आंगनवाड़ी कार्यकर्ता त्रिवेणी साहू ने अपने घर पर ही पोषण वाटिका तैयार की है। पोषण वाटिका में तैयार हुई पोषण युक्त हरी और ताजी सब्जियां अब गर्मागरम भोजन के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलेगी।
त्रिवेणी साहू बताती है ‘’प्रत्येक आँगनवाड़ी केंद्र पर पोषण वाटिका विकसित करने को लेकर क्षेत्र की पर्यवेक्षक ऋतु परिहार ने बताया था । हमारे केंद्र पर पर्याप्त दीवार बंदी और पौधों की सुरक्षा की परेशानी थी। इसलिए मैंने घर पर पर्याप्त खाली जगह को चिन्हांकित किया, घर पर मेरे पिता ने मुझे इस कार्य को करने में पूर्ण सहयोग किया । राष्ट्रीय पोषण माह पर मेरी भी अब पोषण वाटिका तैयार हो चुकी है। मेरे केंद्र पर 47 बच्चे और 14 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत है । जिनको अब पोषण वाटिका से ताजी पोषण युक्त हरी सब्जियों से बना गर्म भोजन परोसा जा रहा है।“
विकसित पोषण वाटिका में केला, मुनगा, पपीता, लाल भाजी, पालक भाजी, भिन्डी, करेला, मिर्च, टमाटर, फूलगोभी, बैगन, बरबट्टी, सेमी, गलका, कांदाभाजी, कुम्भड़ा और लौकी कुसमी प्याज भाजी करेला डोड़का सब्जी लगाई गई है।
पर्यवेक्षक ऋतु परिहार बताती है, “पोषण अभियान के तहत जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका विकसित की जा रही है। कुपोषण की दर को कम करने को सुपोषण अभियान में गंभीर कुपोषित बच्चों को चयनित किया जा रहा है। भानसोज सेक्टर में पोषण वाटिका से 109 गर्भवती महिलाएं एवं 622 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। उनको ताजी और पोषण युक्त हरी सब्जियों से बना खाना मिले इसलिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर या कार्यकर्ताओं के यहाँ खाली स्थान पर पोषण वाटिका विकसित की गई है। वर्तमान में 5 पोषण वाटिकाऐं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और समूह की महिलाओं के यहां विकसित की गई है । साथ ही 6 पोषण वाटिकाओं को आंगनवाड़ी केंद्रों पर विकसित किया गया है भानसोज सेक्टर में कुल 11 पोषण वाटिकाऐं विकसित की गई है । जहां हितग्राहियों को गरमा गरम भोजन मिल रहा है ।“
*गृह भेंट कर किया जा रहा सुपोषण के प्रति जागरूक*
सुपोषण के प्रति जागरूक करने के साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा गृह भेंट कर लोगों को अपने घरों में बाड़ियां तैयार करने और उनमें पौष्टिक साग-सब्जी लगाए जाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। जिससे बच्चों को बेहतर आहार उपलब्ध हो और वह कुपोषण के शिकार न हो। इस पहल से न सिर्फ बच्चों के पोषण स्तर में सकारात्मक बदलाव हो रहा है, बल्कि माताओं को भी पौष्टिक आहार मिलने लगा है।
आरंग विकासखण्ड मंदिर हसौद के परियोजना अधिकारी सुभाष मिश्रा ने बताया, “आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका तैयार करने के लिए बीज और पौधे कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से लेते हैं। पंचायत स्तर पर स्वसहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी ली जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर किचन गार्डन में उगाई जाने वाली सब्जियां पूरी तरह से जैविक है । महतारी जतन योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन गरम पका भोजन वितरण किया जाता है।“
आरंग विकासखंड के परियोजना अधिकारी ऋषि बंजारे कहते हैं, “आरंग विकासखंड में 2,987 गर्भवती एवं 29,273 बच्चे पंजीकृत है। वहीं विकासखण्ड में 177 पोषण वाटिका तैयार की गयीं हैं। विकासखण्ड में चयनित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण अभियान कार्यक्रम के तहत 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ी गर्भवती महिलाएं, शिशुवती माताओं और बच्चों के अभिभावकों को प्रेरित कर पौधारोपण भी कराया जा रहा है।“
मालीडीह आंगनबाड़ी केंद्र पर 0 से 5 साल के बच्चों का वजन निर्धारित औसत से सामान्य है। यानी की इस आंगनबाड़ी केंद्र में पिछले 3 सालों से एक भी बच्चा कुपोषण के दायरे में नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सक्रियता की वजह से यहां की महिलाओं में एनीमिया मुक्त पाया गया है। हर महीने 0 से 5 साल के आयु के बच्चों का वजन लेते हैं। हर महीने बच्चे के वजन में वृद्वि होने की रिपोर्ट तैयार करती हैं। किसी भी बच्चे में 50 से 100 ग्राम की कमी आने पर नियमित गृह भेंट कर खानपान पर ध्यान रखने की सलाह देती है। वहीं रेडी-टू-ईट के अलावा शिशुओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए घर पर बने भोजन को पौष्टिकता युक्त पकाकर खिलाने पर जोर देती हैं।
सभी को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन करते हुए समय पर भोजन और भरपूर नींद लेने के साथ ही थाली में रंगीन पोषण आहार की जानकारी दी जा जाती है।