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स्मार्ट पुलिसिंग पर सवाल, लेकिन 12 घंटे में 6 आरोपी गिरफ्तार: कुंदरापारा हत्याकांड ने खोली कई परतें

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 निशांत ताम्रकर (क्राइम रिपोर्ट)
दुर्ग / शौर्यपथ / पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के कुंदरापारा में रविवार रात करीब 9:30 बजे हुई सनसनीखेज हत्या ने एक ओर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, तो दूसरी ओर दुर्ग पुलिस ने दावा किया कि महज 12 घंटे के भीतर वारदात में शामिल एक ही परिवार के छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, जैतखाम के पास करीब तीन वर्ष पुरानी रंजिश के चलते अक्षय कोठारी, उनके भाई लेखराम कोठारी, गोपा उर्फ सूर्यदेव कोठारी और उनके चाचा बल्ला उर्फ रोशन कोठारी पर लाठी, डंडे, ईंट और चाकू से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल लेखराम कोठारी की मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है।
पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही एफएसएल टीम को बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए और घेराबंदी कर लक्ष्मी चेलक, आकाश चेलक, सत्यम चेलक, खेलू चेलक, प्रकाश चेलक तथा देवचंद चेलक को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त ईंट, डंडे, चाकू और वारदात के समय पहने गए कपड़े भी जब्त किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या करना स्वीकार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया।

  मृतक 
स्मार्ट पुलिसिंग पर उठे सवाल
हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन वारदात ने शहर की तथाकथित "स्मार्ट पुलिसिंग" पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात करीब साढ़े नौ बजे घनी आबादी वाले कुंदरापारा में दो पक्षों के बीच लंबे समय तक खूनी संघर्ष चलता रहा। स्थानीय लोगों के सामने एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन इलाके में समय रहते पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखी।
इलाके के लोगों में भय का माहौल भी चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अपराधियों के डर से लोग पुलिस को सूचना देने से भी हिचकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठे। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए और 12 घंटे के भीतर सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि केवल त्वरित गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपराध पर पहले से प्रभावी नियंत्रण और लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी उतना ही जरूरी है।

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शौर्यपथ

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