राजीम /शौर्यपथ
अजय देवांगन
*वार्षिक वेतन वृद्धि में रोक लगाना - कर्मचारी विरोधी निर्णय नवापारा राजिम,,, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन गरियाबंद के जिलाध्यक्ष आरिफ मेमन के नेतृत्व में छतर सिंह देहरे(जिलाधीश गरियाबंद) व भोपाल तांण्डे ( जिला शिक्षाधिकारी) को वेतन वृद्धि में रोक के निर्णय वापस लेने एवं कोविड 19 कोरोना संबंधित कार्य कर रहे शिक्षक संवर्ग को 50 लाख रुपए की सुरक्षा बीमा कवर देने हेतु ज्ञापन सौंपा।इस अवसर पर जिलाध्यक्ष आरिफ मेमन ने कहा कि कोरोना काल मे सभी वर्ग को सहायता तो कर्मचारियों के लिए कठोर निर्णय क्यो? सरकार इस आदेश को तत्काल वापस ले,इससे पहले मंहगाई भत्ता पर अघोषित रोक तो अब इंक्रीमेंट पर स्पष्ट रोक उचित नही है।वित्त विभाग द्वारा मितव्ययिता व वित्तीय अनुशासन के नाम पर वर्ष में एक बार मिलने वाले इंक्रीमेंट में रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है, यह कर्मचारियों को हतोत्साहित करने वाला तथा कर्मचारी विरोधी आदेश है।कोविड -19 के संक्रमण के बचाव हेतु लागू देशव्यापी लॉक डाउन के कारण राजस्व प्राप्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का हवाला देते हुए राजस्व प्राप्ति की भरपाई कर्मचारियों के इंक्रीमेंट रोककर करना सर्वथा अनुचित तथा असहनीय है।शासन के पास राजस्व प्राप्ति के अन्य माध्यम भी है उनका उपयोग सरकार को करना चाहिए।कोरोना संक्रमण काल मे निम्न वर्ग को विभिन्न प्रकार के लाभ व सुविधाएं दी जा रही है, वही उद्योग, व्यापार के लिए सहायता का पैकेज जारी किया गया है, तो कर्मचारियो के हिस्से में वर्ष में एक बार वेतनवृद्धि का समय आता है, उस पर रोक लगाने से महंगाई के दौर में उनके परिवार की व्यवस्था बिगड़ जाएगी, आखिर सरकार कर्मचारियो के लिए ऐसे कठोर निर्णय कैसे ले सकती है,इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने की है।ज्ञात हो कि प्रदेश के सभी कर्मचारी वर्तमान करोना काल मे भी इस महामारी से लड़ने हर स्तर पर सहयोग कर रहे है, कर्मचारियो ने अपने वेतन से 1 दिन का वेतन भी कोरोना लड़ाई में सहायता हेतु दिया है, ऐसे में उनके इंक्रीमेंट को रोकना मतलब कर्मचारियों के कार्य करने की क्षमता पर अवरोध उतपन्न करना है।पहले से ही अघोषित रूप से मंहगाई भत्ता रुका हुआ है, उसे जारी करने के बजाय वेतन वृद्धि रोककर वेतन को स्थायी करने का आदेश अव्यवहारिक है, कर्मचारियो की सेवाभाव व कर्मचारी परिवार के हित में इस आदेश को सरकार तत्काल वापस ले। जिलाध्यक्ष मेमन ने आगे बताया कि विभिन्न प्रदेशों से जिन कामगार व मजदूरों को प्रदेश में लाया जा रहा है उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर में रखा जा रहा है।कोरोना संक्रमण का खतरा होने पर भी ड्यूटी कर रहे है। इनके बावजूद कर्मचारियों की वेतन वृद्धि में भी रोक लगा दिया गया है जबकि वर्तमान समय मे सरकारी कर्मचारियों की हित में निर्ण लेकर उनका मनोबल बढ़ाने की आवश्यकता है।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव यशवंत बघेल,प्रदेश सहसचिव विनोद सिन्हा, प्रांतीय आई टी सेल प्रभारी पूरन लाल साहू,गिरीश शर्मा,गीता शरणागत,लता ध्रुव,छन्नू सिन्हा, भुवन यदु,अवनीश पात्र,घनश्याम दिवाकर,संजू साहू,परमेश्वर निर्मलकर, हुलस साहू,संतोष साहू,गोविंद पटेल,लतीफ़ खान,भागचंद चतुर्वेदी, दिनेश्वर साहू,जितेंद्र सोनवानी, नितिन बखरिया,नन्द कुमार रामटेके,मुकुंद कुटारे, सुरेश केला,टिकेंद्र यदु,किरण साहू,संजय यादव सहित जिले के शिक्षकों ने वार्षिक वेतनवृद्धि में रोक की आदेश को वापस लेने की मांग की है*