिहासलेखन की जांच की गई, दो शताब्दियों में महिलाओं के आंदोलनों की खोज की गई और दक्षिण एशिया में लैंगिक इतिहास को सुनाने में एक महत्वपूर्ण अभ्यास के रूप में याद किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत सेंट मीरा कॉलेज फॉर गर्ल्स, पुणे के वाइस प्रिंसिपल डॉ. स्नोबर सतारावाला के मुख्य भाषण के साथ हुई, जिसका शीर्षक था "रिमेम्बरिंग द मार्जिन: जेंडर, माइनॉरिटी मेमोरी, एंड द पॉलिटिक्स ऑफ रिप्रेजेंटेशन इन साउथ एशियन लिटरेचर"। उन्होंने यह पता लगाने के लिए व्यापक सिनेमाई, पाठ्य और मौखिक आख्यानों को आकर्षित किया कि अल्पसंख्यक समुदायों को कैसे याद किया जाता है या मिटाया जाता है, हाशिए के इतिहास और याद रखने के विभिन्न तरीकों को पुनर्प्राप्त करने में साहित्य की भूमिका को रेखांकित करता है।
पूरे सम्मेलन में पांच विषयगत पैनलों में अकादमिक चर्चा हुई। उद्घाटन पैनल ने लैंगिक आवाज और स्वदेशी सौंदर्यशास्त्र पर ध्यान केंद्रित किया, लोक और आदिवासी कला प्रथाओं को स्मृति के सन्निहित और जीवित अभिलेखागार के रूप में जांचा। इसके बाद हिंसा के लैंगिक प्रति-आख्यानों पर एक पैनल का आयोजन किया गया, जिसने जांच की कि साहित्यिक और सांस्कृतिक ग्रंथ आधिकारिक इतिहासलेखन से परे जाने वाले तरीकों से अस्तित्व, प्रतिरोध और भावात्मक स्मृति को कैसे व्यक्त करते हैं। बाद की चर्चाएं भेद्यता, जाति और पहचान के सवालों पर केंद्रित हो गईं, तीसरे पैनल ने साहित्यिक साक्ष्यों और कथात्मक स्मृति में जाति और लिंग के प्रतिच्छेदन पर प्रकाश डाला। चौथे पैनल ने रिश्तेदारी, घरेलूता और राष्ट्रीय स्मृति को ध्यान में लाया, मातृ विरासत, रोजमर्रा के स्थानों और कर्तव्य की लैंगिक धारणाओं का विश्लेषण किया। सम्मेलन स्मृति की डायजेटिक और स्थानीय भाषा की अभिव्यक्तियों पर एक पैनल के साथ संपन्न हुआ, जिसने वैकल्पिक निमोनिक रिपॉजिटरी की खोज की जो याद रखने के प्रमुख, पाठ-केंद्रित रूपों को चुनौती देते हैं।
सामूहिक रूप से, इन पैनलों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे लैंगिक स्मृति अवतार, प्रभाव, सामाजिक-सांस्कृतिक पदानुक्रम और कथा रूप जैसे कारकों द्वारा आकार दिए गए एक सक्रिय अभ्यास के रूप में कार्य करती है। सम्मेलन में हाशिए पर रहने वाली आवाज़ों को बढ़ाने और दक्षिण एशिया में स्मरण के प्रमुख तरीकों को चुनौती देने वाले प्रति-आख्यान बनाने में साहित्य और सांस्कृतिक ग्रंथों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
दुर्ग / छत्तीसगढ़ शासन ग्रामोद्योग विभाग के आदेशानुसार जिला हाथकरघा कार्यालय द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर कोसा एवं कॉटन ऑफ छत्तीसगढ़ हाथकरघा वस्त्र प्रदर्शनी सह विक्रय का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी 20 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक पंजाबी पैलेस सेक्टर-05 गणेश मंदिर के सामने भिलाई में आयोजित होगी।
प्रदर्शनी का शुभारंभ 20 जनवरी 2026 को शाम 5 बजे होगा। शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेन्द्र यादव होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद श्री विजय बघेल करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक श्री देवेन्द्र यादव, नगर निगम भिलाई के महापौर श्री नीरज पाल, अध्यक्ष छ.ग.राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन संघ श्री भोजराम देवांगन सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी शामिल होंगे।
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा, शक्ति, चंद्रपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, खैरागढ़ एवं दुर्ग जिलों के लगभग 25 बुनकर संस्थान भाग लेंगे। यहां भारत सरकार के सिल्क बोर्ड से प्रमाणित पुरस्कार प्राप्त बुनकरों एवं फैब इंडिया से जुड़े कारीगरों द्वारा निर्मित आधुनिक डिजाइनों वाले कोसा व कॉटन के स्वदेशी, स्वास्थ्य के अनुकूल वस्त्रों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जाएगा।
दुर्ग / माननीय सर्वाेच्च न्यायालय एवं माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा न्यायाधीशों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने हेतु निरंतर प्रेरित किए जाने से अनुप्रेरित होकर, जिला न्यायालय दुर्ग द्वारा न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की शारीरिक एवं मानसिक सुदृढ़ता के साथ-साथ आपसी एकता, ऊर्जा एवं सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला स्तरीय स्पोर्ट्स मीट का आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक किया गया। इस आयोजन में जिला न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक एवं बढ़-चढ़कर सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा किया गया, जिनके करकमलों से कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन संपन्न हुआ।
स्पोर्ट्स मीट के अंतर्गत कैरम, बैडमिंटन, शतरंज, टेबल टेनिस सहित अनेक महत्त्वपूर्ण खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने खेल भावना, अनुशासन एवं टीम भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं के दौरान प्रतिभागियों के साथ-साथ दर्शकों में भी विशेष उत्साह एवं उमंग देखने को मिली।
