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दुर्ग। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर दुर्ग शहर की राजनीति इन दिनों पूरी तरह गर्म हो चुकी है। ऑनलाइन मतदान प्रक्रिया और 35 वर्ष की आयु सीमा के बीच युवा नेतृत्व की इस लड़ाई ने कांग्रेस संगठन के भीतर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। चुनावी मैदान में मनीष सोनवानी, ऋषि साहू, रौनक दुबे और मोहित वाल्दे जैसे युवा चेहरे अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा मनीष सोनवानी और ऋषि साहू के बीच सीधे मुकाबले की हो रही है।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं और संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों पर नजर डालें तो मनीष सोनवानी वर्तमान समय में सबसे मजबूत और संगठित दावेदार के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता, संगठन में बढ़ती स्वीकार्यता तथा विभिन्न स्तरों पर मिल रहा सहयोग उन्हें अन्य प्रत्याशियों की तुलना में बढ़त दिलाता नजर आ रहा है। कांग्रेस के कई सक्रिय कार्यकर्ता मानते हैं कि यदि वर्तमान परिस्थितियां इसी प्रकार बनी रहती हैं तो मनीष सोनवानी अध्यक्ष पद की दौड़ में निर्णायक बढ़त हासिल कर सकते हैं।
दूसरी ओर ऋषि साहू भी चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ डटे हुए हैं। उनके समर्थन में विवेक मिश्रा लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऋषि साहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी पूर्व विधायक अरुण वोरा के करीबी समर्थक के रूप में बन रही छवि है। कांग्रेस के भीतर बदलते शक्ति संतुलन के बीच यह समीकरण कई युवाओं को आकर्षित करने के बजाय दूरी बनाने के लिए भी प्रेरित कर सकता है।
रौनक दुबे भी चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। उन्हें पूर्व विधायक स्तर के कुछ नेताओं का समर्थन मिलने की चर्चाएं हैं और युवा वर्ग का एक हिस्सा उनके साथ दिखाई देता है। हालांकि संगठनात्मक स्तर पर अभी तक वह उतनी मजबूत स्थिति बनाते नजर नहीं आ रहे जितनी मनीष सोनवानी के पक्ष में दिखाई दे रही है।
यदि दुर्ग कांग्रेस की राजनीति को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो एक समय प्रदेश कांग्रेस और दुर्ग कांग्रेस की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा वोरा बंगला अब पहले जैसी राजनीतिक ऊर्जा का केंद्र नहीं दिखाई देता। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में संगठनात्मक शक्ति और प्रभाव के स्तर पर पूर्व विधायक अरुण वोरा की स्थिति लगातार कमजोर हुई है। यही कारण है कि यूथ कांग्रेस चुनाव में भी प्रत्याशियों का पूरा राजनीतिक केंद्र अब केवल वोरा बंगले तक सीमित नहीं रह गया है।
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेजी से चल रही है कि युवा कांग्रेस के इस चुनाव में कई कार्यकर्ता ऐसे प्रत्याशियों के पक्ष में खड़े होना चाहते हैं जो भविष्य की नई राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हों। इस दृष्टिकोण से मनीष सोनवानी को लाभ मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि अरुण वोरा समर्थक माने जाने वाले खेमों को अतिरिक्त राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे चुनावी परिदृश्य के बीच मोहित वाल्दे भी लगातार दमदारी से चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में मुकाबला मुख्य रूप से मनीष सोनवानी और ऋषि साहू के बीच सिमटता हुआ दिखाई देता है, जबकि रौनक दुबे तीसरे कोण के रूप में चुनावी गणित को प्रभावित कर सकते हैं।
उधर दुर्ग शहर कांग्रेस की सक्रियता भी इस चुनाव को विशेष महत्व प्रदान कर रही है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल में कांग्रेस की जमीनी गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। लंबे समय बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क से लेकर संगठन तक सक्रिय दिखाई दिए हैं। ऐसे में युवा कांग्रेस के चुनाव को केवल एक संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं बल्कि भविष्य के नेतृत्व चयन के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब सबकी निगाहें ऑनलाइन मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हैं। क्या मनीष सोनवानी अपनी बढ़त को जीत में बदल पाएंगे? क्या ऋषि साहू राजनीतिक चुनौतियों को पार कर वापसी करेंगे? क्या रौनक दुबे अंतिम समय में समीकरण बदल देंगे? इन सभी सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। फिलहाल दुर्ग की राजनीति में एक बात स्पष्ट दिखाई दे रही है कि युवा नेतृत्व की इस लड़ाई में मनीष सोनवानी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में चर्चा के केंद्र में हैं।
नोट:यह लेख राजनीतिक विश्लेषण और चर्चाओं की शैली में तैयार किया गया है,
महतारी वंदन की 28वीं किस्त जारी, वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों के लिए आधुनिक पुनर्वास केंद्रों का शिलान्यास
बेलतरा महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय सखाराम सूर्यवंशी के नाम पर, पांच मंगल भवनों की घोषणा
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सुशासन, विकास और जनकल्याण राज्य सरकार की कार्यशैली और पहचान है। सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री श्री साय आज सुशासन तिहार के अंतर्गत हेमूनगर में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने 134 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया, महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी की तथा आमजनों के हित में अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में 80 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की। ट्राईसाइकिल प्राप्त कर लाभार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने कहा कि सरकार की संवेदनशील नीतियों का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से आवास की चाबियां भी सौंपीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने एसईसीएल के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) मद से 22 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 200 सीटर बहुउद्देशीय वृद्धाश्रम भवन का शिलान्यास किया। इस भवन में वरिष्ठ नागरिकों को प्राकृतिक चिकित्सा, योग, फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी तथा समग्र पुनर्वास जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि वृद्धजन समाज की अमूल्य धरोहर हैं और उनके सम्मानजनक जीवन के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।
