दुर्ग / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान ने राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत नर्सरी, केजी-1 एवं केजी-2 कक्षाओं में प्रवेश बंद किए जाने के निर्णय को गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण होने के साथ-साथ आरटीई की मूल भावना के भी विपरीत है।
अय्यूब खान ने बताया कि अब तक आरटीई के अंतर्गत प्रदेश के अनेक निजी स्कूलों में नर्सरी और केजी कक्षाओं में प्रवेश दिया जाता था, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलता रहा है। राज्य सरकार द्वारा अब केवल कक्षा पहली से ही आरटीई के तहत प्रवेश देने का निर्णय लिया गया है, जिससे वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चे के संपूर्ण शैक्षणिक विकास की नींव होती है। नर्सरी और केजी स्तर से निजी स्कूलों में प्रवेश न मिलने से गरीब बच्चों और सक्षम वर्ग के बच्चों के बीच शैक्षणिक असमानता और अधिक बढ़ेगी।
सरकार पर निजी प्ले स्कूलों को लाभ पहुंचाने का आरोप
प्रदेश कांग्रेस सचिव ने आरोप लगाया कि यह निर्णय निजी प्ले स्कूलों और नर्सरी स्कूलों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने आरटीई की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए सीधे कक्षा 1 से भर्ती का आदेश जारी किया है और 16 फरवरी को आरटीई का आवेदन पोर्टल खोला गया है, जिसमें केवल कक्षा 1 से प्रवेश का विकल्प प्रदर्शित हो रहा है, जबकि पूर्व में नर्सरी और केजी-1 से प्रवेश की व्यवस्था थी।
कांग्रेस ने रखीं प्रमुख मांगें
अय्यूब खान ने राज्य सरकार से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि—
// नर्सरी, केजी-1 एवं केजी-2 कक्षाओं में आरटीई के अंतर्गत प्रवेश व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए।
// आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के शिक्षा अधिकार की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
// शिक्षा नीति में पारदर्शिता और समान अवसर की गारंटी दी जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस पार्टी के साथ अभिभावक और शिक्षा से जुड़े संगठनों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।