दुर्ग /शौर्यपथ/
एक सामान्य इन्सान अगर अपनी निजी जमीन से एक इंच आगे भी निर्माण कर ले या नालियों के ऊपर गार्डन बना दे या फिर निर्माण के दौरान नालियों में मटेरियल गिर जाए तो दुर्ग निगम के काबिल और मुस्तैद अधिकारियो की टीम निगम आयुक्त के निर्देश पर कार्यवाही करने पहुँच जाति है एवं कार्यवाही करने के बाद अपनी वाह वाही के प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अच्छे सुशासन की बात करते नहीं थकते किन्तु अगर दूसरी ओर नजर दौडाए तो निगम में निगम कार्यालय के करीब ही निगम की करोडो की जमीन पर अवैध कब्ज़ा करके निर्माण कर दिया गया और व्यापार संचालित होने लगा किन्तु निगम के अधिकारी मौन ही रहते है .
ऐसा नहीं कि दुर्ग निगम प्रशासन को इस बात की जानकारी नहीं हो . गरीबो से जुरमाना लेने वाले ये अधिकारी इन अवैध निर्माण करने वालो पूरी तरह शाह देते है . कभी कोई बात निकलती है तो दिखावे के लिए नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों को इतिश्री कर देते है .
ऐसे ही एक मामला नया बस स्टैंड का है जो निगम मुख्यालय की बाउंड्रीवाल से लगा हुआ है लाखो करोडो की इस जमीन पर धर्म के नाम का सहारा लेकर मंदिर के लिए ज्योति कक्ष बनाने की बात करने वालो संचालको द्वारा यहाँ पर निर्माण तो कर लिया किन्तु निर्माण होते ही यह एक व्यापार केंद्र बन गया . नया बस स्टैंड में अन्नपूर्ण भोजनालय नमक होटल जो कही से भी किसी तरह से भी मंदिर परिसर के कार्य नहीं आता किन्तु इस बात की जानकारी निगम अधिकारियों को है और इस संस्था को नोटिस देने के बाद सब मौन है . चर्चा है कि निर्माण के समय तात्कालिक भवन अधिकारी और संचालको में लाखो का लेन देन हुआ . इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो जाँच का विषय है किन्तु निगम की लाखो की संपत्ति पर अवैध निर्माण और व्यापार संचालित है और अधिकारी मौन है . अब देखना यह है कि शहर में सुशासन की बात करने वाले आयुक्त हरेश मंडावी द्वारा इस अवैधानिक निर्माण पर किसी तरह की कार्यवाही की जाती है या ये आयुक्त भी मौन रहते है