इसी प्रकार मुख्यमंत्री ने 18 करोड़ 76 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 500 सीटर दिव्यांगजन शिक्षण-प्रशिक्षण एवं बहुउद्देशीय पुनर्वास केंद्र का शिलान्यास किया। यह केंद्र दिव्यांगजनों को शिक्षा, कौशल विकास, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑडिटरी ट्रेनिंग तथा पुनर्वास की समग्र सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इससे दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बनेंगे और रोजगार तथा स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने जिला चिकित्सालय में लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि इससे गंभीर एवं जटिल बीमारियों की जांच स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगी और मरीजों को बेहतर, त्वरित तथा सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सुशासन तिहार केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, सुरक्षा बलों के पराक्रम और बस्तर की जनता के सहयोग से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हो रही है। बस्तर में अब सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जा रही है। वहीं ई-डिस्ट्रिक्ट के तहत 400 से अधिक शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। आमजनों की समस्याओं के समयबद्ध निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सुविधा भी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि सुशासन तिहार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। जनता की भलाई और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए किया गया प्रत्येक प्रयास सुशासन का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने बिलासपुर एयरपोर्ट विस्तार, रेलवे अधोसंरचना विकास तथा अरपा परियोजना के सुदृढ़ीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि सुशासन तिहार सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही का जीवंत उदाहरण है। समाधान शिविरों में उमड़ रही भीड़ सरकार के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने 134 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लिए जिलेवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण घोषणाएं
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला की मांग पर बेलतरा महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय सखाराम सूर्यवंशी के नाम पर किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के नगर निगम क्षेत्र में पांच मंगल भवनों के निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार विशेष कार्ययोजना पर कार्य कर रही है और जिले से जुड़े सभी आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।
प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की
सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद, योजनाओं की जमीनी स्थिति की ली जानकारी
रायपुर, /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित श्री पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं।
भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है।
इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।
बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान मधुबन-जूना बिलासपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन नालंदा परिसर एवं एजुकेशन हब का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजना का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए तथा परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक अधोसंरचना परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने वाला ज्ञान एवं अवसरों का केंद्र बनने जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बिलासपुर पहले से ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले विद्यार्थियों का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र रहा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सीजीपीएससी, यूपीएससी, नीट, जेईई, एसएससी, बैंकिंग, व्यापम और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहां पहुंचते हैं।
ऐसे में आधुनिक सुविधाओं से युक्त एजुकेशन हब युवाओं को बेहतर अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराएगा और बिलासपुर को प्रदेश के प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
“यह परियोजना युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगी और बिलासपुर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी।”
— मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
लगभग 13 एकड़ शासकीय भूमि पर 120 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना में विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक सुविधाएं तैयार की जा रही हैं।
? नालंदा डिजिटल पब्लिक लाइब्रेरी
? 300-300 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास
? आधुनिक शैक्षणिक ब्लॉक
? डिजिटल अध्ययन एवं शोध सुविधाएं
? प्रतियोगी परीक्षा तैयारी हेतु अनुकूल वातावरण
? 48 बड़े रेंटल हॉल का निर्माण
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि विद्यार्थियों को अध्ययन, आवास और शैक्षणिक संसाधनों के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा।
एक ही परिसर में लाइब्रेरी, छात्रावास, अध्ययन कक्ष और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता से विद्यार्थियों को बेहतर और व्यवस्थित तैयारी का अवसर मिलेगा।
