दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग शहर में कांग्रेसियों में आपस में फूट नजर आ रही है दूर शहर में कहने को तो सारी सरकार कांग्रेस की है किंतु कांग्रेस की शहरी सरकार में विधायक पूरा का पूरा दखल नजर आता है वही राजेश यादव जो मुख्यमंत्री के पुराने राजनीतिक साथी हैं को विधायक वोरा के द्वारा हमेशा दरकिनार किया जा रहा है ऐसा कई मौकों में देखने को मिला है कि विधायक वोरा कहीं भी लोकार्पण या भूमि पूजन के लिए जाते हैं तो राजेश यादव के अनुपस्थिति नजर आती है इसकी तो यहां तक बन चुकी है कि कई बार निगम के पोस्टरों से राजेश यादव के फोटो भी गायब हो जाते हैं शहर के विकास की बात करने वाले शहर विधायक अरुण वोरा निगम के लिए एवं विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री या नगरी निकाय मंत्री के पास भी पार्षदों की टीम को लेकर जाते हैं तब भी राजेश यादव को दरकिनार कर दिया जाता है अभी हाल ही में विधायक हो रहा शहर के विकास कार्यों के लिए निगम के पार्षदों की टीम को साथ लेकर गए जिसमें एक बार फिर नगर निगम के सभापति और मुख्यमंत्री के पुराने राजनीतिक साथी राजेश यादव को दरकिनार कर दिया गया दुर्ग कांग्रेस में अगर यही स्थिति रही तो आने वाले चुनाव में भाजपा से जाता भीतरी घात कांग्रेसमें हो सकती है नगर निगम के सभापति राजेश यादव एक कुशल राजनीतिज्ञ हैं एवं निजी कारणों से सालों से राजनीति से दूर रहे हैं किंतु नगर निगम में सभापति के रूप में एक बार फिर से राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं शहर में राजेश यादव की एक अलग पहचान है ऐसे में आने वाले समय में होने वाले विधानसभा चुनाव में विधायक वोरा जीत के लिए विपक्षी पार्टी भाजपा के साथ साथ कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से भी जब लड़नी होगी वर्तमान में अगर देखा जाए तो विधायक वोरा के द्वारा शहर में करोड़ों के विकास कार्य की बात की जाती है किंतु आम जनता को शहर में विकास कार्य कहीं नजर नहीं आ रहा है सिर्फ हर जगह बदहाली और अव्यवस्था ही नजर आ रही है पूर्व आयुक्त बर्मन के जाने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था भी चरमरा सी गई है नगर निगम के अधिकारियों की अगर बात माने तो हफ्ते भर के कार्यकाल में आधे से ज्यादा दिन 4_5 घंटे अधिकारियों का मीटिंग में ही गुजर जाता है अधिकारियों के मीटिंग में रहने के कारण कर्मचारी भी बेफिक्र हो जाते हैं वहीं आम जनता भी अपने छोटे छोटे कार के लिए घंटों और दिनों इंतजार करती नजर आती है किंतु सारी सरकार को विधायक वोरा की मंशा के अनुरूप चलाने का दावा करने वाले शहरी सरकार शहर की बदहाल स्थिति पर कुछ भी बोल पाने में असमर्थ नजर आती है क्योंकि जब कार्य हो रहे थे तब तात्कालिक आयुक्त के विरोध में पूरी शहरी सरकार आ गई थी वर्तमान में आयुक्त के का प्रणाली लगातार संवेदनहीनता का परिचायक बनती जा रही है भ्रष्ट अधिकारी पर कार्रवाई करने में भी वर्तमान आयुक्त टालम टोल की स्थिति में रहते हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण साथ तात्कालिक स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता है जिस पर सामान्य सभा में एक हफ्ते में जांच व निर्णय देने की बात कही गई थी किंतु महीनों बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई क्योंकि जांच करने वाले अधिकारी अभी तक मामले पर आगे नहीं बढ़ सके वही जांच की जिम्मेदारी देने वाले आयुक्त मंडावी भी जांच अधिकारी पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बना पा रहे हैं आखिर ऐसा क्या कारण है कि तात्कालिक स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता के जांच के मामले में शहरी सरकार सहित सभी अधिकारी मौन है