एक माह से स्थायी आयुक्त का इंतजार, भुगतान प्रक्रिया पर विराम की चर्चा; वेतन और ठेकेदारों के भुगतान को लेकर बढ़ी चिंता, 'आयुक्त किसकी पसंद का?Ó बनी सियासी बहस
शौर्यपथ विशेष
दुर्ग नगर निगम में करीब एक माह से स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जुलाई के दूसरे सप्ताह में तत्कालीन आयुक्त सुमित अग्रवाल के स्थानांतरण के बाद उपायुक्त मोहेंद्र साहू कार्यवाहक आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अगस्त का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन स्थायी आयुक्त की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है।
भुगतान और वेतन को लेकर चिंता
निगम से जुड़े सूत्रों और कर्मचारियों के बीच विभिन्न भुगतान प्रक्रियाओं के प्रभावित होने की चर्चा है। हालांकि निगम प्रशासन ने इस संबंध में अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इसी बीच अगस्त का वेतन समय पर मिलने को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता की चर्चा है।
सावन, तीज-त्योहार और रक्षाबंधन के बीच वेतन में देरी कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ठेकेदारों की चिंता भी भुगतान प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हुई है। विकास कार्यों में बिल परीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया स्थायी आयुक्त की नियुक्ति के बाद गति पकडऩे की उम्मीद जताई जा रही है।
'आयुक्त किसकी पसंद का?"
स्थायी आयुक्त की नियुक्ति में देरी अब राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है। दुर्ग की राजनीति में महापौर अलका बाघमार और विधायक एवं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से जुड़े खेमों के बीच मतभेदों की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगला आयुक्त किसकी पसंद का होगा?
निगम और राजनीतिक गलियारों में अधिकारियों के नाम को लेकर सहमति-असहमति की चर्चाएं हैं। हालांकि इन चर्चाओं की वास्तविकता संबंधित राजनीतिक नेतृत्व ही स्पष्ट कर सकता है।
एक ही दल की सरकार, फिर देरी क्यों?
दुर्ग की स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है क्योंकि महापौर अलका बाघमार और विधायक गजेंद्र यादव भाजपा से हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा जिले के प्रभारी मंत्री और उपमुख्यमंत्री अरुण साव नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री हैं। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे भी दुर्ग से जुड़ी प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है—
"जब सरकार से लेकर नगर निगम तक सत्ता एक ही दल की है, तो स्थायी आयुक्त की नियुक्ति में इतनी देरी क्यों?"
भूमिपूजन की रफ्तार, प्रशासनिक नियुक्ति में सुस्ती
शहर में विकास कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण जारी हैं, लेकिन निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण पद पर स्थायी अधिकारी नहीं है। विकास केवल भूमिपूजन से नहीं, बल्कि कार्यादेश, निर्माण, बिल परीक्षण और भुगतान की सुचारू व्यवस्था से पूरा होता है।
फिलहाल निगम में चार सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—
आयुक्त कब आएगा?
भुगतान कब होगा?
वेतन समय पर मिलेगा या नहीं?
और अगला आयुक्त किसकी पसंद का होगा?
अब निगाहें शासन और नगरीय प्रशासन विभाग पर हैं कि दुर्ग निगम को स्थायी आयुक्त कब मिलता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ आयुक्त की नियुक्ति का नहीं, बल्कि यह भी है कि 'ट्रिपल इंजनÓ सरकार में दुर्ग निगम की प्रशासनिक गाड़ी आखिर कब रफ्तार पकड़ेगी?