इस अवसर पर उपस्थित माननीय न्यायिक अधिकारियों द्वारा खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि नियमित खेल गतिविधियाँ न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं, बल्कि मानसिक तनाव को कम कर कार्यक्षमता एवं सकारात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करती हैं। इस प्रकार के आयोजन न्यायालयीन कार्यों में समन्वय, सहयोग तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण के निर्माण में सहायक सिद्ध होते हैं।
स्पोर्ट्स मीट के सफल आयोजन में आयोजन समिति, न्यायालयीन स्टाफ एवं स्वयंसेवकों का सराहनीय योगदान रहा।जिला न्यायालय दुर्ग द्वारा आयोजित यह स्पोर्ट्स मीट न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक, प्रेरणादायी एवं स्मरणीय आयोजन सिद्ध हुआ। इस अवसर पर समस्त न्यायाधीशगण, कर्मचारीगण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उपस्थित रहे।
बिना मान्यता संचालित श्री शंकरा विद्यालय में एडमिशन, आवेदक ने की शिकायत
दुर्ग / शौर्यपथ / जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे जनसामान्य लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने जनदर्शन में पहुंचे सभी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समुचित समाधान एवं निराकरण करने संबंधित विभागों को शीघ्र कार्यवाही कर आवश्यक पहल करने को कहा। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन कराने, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता राशि दिलाने सहित विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आज 113 आवेदन प्राप्त हुए।
इसी कड़ी में नगपुरा के कृषकों ने बीज से अंकुरण नही होने की शिकायत की। कृषकों ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रुआबांधा द्वारा उपलब्ध कराए गए गेहूं किस्म एच.आई. 8759 के बीजों का अंकुरण बेहद कम हुआ है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सेवा सहकारी समिति नगपुरा से 6 बोरी गेहूं बीज खरीदा था। बीज की बुआई नदी किनारे कछार भूमि में की गई, लेकिन आज तक केवल 10 से 15 प्रतिशत ही अंकुरण हो पाया है। इस पर कलेक्टर ने प्रबंधक बीज निगम को बीज की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
इसी प्रकार मैत्रीकुंज रिसाली निवासी ने सेक्टर-10 स्थित श्री शंकरा विद्यालय पर बिना वैध मान्यता के छात्रों का नवीन प्रवेश लेने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि विद्यालय की मान्यता 31 मार्च 2025 तक ही वैध थी, जिसके बाद आवश्यक वर्तमान कार्यकारिणी सूची जमा नहीं करने के कारण जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग द्वारा विद्यालय की मान्यता समाप्त कर दी गई। इसके बावजूद श्री शंकरा विद्यालय प्रबंधन द्वारा ग्राम कोनारी में नया विद्यालय खोलकर बिना मान्यता व मनमानी ढंग से स्टाफ नियुक्त कर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दिया गया है। इस पर कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निरीक्षण कर त्वरित कार्यवाही करने को कहा।
वार्डवासियों ने आदित्यनगर वार्ड क्रमांक 20 में नाली बंद किए जाने और सड़क का ढलान बदलने से गंभीर जलजमाव व गंदगी की समस्या की शिकायत की। वार्डवासियों ने बताया कि पिछले 10-15 वर्षों से कुछ मकान मालिकों द्वारा सड़क का निजी उपयोग करते हुए नाली को बंद कर दिया गया। जब सड़क निर्माण किया गया तो नाली को पूरी तरह से बंद कर सड़क का ढलान घर की ओर कर दिया गया। इससे गंदा पानी घर के सामने जमा होने लगा है। स्थायी जलजमाव के कारण क्षेत्र में दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इस संबंध में वार्ड पार्षद, नगर निगम आयुक्त एवं संबंधित जोन कार्यालय को भी अवगत कराया गया था। इस पर कलेक्टर ने नगर निगम दुर्ग को परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा।
भिलाईनगर। शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई जोन-4 शिवाजी खुर्सीपार क्षेत्र में अतिरिक्त निर्माण को राजस्व टीम ने रूकवाया। शिकायतकर्ता चंद्रशेखर पाण्डेय ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराया है कि सुभाष पाण्डेय द्वारा अपने भूमि पर अतिरिक्त निर्माण किया जा रहा है। प्राप्त शिकायत के आधार पर आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर जोन-4 के राजस्व विभाग की टीम द्वारा अतिरिक्त निर्माण को रूकवाया है। सुभाष पाण्डेय को प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास मिला हुआ है, जितने भूमि पर मकान निर्माण किया जाना था, उससे अतिरिक्त भूमि पर निर्माण किया जा रहा था। राजस्व टीम एवं पीएम आवास के अभियंताओं द्वारा मौके पर पहुंचकर काम को रूकवाया गया। काम रोकने संबंधित से लिखित में लिया गया है। कार्यवाही के दौरान राजस्व अधिकारी बालकृष्ण नायडू, सुनील जोशी, वीजेन्द्र परिहार, बेदखली प्रभारी विनय शर्मा, पीएम आवास के अभियंतागण सहित बेदखली टीम के कर्मचारी उपस्थित रहें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
