स्मार्ट मीटर, बढ़े बिजली बिल और पंचायत भवनों के कटे कनेक्शन पर जनपद सदस्य ढालेश साहू ने खोला मोर्चा; 30 सितंबर को अंडा चौक में प्रस्तावित कार्यक्रम
दुर्ग / शौर्यपथ। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है। अघोषित बिजली कटौती, पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन काटे जाने, स्मार्ट मीटर से जुड़े बढ़े हुए बिल और ग्रामीण उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर जनपद पंचायत दुर्ग के क्षेत्र क्रमांक-24 के सदस्य एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी ढालेश साहू ने क्षेत्रीय विधायक ललित चंद्राकर के खिलाफ विरोध का ऐलान किया है। साहू द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए आवेदन के अनुसार 30 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे अंडा चौक में विधायक का शांतिपूर्ण पुतला दहन कार्यक्रम प्रस्तावित है। हालांकि यह कार्यक्रम जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही आयोजित किए जाने की बात आवेदन में कही गई है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ललित चंद्राकर को दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य और भारतीय जनता पार्टी का विधायक दर्ज किया गया है।
मचांदूर से नगपुरा तक बिजली कटौती का मुद्दा
ढालेश साहू का आरोप है कि मचांदूर से निकुम, अंडा से उतई और कुथरेल से नगपुरा तक विभिन्न गांवों में घरेलू बिजली के साथ-साथ मोटर पंपों की बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों, विद्यार्थियों, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।
साहू के मुताबिक, बिजली संकट केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। कई ग्राम पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन कथित तौर पर बकाया बिल के कारण काटे जाने से पंचायतों के शासकीय कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने और बढ़े हुए बिजली बिलों की वसूली को लेकर भी असंतोष की बात उन्होंने कही है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर उन्होंने क्षेत्रीय विधायक से अपेक्षित हस्तक्षेप नहीं होने का आरोप लगाते हुए विरोध कार्यक्रम की घोषणा की है।
विधायक से मुलाकात के लिए मुख्यालय तक पहुंचने का मुद्दा भी चर्चा में
बिजली के मुद्दे के साथ-साथ दुर्ग ग्रामीण में विधायक की स्थानीय जनसुलभता और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनने लगी है। क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी ग्रामीण को विधायक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी समस्या रखना हो तो उसे दुर्ग मुख्यालय स्थित शासकीय निवास कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में विधायक का कोई स्पष्ट रूप से सक्रिय एवं नियमित स्थानीय जनसंपर्क कार्यालय नहीं होना भी सवालों के घेरे में बताया जा रहा है।
क्षेत्रीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि अनेक मामलों में ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं को विधायक से सीधे संपर्क के बजाय विधायक प्रतिनिधियों अथवा कार्यालयीन स्टाफ के माध्यम से अपनी बात पहुंचानी पड़ती है। कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा विधायक के पीए से संपर्क करने पर कथित तौर पर टालमटोल वाले जवाब मिलने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विधायक पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
'प्रतिनिधियों के भरोसे क्षेत्रÓ का सवाल
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो दुर्ग ग्रामीण जैसा विस्तृत विधानसभा क्षेत्र लगातार जनसंपर्क और स्थानीय स्तर पर शिकायतों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा रखता है। ऐसे में स्थानीय विधायक कार्यालय की सक्रियता, नियमित जनदर्शन और आम नागरिकों की विधायक तक सीधी पहुंच जैसे मुद्दे अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।
विपक्ष अथवा स्थानीय असंतुष्ट राजनीतिक समूहों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि बिजली जैसी रोजमर्रा की समस्या सीधे किसान, विद्यार्थी, घरेलू उपभोक्ता और छोटे व्यवसायी वर्ग को प्रभावित करती है। ऐसे में बिजली कटौती के साथ विधायक तक पहुंच की शिकायतें जुडऩे से विरोध का राजनीतिक स्वर और मुखर होता दिख रहा है।
30 सितंबर को अंडा चौक पर नजर
ढालेश साहू ने जिला कलेक्टर को दिए आवेदन में स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर, बुधवार को दोपहर 12 बजे अंडा चौक, दुर्ग ग्रामीण में कार्यक्रम प्रस्तावित है। आवेदन में प्रशासन से अनुमति देने का अनुरोध किया गया है तथा यह भी कहा गया है कि अनुमति मिलने पर ही कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं कानून-व्यवस्था संबंधी निर्देशों का पालन किया जाएगा।
अब निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय और विधायक ललित चंद्राकर की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि अनुमति मिलती है तो 30 सितंबर को अंडा चौक में होने वाला प्रस्तावित पुतला दहन दुर्ग ग्रामीण की बिजली व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधि की जवाबदेही को लेकर एक प्रमुख राजनीतिक विरोध कार्यक्रम के रूप में सामने आ सकता है।
फिलहाल मुख्य सवाल यही है—बिजली कटौती और बिलों की शिकायतों से जूझ रहे ग्रामीणों की आवाज विधायक तक सीधे पहुंचेगी या फिर यह मुद्दा विरोध-प्रदर्शन के जरिए ही आगे बढ़ेगा?