दैनिक समाचार पत्र शौर्यपथ
धमतरी ब्युरो/राजशेखर नायर
कृषि विभाग नगरी के अधिकारियों पर आरोप लग रहे हैं की ,शासन द्वारा कृषकों को वितरण किए जाने वाले खाद बीज व अन्य निशुल्क यंत्रों का पात्र कृषकों तक लाभ नहीं पहुंच रहा है।
बस स्टैण्ड से कुछ दूरी पर नगरी,धमतरी मुख्य मार्ग किनारे
सैकड़ों की संख्या में, महानदी कल्चर *पी एस बी जैविक उर्वरक* के पैकेट पढ़ें पाए गए , इन उर्वरक पैकेटों में निर्माता *छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड छत्तीसगढ़ शासन* का उपक्रम बायोफर्टिलाइजर संयंत्र अभनपुर जिला रायपुर छपा है।
पैकेट मे उत्पादन तिथि व बैच नं. का भी उल्लेख किया गया है।
उल्लेखित उत्पादन तिथि *2015* से ज्ञात होता है कि उर्वरक पैकेट लगभग *4 से 5 साल* पहले ही एक्सपायरी हो चुका था। इसके बावजूद नगरी के किसी कृषि दवा दुकानदार द्वारा इसे बेचा जा रहा था।
*कृषि विभाग के अधिकारियों पर आरोप*
कृषि विभाग के अधिकारियों पर आरोप लग रहे हैं की छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा कृषकों में वितरण किए जाने वाला यह उर्वरक कृषको में अब तक वितरण क्यों नहीं किया गया।
जबकि उत्पादन तिथि 2015 अंकित है।
अगर किसी कृषि दवा विक्रेता द्वारा यह उर्वरक बेची जा रही थी तो *सालो पहले एक्सपायरी* पी.एस.बी उर्वरक को दुकानदार कृषि विभाग के नजर में आए बगैर इतने लम्बें वक्त तक कैसे किसानों को बेचने में कामयाब रहा।
इस मामले में *कृषि विभाग की भूमिका* संदिग्ध है ।
विभाग के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाह आरोप लग रहा है।
प्रश्न यह भी उठता हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा निर्मित उर्वरक पैकेट सड़क किनारे बड़ी सख्या में पड़े कैसे पाये गये।
इन उर्वरक को अगर मवेशी खा लेते तो मवेशियों की जान तक जा सकती थी।
पर सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि शासन द्वारा किसानों को वितरण किए जाने वाला यह पैकेट आखिर किसानो तक क्यों नहीं पहुंचा और सड़क किनारे क्यों पाए गए।
इस मामले की जांच की जानी चाहिए।