नगरी। नगर की सडकों में पिछले कई माह से भटक रहे वृद्ध को आश्रय की दरकार है।
वृद्ध व्यक्ति ना ठीक से बोल सकता है। अपना नाम,पता बताने में असमर्थ है।
सड़कों के किनारे, किसी दुकान के चौराहे में सोने को मजबूर है। अगर कोई तरस खा कर भोजन करा दे तो पेट की आग बुझ जाती है ।अन्यथा भूखे ही पेट ही दिन गुजरता है।
लॉकडाउन होने से असहाय वृद्ध की परेशानी और अधिक बढ़ गई है। क्योंकि होटलें और छोटी-मोटी दुकान है बंद है।
आम दिनों में दुकानें खुली रहती थी तो कई दुकानदार वृद्ध पर तरस खाकर भोजन चाय, नाश्ता आदि की व्यवस्था करवा देते थे। अब यह सहायता भी बंद हो ग ई है।
वृद्ध के सामने भूखों मरने की नौबत आन पड़ी है।
अक्सर समाजसेवी सन्नी छाजेड़ उन्हें भोजन कराते हैं।
शासन इस असहाय वृद्ध व्यक्ति की मदद करें और किसी वृद्ध आश्रम में इन्हें सहारा प्रदान करें