विशेष रूप से दूरस्थ जिलों से आने वाले छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि परिसर में बनाए जा रहे 48 रेंटल हॉल भविष्य में नगर निगम के लिए नियमित आय का स्रोत बनेंगे।
यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की जा रही है, जिससे इसका संचालन वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर रहेगा और नगर निगम पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा जब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और प्रतिस्पर्धी माहौल उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि नालंदा परिसर और एजुकेशन हब केवल भवनों का समूह नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं की आकांक्षाओं और सपनों को साकार करने वाला एक सशक्त “ज्ञान केंद्र” होगा।
परियोजना पूर्ण होने के बाद बिलासपुर की पहचान केवल संभागीय मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह शहर प्रदेश और देश के उभरते शैक्षणिक केंद्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एजुकेशन हब आने वाले वर्षों में हजारों विद्यार्थियों के लिए सफलता का आधार बनेगा और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी नई गति देगा।
120 करोड़ रुपये की यह परियोजना केवल अधोसंरचना विकास नहीं, बल्कि मानव संसाधन निर्माण में निवेश है। यदि निर्धारित समय में यह एजुकेशन हब पूर्ण हो जाता है, तो बिलासपुर छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है, जिससे युवाओं को महानगरों की ओर पलायन की आवश्यकता भी कम होगी।
रायपुर, । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि शासन और प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता की समस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रशासन जवाबदेही के साथ कार्य करे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान आयोजित समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के विकास कार्यों, राजस्व मामलों, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल व्यवस्था तथा खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य लंबित राजस्व प्रकरणों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ये मामले सीधे आम नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं।
उन्होंने एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए और कहा कि राजस्व न्याय व्यवस्था में अनावश्यक विलंब से जनता का विश्वास प्रभावित होता है।
“राजस्व प्रकरणों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।”
— मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए और अधिकारियों को लगातार निगरानी रखनी होगी।
वहीं आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम, दवा उपलब्धता और उपचार व्यवस्था के लिए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए खाद एवं बीज की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक और बीज उपलब्ध कराए जाएं तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रखी जाए।
पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि:
जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे लागत कम हो और उत्पादन बढ़े।
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उन्होंने स्वयं प्रदेशभर में आयोजित समाधान शिविरों में भाग लेकर आम नागरिकों से सीधा संवाद किया है। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि शासन-प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायत निवारण अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच संवाद और विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की 28वीं किश्त जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा—
“शासन की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है। यही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत नींव बनेगा।”
बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, सांसद कमलेश जांगड़े, विभिन्न विधायकगण, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा पांचों जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के साथ-साथ मुख्यमंत्री विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रमों में भी सहभागिता करेंगे।
मुख्यमंत्री सुबह 11:25 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर से प्रस्थान कर पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर पहुंचेंगे। यहां वे पूर्व दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक निर्धारित है।
चिकित्सा शिक्षा से जुड़े इस आयोजन में भावी चिकित्सकों और चिकित्सा क्षेत्र के विद्यार्थियों को संबोधित करने की संभावना है। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है, ऐसे में मुख्यमंत्री की उपस्थिति इस कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान करती है।
दोपहर बाद मुख्यमंत्री न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर पहुंचेंगे, जहां वे "मुख्यमंत्री चौपाई एवं मेधावी शिक्षा सहायता योजना" कार्यक्रम में शामिल होंगे।
यह कार्यक्रम राज्य के प्रतिभाशाली एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्रोत्साहन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार द्वारा शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए विभिन्न सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम अरण्य भवन, नया रायपुर में आयोजित होगा। यहां वे शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक आयोजित "विश्व पर्यावरण दिवस-2026" कार्यक्रम में शामिल होंगे।
पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, जल संरक्षण और हरित विकास को लेकर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के मद्देनजर यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री द्वारा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नए संदेश या पहल की घोषणा की भी संभावना जताई जा रही है।
इसके बाद मुख्यमंत्री शाम 6 बजे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर पहुंचेंगे। यहां निर्धारित कार्यक्रम में सहभागिता के बाद वे पुनः मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे।
