दुर्ग। शौर्यपथ।
वैशाली नगर में गरबा महोत्सव के नाम पर आस्था को शर्मसार करते हुए अश्लीलता का नंगा नाच हुआ और इस आयोजन में क्षेत्र के विधायक श्री रिकेश सेन भी मौजुद रहे। धार्मिक आयोजनों को राजनीति और पाखंड का साधन बनाने की यह सोच नई नहीं है, लेकिन समाज के सामने जब ऐसे दृश्य आते हैं, तो जनता का विश्वास टूट जाता है।
विधायक की मौन उपस्थिति या मौन स्वीकृति?
गंगा जल जितनी पावन पार्टी और संस्कृति के स्वयंभू रक्षक जब अश्लील डांस का आनंद लेते दिखें, तो फिर जनता किससे उम्मीद रखे? यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग विधायक से सवाल पूछ रहे हैं – क्या यह वही संस्कृति और आदर्श हैं, जिनका हवाला हर मंच से दिया जाता है? धार्मिक श्रद्धा और सुचिता का दावा करने वाले इस तरह आस्था के मंच को उपहास का केंद्र बना रहे हैं।
आस्था के मंच पर अश्लीलता – चिंतन का विषय
यह कोई पहला मौका नहीं है जब असे आयोजनों पर सवाल उठे हैं, लेकिन एक जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में ऐसे दृश्य सामने आना, समाज के नैतिक मूल्यों को बट्टा लगाने जैसा है। जनता जानना चाहती है कि क्या राजनीति धार्मिक आयोजनों तक को शर्मसार करने की छूट देने लगी है? इस गंभीर मसले पर समाज को मुखर होना पड़ेगा और नेताओं को भी जवाब देना होगा कि आस्था के साथ खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा।