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इंदिरा मार्केट में अराजकता पर लगेगा ब्रेक या फिर ‘कमीशन राज’ रहेगा कायम? 1 अप्रैल से बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की अग्निपरीक्षा शुरू Featured

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दुर्ग | शौर्यपथ समाचार

दुर्ग शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र इंदिरा मार्केट की बदहाल व्यवस्था, अवैध अतिक्रमण और पार्किंग ठेकेदारों की मनमानी वसूली को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। 1 अप्रैल से बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के सामने अब इस अव्यवस्था को सुधारने की बड़ी चुनौती खड़ी है।

अब तक राजस्व वसूली में व्यस्त रहने का हवाला देने वाले मिश्रा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वित्तीय वर्ष समाप्त होते ही बाजार व्यवस्था पर सख्ती बरती जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सख्ती जमीनी हकीकत में बदलेगी या फिर यह भी सिर्फ कागजी घोषणा बनकर रह जाएगी?

? अतिक्रमण से घिरा बाजार, सड़क तक पसरा कारोबार

इंदिरा मार्केट में हालात यह हैं कि पसरा व्यापारियों ने सड़कों तक कब्जा जमा लिया है, जिससे न केवल बाजार की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई है। मुख्य मार्गों और प्रवेश द्वारों पर अतिक्रमण की वजह से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

? पार्किंग ठेकेदारों पर गंभीर आरोप

बाजार में पार्किंग व्यवस्था सुधारने के नाम पर ठेकेदारों द्वारा मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इंदिरा गांधी मूर्ति के आसपास और प्रवेश द्वारों पर अवैध वसूली का खेल लंबे समय से जारी है।

मिश्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि निगम द्वारा निर्धारित शुल्क की सूचना पट्टिकाएं लगाई जाएंगी और ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी।

? सामान्य सभा में भी गूंजा मुद्दा

नगर निगम की सामान्य सभा में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ा था, जहां सत्तापक्ष के पार्षदों ने ही बाजार की बदहाली और अवैध वसूली को प्रमुखता से उठाया। इससे यह स्पष्ट है कि समस्या सिर्फ आम जनता की नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की नजर में भी गंभीर है।

? रसूखदारों पर होगी कार्रवाई या सिर्फ गरीबों पर चलेगा डंडा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल छोटे ठेला व्यापारियों तक सीमित रहेगी, या फिर प्रभावशाली लोगों पर भी समान रूप से होगी?

गणेश मंदिर के सामने “राम रसोई” के नाम पर सड़क पर संचालित होटल,

ओम ज्वेलर्स द्वारा दुकान का सड़क तक विस्तार,

जैसे मामलों में अब तक केवल कार्रवाई की बातें हुई हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।

यदि मिश्रा वास्तव में सख्ती दिखाते हैं, तो यह उनके लिए प्रभावशाली लोगों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाने की पहली परीक्षा होगी।

? अनुभव से कम, जिम्मेदारी बड़ी – फैसले पर भी सवाल

यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि बाजार विभाग के अन्य कर्मचारियों से जूनियर होने के बावजूद अभ्युदय मिश्रा को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में यह निर्णय भी अब उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा कि सही था या सवालों के घेरे में आ जाएगा।

⚖️ अब नजर 1 अप्रैल पर…

साल भर से दावे, घोषणाएं और बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं।

अब 1 अप्रैल से शुरू होने वाला समय अभ्युदय मिश्रा के लिए “अग्निपरीक्षा” से कम नहीं होगा।

? क्या इंदिरा मार्केट में व्यवस्था लौटेगी?

? क्या अवैध वसूली पर लगाम लगेगी?

? या फिर पर्दे के पीछे ‘कमीशन का खेल’ और तेज हो जाएगा?

इन सवालों के जवाब अब कार्रवाई ही देगी, बयान नहीं।

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