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भिलाई के कथित 10 हजार करोड़ के लोहा चोरी प्रकरण में नया मोड़ सोशल मीडिया पर व्यापारी का नाम लेकर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की उठी मांग Featured

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दुर्ग/भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से कथित रूप से पिछले 40 वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी के आरोपों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। इस बार चर्चा का केंद्र कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ पत्रकार के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित और बाद में हटाई गई पोस्ट बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब केवल निष्पक्ष और विधिसम्मत जांच से ही सामने आ सकता है।

भोपाल से प्रकाशित बताए जाने वाले साप्ताहिक समाचार पत्र 'जगत विजन' की एडिटर के रूप में अपना परिचय देने वाली विजया पाठक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में भिलाई के प्रतिष्ठित व्यापारी इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू का नाम लेते हुए उन पर वर्षों से कथित लोहा चोरी सिंडिकेट संचालित करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। पोस्ट में पुलिस, भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत तक का उल्लेख किया गया था।

 यह पोस्ट  सोशल मीडिया पर vijaya pathak की पोस्ट पर अभी भी समाचार लिखे जाने तक देखी जा सकती है। पोस्ट को शौर्यपथ की टीम ने उसका स्क्रीनशॉट और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर ली थी, जिससे यह पुष्टि होती है कि उक्त सामग्री वास्तव में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित हुई है।

रिकेश सेन लगातार उठा रहे हैं 10 हजार करोड़ के कथित घोटाले का मुद्दा

उल्लेखनीय है कि वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन पिछले कई दिनों से अपने सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए भिलाई स्टील प्लांट में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के कथित लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न पोस्ट में बड़े खुलासे, जिम्मेदार लोगों के नाम सामने आने, केंद्रीय एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिलाने तथा विधानसभा में मामला उठाने जैसी बातें कही हैं।

हालांकि अब तक विधायक ने किसी भी व्यक्ति विशेष का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया है। राजनीतिक और संवैधानिक मर्यादाओं को देखते हुए उनका यह रुख समझा जा सकता है, लेकिन लगातार संकेतों और दावों के बीच नाम सामने न आने से जनमानस में संशय की स्थिति भी बनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने भी नहीं दिया था स्पष्ट जवाब

इसी मुद्दे पर जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मीडिया ने सवाल किया था, तब उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की थी। ऐसे में मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

पोस्ट के बाद उठे कई महत्वपूर्ण सवाल

सोशल मीडिया पर हुए पोस्ट के बाद हिसार में एक बार फिर चर्चा का विषय है कि क्या मामले की जांच की दिशा अब आगे बढ़ेगी या फिर सोशल मीडिया में हुए पोस्ट को हटाने का दबाव बनाया जाएगा?

यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित दुरुपयोग पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। बिना न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक कर देना उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। वहीं यदि आरोप सही हैं, तो संबंधित एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।

दोनों परिस्थितियों में जांच जरूरी

यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। निष्पक्षता की दृष्टि से दोनों संभावनाओं की समान रूप से जांच होनी चाहिए—

यदि पोस्ट में लगाए गए आरोप प्रमाणित और तथ्यों पर आधारित हैं, तो पूरे कथित लोहा चोरी नेटवर्क की गहन जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

यदि आरोप निराधार या अपुष्ट थे, तो किसी प्रतिष्ठित नागरिक की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास की भी विधिसम्मत जांच होनी चाहिए तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब निगाहें आगे की कार्रवाई पर

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू इस मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए शिकायत दर्ज कराएंगे और पोस्ट के पीछे के तथ्यों की जांच की मांग करेंगे, अथवा इस पूरे विवाद को नजरअंदाज करने का रास्ता अपनाएंगे।

वहीं दूसरी ओर, भिलाई स्टील प्लांट में कथित 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन से भी अब यह अपेक्षा बढ़ गई है कि यदि उनके पास इस संबंध में ठोस तथ्य और साक्ष्य हैं तो उन्हें उचित मंच पर सार्वजनिक करें, ताकि आरोप, संकेत और अटकलों की जगह सत्य सामने आ सके।

(नोट : यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट, उसके स्क्रीनशॉट तथा विभिन्न सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित आरोप संबंधित पोस्ट और सार्वजनिक दावों का उल्लेख हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध दोष सिद्ध होना शेष है।)

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Last modified on Wednesday, 22 July 2026 09:52
शौर्यपथ

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