शौर्यपथ विशेष
दुर्ग। शहर के तकियापारा क्षेत्र में संचालित एक बड़े कबाड़ गोदाम की तस्वीरें अब प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। खुले मैदान में भारी मात्रा में प्लास्टिक, लोहे और अन्य कबाड़ सामग्री का भंडारण, चारों तरफ फैली अव्यवस्था और बीच बस्ती में संचालित यह कारोबार अब स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बड़े पैमाने पर कबाड़ सामग्री खुले में जमा की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल एक गोदाम नहीं, बल्कि अव्यवस्थित और विवादित कबाड़ कारोबार का केंद्र बन चुका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां दिनभर संदिग्ध गतिविधियां चलती रहती हैं और कई बार चोरी के सामान की खरीदी-बिक्री को लेकर भी चर्चाएं सामने आती रही हैं।
“साबिर कबाड़ी” का नाम फिर चर्चा में
क्षेत्र में लंबे समय से संचालित इस कारोबार को लेकर “साबिर कबाड़ी” का नाम लगातार विवादों में सामने आता रहा है। पूर्व में प्रशासनिक कार्रवाई, पुलिस जांच और शिकायतों के बावजूद कारोबार पर स्थायी नियंत्रण नहीं दिखने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष और दोष सिद्ध होना प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
अपराध का पहला पायदान बनता कबाड़ कारोबार?
सामाजिक जानकारों का मानना है कि चोरी की छोटी घटनाओं के पीछे कबाड़ नेटवर्क बड़ी भूमिका निभाता है। नशे और गलत संगति में पड़े युवक छोटी-मोटी चोरी कर कबाड़ियों को सामान बेच देते हैं, जिससे अपराध की प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाती है। यही कारण है कि पुलिस व्यवस्था में कबाड़ कारोबार को अपराध जगत की शुरुआती कड़ी माना जाता है।
निगम और पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
नगर निगम नियमों के अनुसार घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार खुले रूप से कबाड़ भंडारण और व्यवसाय पर नियंत्रण आवश्यक माना जाता है। इसके बावजूद यदि वर्षों से विवादित कारोबार जारी है, तो सवाल यह भी उठता है कि आखिर कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर क्यों रह जाती है?
अब शहरवासियों की नजर नगर निगम आयुक्त और पुलिस प्रशासन पर टिकी हुई है। लोगों की मांग है कि ऐसे गोदामों की नियमित जांच हो, अवैध भंडारण हटाया जाए, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड अनिवार्य किया जाए और चोरी के सामान की खरीद-बिक्री में संलिप्त पाए जाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
शहर की जनता अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि परिणाम चाहती है — ताकि अपराध को जन्म देने वाले ऐसे अवैध नेटवर्क पर स्थायी रूप से रोक लग सके।