धमतरीब्यूरो /राजशेखर नायर
मछलीपालन विभाग को विभिन्न सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि इन दिनों प्रदेश में कुछ अशासकीय संस्थाओं/फर्म द्वारा मत्स्य कृषकों की भूमि पर तालाब निर्माण करवाकर मछलीपालन का व्यवसाय करवाने के नाम पर विभिन्न योजनाएं प्रसारित की जा रही है। इन संस्थाओं द्वारा मत्स्य कृषकों से एक बड़ी राशि लेकर उनकी ही भूमि पर मत्स्यपालन का व्यवसाय करने एवं उन्हें एक निश्चित मासिक आय का प्रलोभन दिया जा रहा है। ‘‘कांटेªक्ट फार्मिग’’ या ‘‘राशि दो गुना करने ’’ जैसे नाम से ये प्रस्ताव ऐसी फर्म दे रही है।
सहायक संचालक, मछलीपालन विभाग सुश्री बीना गढ़पाले ने सर्व साधारण एवं मत्स्य पालकों से अपील किया है कि मछलीपालन विभाग अथवा छ0ग0 शासन ऐसी किसी भी योजना को प्रमाणित नहीं करता है। कोई भी मत्स्य कृषक ऐसी किसी भी योजना से स्वयं विचार कर वैधानिक/आर्थिक पक्षों को भली भांति समझ-बूझकर ही राशि निवेश करें, अन्यथा शासन अथवा मछलीपालन विभाग किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगा।