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भूमिगत जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी, निगम जल संरक्षण को लेकर लगातार कर रही पहल

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भिलाई / शौर्यपथ /

भूजल स्तर को बढाने के लिए भिलाई निगम प्रशासन भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग के साथ वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भूमिगत जल के संचय को संजोए रखने की दिशा में जोर-शोर से कार्य कर रहा है। अब जल संरक्षण को लेकर भी पहल की जा रही है। गर्मी के दिनों में भूजल स्तर काफी नीचे चला जाता है। गर्मी के दिनों में भी भूमिगत जल के संरक्षण के लिए नगर निगम के भवन अनुज्ञा विभाग ने भवन निर्माण करने पर बारिश का जल सहेजने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। सभी 150 वर्ग फीट से अधिक आवासीय भवनों के लिए यह जरूरी होगा। महापौर नीरज पाल ने जोन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी बरसात के जल को संजोने के लिए काम करें। आम जनता व व्यापारियों को प्रेरित करें कि गिरते भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए। महापौर ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग के महत्व को बताते हुए कहा कि यह भूमिगत जल को संचय करने का बेहतर माध्यम है। भवनों की छत का पानी बरसात में बहकर नाली के माध्यम से नालों में व्यर्थ बह जाता है। इसे अपने घर के परिसर में ही वाटर हार्वेस्टिंग बनाकर सहेजने से बोर व आसपास के कुंओं में सालभर भू जल का स्तर उंचा रहेगा। महापौर के निर्देश के बाद आयुक्त प्रकाश सर्वें ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने और भूजल के स्तर को बनाए रखने के लिए नगर निगम ने शहरी क्षेत्र में प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान चला रखा है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए निजी मकानों के साथ ही सार्वजनिक स्थानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अनिवार्य रूप से यह सिस्टम लगवाने पर जोर दिया, ताकि प्राकृतिक वर्षा का जल संचय किया जा सके। आयुक्त सर्वें ने आम लोगों सहित व्यापारियों से अपील की है कि बरसात के जल को सहेजने वाटर हार्वेस्टिंग बनवाए। उन्होंने भवन निर्माण करने पर बारिश का जल सहेजने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करने कहा। यह सिस्टम हम सबके लिए लाभदायक है। साथ ही इसके अभाव में भवन पूर्णत: प्रमाण पत्र की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए है। निर्माणाधीन भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं लगाने पर जुर्माना की कार्रवाई भी करने कहा है। नगर निगम के भवन अनुज्ञा शाखा से मिले आंकड़े के अनुसार 2011 के बाद निगम क्षेत्र में अबतक 150 वर्गमीटर से अधिक 2350 निजी भवनों और 146 शासकीय भवनों को मिलाकर सभी जोन में कुल 2496 भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाई गई हैं। कुल 4203 आवासों में से 1707 निजी आवासों में अब तक रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं लगवाए गए हैं। इस प्रकार 59.38 प्रतिशत आवासों में वाटर हार्वेस्टिंग बनाया गया है। इनकी शेष एफडीआर की राशि 469.79 लाख रूपए हैं। भवन अनुज्ञा अधिकारी ने बताया कि शासन के नियम के अनुसार भवन निर्माण के लिए रैन वाटर हार्वेस्टिंग लगाना अनिवार्य है। भवन निर्माताओं से प्रति 100 मीटर वर्ग फीट क्षेत्रफल पर 110 रूपए की दर से धरोहर राशि ली जा रही है। वाटर हार्वेस्टिंग नहीं लगाने की स्थिति में उनकी धरोहर राशि जब्त कर उनसे एक हजार रुपए प्रतिवर्ष अर्थदंड की वसूली भी की जा रही है। हितग्राहियों को भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र लेने के पूर्व रेन वाटर हार्वेस्टिंग के फोटोग्राफ भी जमा करना अनिवार्य किया गया है। महापौर और आयुक्त ने गर्मी के दिनों में भी वाटर लेवल को बनाए रखने के लिए हैंडपंपों, नलों, कुंओं व अन्य जलस्त्रोतों के पास सोख्ता बनाने भी अपील की है। इससे पानी की बर्बादी नहीं होगी और भूमिगत जल स्टोर भी बना रहेगा। उल्लेखनीय है कि भूजल स्तर काफी नीचे गिर जाने की वजह से गर्मी में जल संकट पैदा हो जाता है। अगर जल संरक्षण पर काम नहीं किया गया तो स्थिति खराब हो सकती है, इसलिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर गंभीरता पूर्वक काम किया जाना चाहिए।

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