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नशा मुक्ति पर की गई चर्चा*

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नशा मुक्ति एवं तंबाकू निषेध को लेकर मितानिन और स्वास्थ्य केंद्र पर आये लाभार्थियों से चर्चा की गई । चर्चा का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू और अन्य नशे से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना था। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को मास्क और सेनेटाइज़र का वितरण भी किया गया। साथ ही इस दौरान भारत सरकार द्वारा जारी कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन भी किया गया।
चर्चा का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल के निर्देशन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक रायपुर मनीष मेजरवार के मार्गदर्शन में किया गया।
इस दौरान जिला सलाहकार डॉ. सृष्टि यदु ने सभी को तंबाकू का सेवन न करने की शपथ दिलाई, साथ ही कोटपा अधिनियम 2003 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक है। स्मोकिग से सबसे ज्यादा फेफड़ों के कैंसर होने की संभावना होती है। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए लोगों को तंबाकू का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए । कोरोना के संक्रमण काल में चार बातों को जानना बेहद महत्वपूर्ण है। तंबाकू या धूम्रपान से कोरोना का कनेक्शन यह है कि यह फेफड़ों को कमजोर करता है, जिससे वायरस का संक्रमण गंभीर हो सकता है। सिगरेट, सिगार, बीड़ी, वाटर पाइप और हुक्का पीने वालों में कोविड-19 का रिस्क ज्यादा होता है। तंबाकू चबाने और सिगरेट पीने वालों में कोरोना वायरस हाथ से मुंह तक पहुंच सकता है । संक्रमित के तंबाकू चबाने के बाद थूकने पर वायरस अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकता है”।
इस मौके पर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) भटगांव के प्रभारी डॉ. किशोर सिन्हा ने कहा, “गुटखा, तंबाकू व शराब आदि का सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को बढ़ावा मिलता है। कुछ घंटों के शौक के लिए किये जाने वाले इस नशे से कैंसर हो सकता है साथ ही व्यक्ति बाद में आर्थिक रूप से भी बर्बाद हो सकता है। यह बीमारी जड़ से भी खत्म होने की गारंटी नहीं होती। ऐसे में सभी को संकल्प लेना चाहिए कि नशे से दूर रहे और दूसरों को भी यह सलाह दें”।
काउंसलर अजय कुमार बैस ने कहा, “नशा छुड़ाने का प्रयास किया जा सकता है। समय रहते नशा छोडने से मन और शरीर स्वस्थ रहता है। धूम्रपान करने वाले दोनों पुरुष और महिलाओं में डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसे रोग होने की संभावना अधिक होती है। इसमें मानसिक पतन का अनुभव भी कर सकते हैं। सिगरेट में मौजूद निकोटीन मस्तिष्क के लिए हानिकारक है और डिमेंशिया या अल्जाइमर रोग की शुरुआत करता है”।

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राज शेखर नायर

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