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श्रृंगी ऋषि स्कूल के नाम में आत्मानंद जोडे जाने, पुराने भवन को तोड़ने का नगर वासियों ने किया विरोध

  • devendra yadav birth day

नगरी। क्षेत्र के सबसे पहले व पुराने हाई स्कूलों में से एक श्रृंगी ऋषि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नगरी के नाम में आत्मानंद इंग्लिश मीडियम नाम जोड़े जाने व पुराने भवन को तोड़कर नए भवन के बनाए जाने, को लेकर नगर वासियों ने कलेक्टर एलमा से विरोध जताया ।
वन विश्राम गृह नगरी में कलेक्टर के आगमन पर नगरवासियों ने मुलाकात कर इस संबंध में चर्चा कर विरोध जताया।
नगर वासियों के अनुसार श्रृंगी ऋषि हाई स्कूल भवन को नगर वासियों ने अपने आपसी सहयोग,मेहनत और खून पसीने की कमाई से बनाया है, जिसकी वजह से नगरवासीयों का उस स्कूल के साथ भावनात्मक संबंध है,इसलिए स्कूल भवन को तोड़ने के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि आगे भी वे आपसी सहयोग से स्कूल भवन की मरम्मत करयेंगे। श्रृंगी ऋषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नाम बदलने का भी विरोध किया उनका कहना है कि "हमारे पुरखों द्वारा स्कूल का नाम श्रृंगी ऋषि के नाम पर रखा है, जो हमारे पूज्यनीय सप्तर्षियों में से जेष्ठ ऋषि हैं, हमारे धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ मामला है । इस नाम के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ ना किया जाए ।आत्मानंद इंग्लिश मीडियम के नाम से नगरी में किसी दूसरे स्थान पर नए भवन का निर्माण कर स्कूल संचालित किया जाय।
ग्रामवासियों ने नगरी में आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले जाने का स्वागत किया और शासकीय कन्या शाला परिसर में इस स्कूल भवन के निर्माण का सुझाव भी दिया ।
कलेक्टर धमतरी ने नगरवासियों की बातों व सुझावों को ध्यान से सुना और कहा की एक बार फिर इस समस्या के समाधान के लिए नगर वासियों के साथ बैठक की जाएगी। तब तक किसी तरहा का निर्माण कार्य नही किया जायेगा।
उन्होंने आश्वासन दिया की हिंदी मीडियम की सभी विषयों की पढ़ाई पूर्व अनुसार जारी रहेगी। बच्चों की शिकायत का समाधान करते हुए कहा कि स्कूल प्रशासन को आदेश दिया जाएगा की आर्टस व कला व अन्य सभी विषयों की पढ़ाई हिंदी मीडियम से श्रृंगी ऋषि हाई स्कूल में पूर्व की तरह कराई जाएगी।
वन विश्राम की नगरी में कलेक्टर धमतरी से मुलाकात करने आए कुछ स्कूली छात्र छात्राओं ने शिकायत की थी की नगरी के श्रृंगी ऋषि हाई स्कूल में आर्ट्स व कला से संबंधित विषयों को यह कहकर प्रवेश नहीं दिया कि इन विषयों की पढ़ाई यहां बंद कर दी गई है, इसके बाद ये छात्र-छात्राएं 08-10 किलोमीटर दूरी तय कर नगरी से ग्राम सांकरा व सिहावा जाने को मजबूर है। इनमें से कुछ गरीब बच्चे आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से इतने दूर आने जाने में सक्षम नहीं होने की वजह से पढ़ाई छोड़ने मजबूर हो रहे हैं।

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राज शेखर नायर

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