नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी , दोनों ने सोमवार को फोन पर पार्टी के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद से बात की. कांग्रेस कार्यसमिति की मैराथन बैठक में 'असंतुष्ट' वाले लेटर को लेकर निशाने पर आने के बाद यह बातचीत की गई है. पार्टी नेतृत्व को लेकर लिखे गए लेटर में गुलाम नबी आजाद ने भी दस्तखत किए थे. सूत्रों ने बताया कि CWC की करीब सात घंटे तक चली बैठक में कई वक्ताओं ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पत्र में 'पूर्णकालिक और दूरदर्शी नेतृत्व' की मांग को लेकर आजाद पर निशाना साधा था. इसके बाद सोनिया ने आजाद से बात की और आश्वस्त किया कि उनकी चिंताओं पर पूरा ध्यान दिया जाएगा.
दिन की शुरुआत में राहुल गांधी ने भी आजाद से बात की थी. राहुल ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को भी फोन किया था. सिब्बल ने भी लेटर पर दस्तखत किए थे. राहुल ने बातचीत के दौरान साफ किया था कि उन्होंने पत्र लिखने वालों पर बीजेपी से मिले होने का आरोप नही लगाया था. गौरतलब है कि राज्यसभा ने नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद को गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है, लेकिन CWC में उन्हें अपने सहयोगियों की आलोचना का शिकार बनना पड़ा. पार्टी के इन नेताओं ने सोनिया गांधी की प्रशंसा की और पत्र लिखने वाले नेताओं पर जमकर निशाना साधा. खबरों के अनुसार, मल्लिकार्जुन खड़गे और अंबिका सोनी ने इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जबकि अधीर रंजन चौधरी चाहते थे कि आजाद को बैठक में बोलने से रोका जाए. उन्होंने कहा कि 'दूषिेत इरादे' वाले लोगों को बोलने नहीं दिया जाए हालांकि सोनिया गांधी ने इस पर ध्यान नहीं दिया.
आजाद ने कहा था कि यदि यह बात साबित हो जाए कि उन्होंने बीजेपी के साथ मिलीभगत करके लेटर लिखा है तो वे इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस नेता लेटर को पढ़े ही आरोप लगा रहे हैं. लेटर पर दस्तखत करने वाले दो अन्य नेताओं ने भी आजाद की तरह ही राय जताते हुए कहा कि उनका इरादा किसी भी तरह से सोनिया के नेतृत्व की आलोचना करना नहीं था. ये दोनों नेता भी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में थे. लेटर पर दस्तखत करने वाले कुछ नेताओं ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद दिल्ली स्थित आजाद के आवास पर मिले थे. कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, मुकुल वासिनक, आनंद शर्मा और शशि थरूर मीटिंग में थे.