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दुर्ग जिला अस्पताल में पार्किंग वसूली पर सवाल: टेंडर के 4 महीने बाद भी नियम लागू नहीं, सिविल सर्जन मिंज की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न Featured

दुर्ग जिला अस्पताल में पार्किंग वसूली पर सवाल: टेंडर के 4 महीने बाद भी नियम लागू नहीं, सिविल सर्जन मिंज की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न Ai generated
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निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, जीवनदीप समिति और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

दुर्ग / शौर्यपथ / :

प्रदेश सरकार जहां सुशासन और पारदर्शिता को लेकर लगातार सख्त कदम उठाने की बात कर रही है, वहीं दुर्ग जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जिला अस्पताल दुर्ग में पार्किंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल परिसर में वाहन पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही है, लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

जानकारी के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले इस मामले की सूचना अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन डॉ. मिंज को दी गई थी। उस समय यह उम्मीद जताई जा रही थी कि अस्पताल प्रबंधन तत्काल जांच कर कार्रवाई करेगा। हालांकि एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई विशेष बदलाव दिखाई नहीं दे रहा, जिससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

टेंडर के चार महीने बाद भी नियमों का पालन नहीं

बताया जा रहा है कि अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था के लिए जीवनदीप समिति के अंतर्गत टेंडर प्रक्रिया पूरी हुए चार महीने से अधिक समय बीत चुका है। इसके बावजूद पार्किंग ठेकेदार द्वारा नियम और शर्तों का पूर्ण पालन नहीं किया जा रहा। आरोप है कि अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों से निर्धारित दर से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे आम जनता को अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

इस विषय पर जब सिविल सर्जन डॉ. मिंज से चर्चा की गई, तो आश्चर्यजनक रूप से उन्हें इस मामले की विस्तृत जानकारी तक याद नहीं रही। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अस्पताल प्रबंधन को शिकायत की जानकारी होने के बाद भी तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

जीवनदीप समिति की भूमिका पर भी नजर

पार्किंग का यह टेंडर जीवनदीप समिति के माध्यम से जारी किया गया था, ऐसे में अब निगाहें समिति के सदस्यों पर भी टिक गई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति के सदस्य इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करते हैं या फिर पूरे मामले को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

जिला प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद

अस्पताल में पार्किंग के नाम पर अतिरिक्त वसूली की शिकायतों के बीच अब जिला कलेक्टर और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। क्योंकि जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर यदि आम जनता से अनियमित वसूली होती है, तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि सुशासन की अवधारणा पर भी सवाल खड़े करता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि अस्पताल प्रबंधन, जीवनदीप समिति और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, या फिर मरीजों और उनके परिजनों से अतिरिक्त वसूली का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

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