दुर्ग। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से जुड़े कथित अवैध आयरन स्क्रैप परिवहन प्रकरण में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने व्यवसायी हिमांशु खंडेलवाल को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए माना कि उनका नाम मूल एफआईआर में दर्ज नहीं है, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है और उनसे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति रेणुका सिंह की एकलपीठ ने 4 अगस्त को पारित आदेश में यह राहत प्रदान की। मामला मई 2026 में दर्ज कथित अवैध आयरन स्क्रैप परिवहन प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने बिना वैध अनुमति स्क्रैप परिवहन के आरोप में दो ट्रकों को पकड़ा था और जांच के आधार पर अपराध दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि हिमांशु खंडेलवाल का नाम एफआईआर में कहीं भी दर्ज नहीं है। वे केवल मैसर्स हिमांशु ट्रेडर्स के संचालक हैं तथा संबंधित वाहनों का स्वामित्व वैध प्रक्रिया के तहत पहले ही तीसरे पक्ष को हस्तांतरित किया जा चुका था। इसके अलावा उनके कब्जे से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई और उनका कोई आपराधिक इतिहास भी सामने नहीं आया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियों में आवेदक की गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और जनचर्चाओं में यह सवाल उठने लगा है कि जिस हिमांशु खंडेलवाल को दुर्ग पुलिस फरार बताती रही, उसका नाम मूल एफआईआर में दर्ज ही नहीं था। ऐसे में जांच की दिशा, आरोपी बनाए जाने की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
हालांकि, इस संबंध में दुर्ग पुलिस का आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी सामने आना बाकी है। पुलिस का पक्ष आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि किसी व्यक्ति का नाम एफआईआर में ही नहीं था, तो उसे फरार घोषित करने का आधार क्या था? यही प्रश्न अब पूरे प्रकरण में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।