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जब दुर्ग प्रेस क्लब के पत्रकार ज्वाला अग्रवाल को मांगनी पड़ी थी माफी....

  • rounak group

 दुर्ग / शौर्यपथ /

दुर्ग में पत्रकारों की बहुत बड़ी फौज है किन्तु इसमें से कुछ पत्रकार ऐसे भी है जो आरटीआई का सहारा लेकर अवैध वसूली में सलग्न रहते है .जिसमे कई बार सफल भी होते है तो कई बार असफल ऐसा ही एक पत्रकार है दुर्ग का ज्वाला प्रसाद अग्रवाल जो बेमेतरा में पत्रकारिता करने के नाम से अधिमानता तो बना लिया है किन्तु कार्य क्षेत्र हमेशा ही दुर्ग रहा है जबकि अधिमानता के नियमानुसार उक्त क्षेत्र में लगातार तीन साल सक्रिय पत्रकारिता करना होता है अब ये जाँच का विषय है कि अधिमानता देने वाली समिति के सात सदस्यों में से किस सदस्य ने इस कि अनुशंसा कर अपने पद का दुरूपयोग किया है और शासन को जनसंपर्क विभाग को अँधेरे में रखा है क्योकि सभी को मालुम है कि ज्वाला प्रसाद अग्रवाल दुर्ग में ही सक्रीय रहता है जिसका सीधा प्रमाण यह है किज्वाला प्रसाद अग्रवाल द्वारा संचालित वेब पोर्टल दुर्ग से संचालित है जिसमे समाचार लगाने का अधिकार ज्वाला अग्रवाल के पास है और मोबाइल या कंप्यूटर सिस्टम के लोकेशन से ये आसानी से जाँच एजेंसी पता कर सकती है कि विगत सालो से ज्वाला प्रसाद अग्रवाल दुर्ग क्षेत्र में ही सक्रीय है .
ज्वाला प्रसाद अग्रवाल शहर में आरटीआई लगाने के नाम से भी मशहूर है कई विभागों में आरटीआई लगाकर जानकारी एकत्रित कर आरटीआई कि आड़ में अवैध वसूली हो तो भी कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योकि जितना आरटीआई उसके द्वारा लगाया गया उसका आधा भी सार्वजनिक कर आम जनता को जागरूक किया हो , प्रशासन को जागरूक किया हो ऐसा कही नहीं दिखता . ऐसे ही एक मामले में दुर्ग के इंदिरा मार्केट स्थित संस्थान जलाराम चाट एवं जलाराम स्वीट्स के बारे में लगातार सोशल मिडिया के माध्यम से दुष्प्रचार किया जा रहा था . संस्थान के संचालको के अनुसार आखिर कार तंग आकर संस्थान के संचालको ने जब इसकी शिकायत कोतवाली थाना में की तब ज्वाला प्रसाद अग्रवाल ने कोतवाली थाना में लिखित और सोशल मिडिया के माध्यम से अपने कृत्य की माफ़ी मांगी तब कही जा कर व्यापारिक पृष्ठ भूमि वाली संस्था के संचालको ने बात को खत्म करते हुए मामले को आगे नहीं बाध्य . ऐसे कई मामले और भी हो सकते है जिसमे पीडि़त पुलिस के पास ना पहुँच कर मन मसोस कर परदे के पीछे सौदा कर मौन हो जाता हो .
बड़ा सवाल यह है कि समाज में ज्वाला प्रसाद अग्रवाल जैसे कितने पत्रकार होंगे जो इस तरह की वसूली के लिए आम जनता को प्रताडि़त करते होंगे . बता दे कि ज्वाला प्रसाद अग्रवाल के द्वारा दो साप्ताहिक समाचार पत्र का भी रजिस्ट्रेशन कराया गया है किन्तु नियमित ना चला पाने के कारण आज बंद की स्थिति में है कोई बड़ी बात नहीं कि संचार माध्यम की भारत सरकार की सबसे बड़ी संस्था आरएनआई द्वारा समाचार पत्र को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया गया हो किन्तु ये सत्य है कि ज्वाला प्रसाद अग्रवाल जैसे लोग पत्रकारिता की चाह ही नहीं रखते अगर पत्रकारिता की चाह रखते तो दो में से एक अखबार का सञ्चालन तो जरुर करते ऐसे लोग सिर्फ पत्रकारिता का ठप्पा लगा कर आम जनता को लुटने का ही प्रयास करते है . जिला प्रशासन / जन संपर्क विभाग को चाहिए कि ऐसे पत्रकारों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करे वही दुर्ग की सबसे बड़ी और पुरानी संस्था दुर्ग प्रेस कल्ब जिसमे कई ऐसे वरिष्ठ पत्रकार है जो 40-50 वर्षो से कार्य कर रहे है अपने ऐसे सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखाए जो पत्रकार होने के दम पर अनैतिक कार्य में सलग्न हो क्योकि दुर्ग प्रेस कल्ब के वरिष्ठ सदस्य जो समाज में काफी सम्मानित है और स्वक्ष छवि के है उनके क्लब से जुड़े एक वेब पोर्टल पत्रकार की ऐसी करनी पर सभी को कही ना कही अपमानित होना पड़ता है .

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PANKAJ CHANDRAKAR

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