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राज्य सरकार मीसा बंदियों की रुकी पेंशन जल्द से जल्द दे, आपातकाल इतिहास का काला दिन - बलजीत छाबड़ा

  • devendra yadav birth day

 धमतरी ब्यूरो /शौर्य पथ

 

भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष बलजी छाबड़ा ने राज्य सरकार से मांग की है कि आज ही के दिन सन 1975 में लगाए गए इमरजेंसी आपातकाल मे मीसा बंदियों रहे व उनके परिजन को रुकी हुई पेंशन जल्द से जल्द दें छाबड़ा ने बताया कि नगरी तहसील से दो लोग मीसाबंदी हुए थे जिन्हें छत्तीसगढ़ की रमन सिंह की सरकार सम्मान निधि के तौर पर पेंशन दिया करती थी जिसे कांग्रेस की भूपेश सरकार ने पद पर आसीन होते ही रोक लगा दी यह केंद्र सरकार द्वारा किया गया कृत्य मीसा बंदियों को दिया गया सम्मान का अपमान है सरकार किसी की भी हो किसी को भी सम्मान देने के बाद उसका अपमान केंद्र सरकार को करना शोभा नहीं देता नगरी नगर से मीसा बंदियों के परिजन विमला बाई सोम पति स्वर्गी भानु रामजी सोम व चरणजीत कौर छाबड़ा पति स्वर्गीय श्री सतनाम सिंह छाबड़ा मीसा बंदी रहे आपात काल के समय की याद दिलाते हुए कहा कि 25 जून 1975 की मध्यरात्रि इस देश की सबसे बडी काली अमावस्या है, जहां हमारी सारी लोकतांत्रिक मान्यताओं, सनातन के सारे संस्कारो को एक झटके में एक तानाशाही मनोवृत्ति की श्रीमती इंदिरा गांधी ने पद पर बनी रहने, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उनका चुनाव रद्ध किये जाने के निर्णय के बावजूद देश पर आपातकाल थोपा । देश में एक व्यक्ति बना रहे, इसके लिये बिना कोई कारण के आपातकाल लगाया, देश की भीतरी बाहरी स्वतंत्रता को गंभीर खतरों का झूठा वितान खींचा गया। देश पर संकट बताकर आपातकाल लगा दिया आज हम आपातकाल की 41 वीं वर्षी पर पहुँच गये हैं जिन लोगों ने लोकतंत्र के लिये 26 जून 1975 से संघर्ष किया जेल गये, जेल के बाहर लड़ते रहे, उनमें से आधे लोग हमारे बीच नहीं हैं जो जवानी में जेल गये थे। वे प्रौढ़ावस्था पार कर चुके हैं। पर हमारी छत्तीसगढ़ की सरकार ऐसे परिजनों का साधु लेना ही नहीं चाहती हैं। छाबड़ा ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहां की*कांग्रेस द्वारा आपातकाल लगाकर देशवासियों पर किये गए बर्बरता और लोकतंत्र की हत्या के विरुद्ध "संकल्प दिवस" एक बुलंद आवाज है। लोकतंत्र लोकतंत्र एवं को आज भी जीवित करता के लिये कांग्रेस ने अभी तक देश से माफी नहीं माँगी है न उन्हें इसकी शर्मिंदगी है। इससे आने वाले दिन और चुनौतिपूर्ण है,

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राज शेखर नायर

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