काटे जा रहे है सैकडो हरे-भरे वृक्ष, पर्यावरण के नियमों उडाई जा रही है धज्जियाँ
राजशेखर नायर/धमतरी ब्यूरो/दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र
प्रश्न उठता है क्या शासन द्वारा बनाए गए नियम कायदे सिर्फ आम आदमी पर लागू होता है।
रसूखदारों के लिए यह नियम कायदे उनके तो लिया कि हिसाब से बदले जा सकते हैं।
कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
एक तरफ जलाऊ लकड़ी के लिए लोग परेशान है। कोई गलती से एकाद हरे वृक्षों को काटते हुए पकड़ा जाए तो उसके ऊपर भारी भरकम जुर्माना व अपराध कायम किये जाते है।
पर कुछ रसूखदार लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए , सैकड़ों वृक्षों बलि दी जा रही है।
अंधाधुन हरेभरे वृक्षों की कटाई की जा रही है।
नगरी के जंगलपारा, नगंरा नाला क्षेत्र को बड़े झाड़ के जंगलों में गिना जाता है, पर भू माफिया व लकड़ी तस्करों ने जंगल का सर्वनाश कर दिया और यह कार्य अभी जारी है ।
धीरे-धीरे हरे भरे वृक्षों को काटा जा रहा है जंगलों का नाश किया जा रहा है पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाई जा रही है ।
समय रहते रोका नहीं गया तो शासन की हरियाली योजना फाइलों में रह जाएगी
हरेभरे जंगल गायब हो जायेगे।