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ज्वाला प्रसाद अग्रवाल की अधिमानता पर उठ रहे सवाल महिला को अधिमानता पत्रकार का धौस दिखाया ज्वाला ने

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दुर्ग / शौर्यपथ /

दुर्ग शहर में वैसे तो पत्रकारों की लम्बी फौज है किन्तु पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली करने के मामले में ज्वाला प्रसाद अग्रवाल का नाम कई बार आ चूका है मामला कभी पुलिस तक पहुंचा कभी अंडर ही अन्दर दब गया . किन्तु हाल ही में ज्वाला प्रसाद अग्रवाल जो एक वेब पोर्टल चलता है जिसे दुर्ग में सक्रियता के आधार पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वेब पोर्टल को दिया जाने वाला विज्ञापन भी जारी हुआ है . ऐसे में यह ज्ञात हुआ है कि ज्वाला प्रसाद अग्रवाल ने बेमेतरा में पत्रकारिता करने के एवज में अधिमानता प्राप्त किया हुआ है जबकि अधिमानता के नियमानुसार किसी भी क्षेत्र में तीन साल सक्रीय पत्रकारिता करने वालो को ही ये लाभ मिल सकता है .
वही जब इस बारे में बेमेतरा जिले के वरिष्ठ पत्रकारों से बात की गयी तो किसी ने भी ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी नहीं दिया कुछ का कहना था कि दुर्ग का रहने वाला है कभी बेमेतरा में दिखा नहीं .
ऐसे में सवाल उठता है कि एक पत्रकार जिसे तीन साल सक्रियता के आधार पर अधिमानता मिलता है और शासन की कई सुविधाए मिलती है बिना सक्रियता के समिति द्वारा कैसे अनुशंसा कर डी गयी .
वही इस बारे में समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि अगर इस तरह से अधिमानता ली गयी है तो कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए ताकि नाजायज लोगो को सबक मिले .
वही दुर्ग प्रेस क्लब के वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि पिछले 2-3 साल से दुर्ग प्रेस क्लब से जुडा है और दुर्ग प्रेस क्लब का नियम है कि जो व्यक्ति दुर्ग में ही कार्य करे उसे ही सदस्यता दी जाति है ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि आखिर कैसे ऐसे पत्रकार को अधिमानता मिल गयी आखिर किसकी अनुशंषा या बड़े लिफाफे का कमाल है कि अवैधानिक तरीके से शासन की यह सुविधा और मान सम्मान मिला .
एक तरफ छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल सक्रीय पत्रकारों के हित के लिए कई कदम उठा रहे है ऐसे में इस तरह फर्जी दस्तावेजो के सहारे समिति को किस तरह ज्वाला प्रसाद अग्रवाल ने गुमराह किया जो जांच का विषय है ताकि सक्रीय और लायक लोगो को ही यह मान सम्मान मिल सके . आज समाज में अधिमानता पत्रकार की एक अलग पहचान है ऐसे में इन मामलो की जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए . पूर्व में भी दुर्ग जिला प्रेस क्लब द्वारा इस तरह के मामले की शिकायत की जा चुकी है अब देखना यह है कि जन संपर्क विभाग मामले पर क्या रुख करता है .
पत्रकार होने की आड़ में किया महिला से दुव्र्यवहार ..
ज्वाला प्रसाद अग्रवाल द्वारा रेन बसेरा बस स्टैंड पर कार्यरत महिला से बुधवार की सुबह रेन बसेरा में पत्रकारिता का रौब दिखाते हुए दुव्र्यवहार किया गया जिसकी शिकायत महिला द्वारा थाने में की गयी वही पूर्व में भी जलाराम संस्थान के सदस्यों से धमकी देकर सोशल मिडिया में गलत बात लिख कर और पत्रकार होने का रौब दिखा कर अवैध वसूली करने की कोशिश की गयी थी किन्तु संस्थान के सदस्यों ने जब इसकी शिकायत पुलिस थाने में की थी तब प्राप्त जानकारी के अनुसार सोशल मिडिया में और थाने में सदस्यों से माफ़ी मांग कर मामले को खत्म किया गया था . ऐसी जानकारी भी प्राप्त हुई है कि प्लाटिंग करने वालो को भी इसके द्वारा निशाना बनाया गया और साल भर के अंतराल में दो -तीन जगह जमीन भी अपने नाम कर लिया गया .
अब देखना यह है कि ऐसे कुत्रचित दस्तावेजो के सहारे अधिमानता लेने वाले पत्रकार ज्वाला प्रसाद अग्रवाल पर जिला प्रशासन , पुलिस प्रशासन एवं जन संपर्क विभाग किस तरह की निष्पक्ष जांच और कार्यवाही करता है ..

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