संविधान के अनुच्छेद 48 ए तथा 51 ए के निर्देशों का किया जा रहा उल्लंघन
नगरी/राजशेखर नायर
भारत सरकार ने 1976 में संविधान में संशोधन कर दो महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद 48 ए तथा 51 ए (जी) जोड़ें। अनुच्छेद 48 ए राज्य सरकार को निर्देश देता है कि वह ‘पर्यावरण की सुरक्षा और उसमें सुधार सुनिश्चित करे, तथा देश के वनों तथा वन्यजीवन की रक्षा करे’।
अनुच्छेद 51 ए (जी) नागरिकों को कर्तव्य प्रदान करता है कि वे ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे तथा उसका संवर्धन करे और सभी जीवधारियों के प्रति दयालु रहे’।
लगता है कि नगर पंचायत नगरी के सफाई विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को भारत सरकार द्वारा बनाए गए, इन नियम कानूनों का पालन करने में किसी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं है।
नगर सफाई के नाम पर उठाए गए सौकडों टन प्लास्टिक के कूड़े को वनों व तालाब में डाल कर प्रदूषण नियंत्रण व निवारण के सभी कायदे-कानून की धज्जिया उडाई जा रही है।
भारत सरकार द्वारा बनाए गए संविधान के अनुच्छेद 48 ए तथा 51ए(जी) का उल्लंघन करने की वजह से नगर पंचायत के
अधिकारियों पर शासन द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिए।
नगंरानाला वनकाष्टागार के पीछे के जंगलों व राजाबाडा के पास पैठुतालाब में सैकडों टन पालिथिन कचरा डालकर पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाई जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण व निवारण के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
हरे भरे वनों को खत्म किये जाने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर कार्रवाई की जानी चाहिए।