नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत उमरगांव के ग्रामीणों ने 25 जनवरी सोमवार को जनदर्शन पहुँचकर ज्ञापन सौंपा।जनदर्शन एवं जिला सीईओ को ज्ञापन देने के बाद ग्राम समिति उमरगांव के अध्यक्ष कृष्णा मारकोले ने कहा कि ग्राम पंचायत उमरगांव के पूर्व सरपंच मोहन पुजारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप तथ्यहीन एवं बेबुनियाद है, उन्होंने आगे बताया कि पूर्व सरपंच मोहन पुजारी अपने दो बार के सरपंच पद के 10 वर्षीय कार्यकाल में गांव के लोगों के साथ मिलजुल कर विकास कार्य का योजना बनाते थे तथा विभिन्न निर्माण कार्यों को तय मानकों के अनुसार एवं उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में पूर्ण कराते थे।ग्राम पटेल लिलम्बर शेष ने बताया की पूर्व सरपंच द्वारा समय समय पर ग्रामसभाओं का आयोजन कराते थे एवं कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों को ग्राम सभाओं, विशेष ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायत के बैठकों एवं सामाजिक अंकेक्षण दल के समक्ष प्रस्तुत कर उसका वाचन कर अनुमोदन कराते थे जिसमें उस समय किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं हुई थी, यह की पूर्व सरपंच के 10 वर्षीय कार्यकाल बहुत ही अच्छा एवं निर्विवाद रहा है। मोहन पुजारी के सरपंच पद से हटते ही उनसे व्यक्तिगत ईर्ष्या,द्वेष व दुर्भावना रखने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा भ्रष्टाचार का बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी राजनैतिक व सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है जो कि अनुचित है।ग्रामीणों ने बताया पूर्व सरपंच के कार्यकाल में हुए विभिन्न निर्माण कार्यों में हमें कोई आपत्ति नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी बताया की कुछ शिकायतकर्ता ऐसे है जिन्होंने प्रत्येक ग्रामसभाओं में उपस्थिति दिये हैं और निर्माण कार्यो का बकायदा अनुमोदन भी किये हैं और कुछ शिकायतकर्ता मोहन पुजारी के कार्यकाल में पंचायत को झांककर तक नही देखे है और निर्माण कार्यस्थल पर कदम तक नही रखे और तो और किसी भी ग्रामसभा में उपस्थित तक नही हुए है ऐसे लोग षड्यंत्र रचकर निराधार शिकायत किये हैं।ग्रामीणों ने शिकायत को सिरे से ख़ारिज करने की मांग की है।ज्ञापन देने वालों में पंच मंशा राम सोम, भगवान कुंजाम, शोभित राम नेताम, ग्राम समिति उपाध्यक्ष लखन पुजारी, सचिव जनक साहू, बेददास मानिकपुरी, महेश अग्रवाल, अंगेश हिरवानी, देवेन्द्र सेन, मेघराज ध्रुव सहित ग्रामीण शामिल रहे।
*पूर्व सरपंच मोहन पुजारी का कहना है मेरे 10 वर्ष के सरपंच कार्यकाल में विभिन्न निर्माण कार्यों को तकनीकी मानकों के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ व विभागीय ऑडिट के समक्ष प्रस्तुत कर नियमानुसार कराया हूँ मेरे सरपंच पद से हट जाने के बाद भ्रष्टाचार का झूठा आरोप लगा रहे हैं इससे साफ जाहिर होता है की मेरे समाजिक व राजनीतिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।*