मुख्यमंत्री के पूरे दिन के कार्यक्रम का विश्लेषण करें तो स्पष्ट होता है कि उनका फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा। एक ओर जहां चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को संबोधित किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर मेधावी छात्रों के लिए सहायता योजनाओं और पर्यावरण संरक्षण जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर भी सरकार की सक्रियता दिखाई देगी।
विशेष रूप से विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री की सहभागिता राज्य में हरित विकास और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
शौर्यपथ विश्लेषण:
आज का दौरा कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की उन प्राथमिकताओं को भी प्रदर्शित करता है जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं का सशक्तिकरण प्रमुख स्थान रखते हैं। मुख्यमंत्री का दिन इन चारों क्षेत्रों से जुड़े कार्यक्रमों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहने वाला है।
दुर्ग । आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए नगर पालिक निगम दुर्ग ने शहर को जलभराव और गंदगी की समस्या से बचाने के लिए विशेष सफाई अभियान तेज कर दिया है। महापौर अलका बाघमार के निर्देश पर निगम क्षेत्र के सभी बड़े और छोटे नालों तथा नालियों की व्यापक सफाई का कार्य 60 वार्डों में युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है।
निगम प्रशासन का लक्ष्य मानसून के आगमन से पहले जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करना है, ताकि बारिश के दौरान शहरवासियों को जलभराव, गंदगी और मच्छरों की समस्या का सामना न करना पड़े।
महापौर अलका बाघमार ने कहा कि वर्षा के दौरान नागरिकों को राहत प्रदान करना और शहर की जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना निगम की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग प्रभारी निलेश अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा वार्ड पार्षदों की निगरानी में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सफाई कार्य केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि नालियों और नालों की तल तक सफाई सुनिश्चित की जाए, जिससे पानी के बहाव में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
निगम की सफाई टीमों द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में नालों और नालियों से जमा गाद, प्लास्टिक, कचरा एवं अन्य अवरोधक सामग्री को हटाया जा रहा है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी भी की जा रही है, जहां हर वर्ष जलभराव की शिकायतें सामने आती रही हैं।
अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर कार्यों का निरीक्षण करने तथा नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
महापौर ने शहरवासियों से अपील की है कि वे नालियों और नालों में कचरा न फेंकें तथा स्वच्छता बनाए रखने में निगम का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ शहर के निर्माण में प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों की सहभागिता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नगर निगम द्वारा संचालित यह विशेष अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसून के दौरान संभावित समस्याओं की रोकथाम का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। निगम प्रशासन का दावा है कि समय रहते किए जा रहे इन कार्यों से बारिश के मौसम में जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी और नागरिकों को राहत मिलेगी।
शौर्यपथ विशेष:
दुर्ग नगर निगम का यह अभियान आगामी मानसून के लिए शहर की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि सफाई कार्य निर्धारित समय पर और प्रभावी ढंग से पूरा होता है, तो इस वर्ष जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी देखने को मिल सकती है।
राजनांदगांव, । छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। राजनांदगांव जिले के विभिन्न पंचायत क्षेत्रों में हुए उपचुनावों ने ग्रामीण राजनीति के नए संकेत दिए हैं। जनपद पंचायत सदस्य, सरपंच और पंच पदों के लिए हुए चुनाव में मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाते हुए नए जनप्रतिनिधियों का चयन किया।
सबसे अधिक चर्चा जनपद पंचायत डोंगरगांव निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-5 मचानपार की रही, जहां मुकाबला बेहद रोचक और कांटे का था।
जनपद पंचायत सदस्य पद के लिए हुए चुनाव में द्वारिका दास टंडन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेतराम देशलहरे को 75 मतों के अंतर से पराजित कर जीत दर्ज की।
| अभ्यर्थी | प्राप्त मत |
|---|---|
| द्वारिका दास टंडन | 1269 |
| नेतराम देशलहरे | 1194 |
| भानूराम नारंग | 610 |
| आत्मा राम रात्रे | 235 |
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह परिणाम क्षेत्र में द्वारिका दास टंडन की मजबूत जनस्वीकृति का संकेत माना जा रहा है। हालांकि नेतराम देशलहरे ने भी कड़ी टक्कर देकर मुकाबले को अंतिम दौर तक रोचक बनाए रखा।
ग्राम पंचायत ककरेल में सरपंच पद के लिए हुए चुनाव में मतदाताओं ने नरेन्द्र कुमार भारती को अपना नया सरपंच चुना।
| अभ्यर्थी | प्राप्त मत |
|---|---|
| नरेन्द्र कुमार भारती | 455 |
| शंकर लाल देशलहरे | 380 |
| केजू राम टण्डन | 319 |
नरेन्द्र कुमार भारती की जीत को स्थानीय स्तर पर विकास, जनसंपर्क और सामाजिक सक्रियता के प्रति जनता के विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
पंच पद के लिए दिलाशा साहू विजयी घोषित की गईं।
| अभ्यर्थी | प्राप्त मत |
|---|---|
| दिलाशा साहू | 67 |
| अनोखी बाई | 42 |
| पार्वती साहू | 0 |
पंच पद के लिए डामेश्वरी साहू निर्वाचित घोषित हुईं।
| अभ्यर्थी | प्राप्त मत |
|---|---|
| डामेश्वरी साहू | 66 |
| कांति बाई साहू | 44 |
| संतोषी | 44 |
त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव के ये परिणाम केवल जनप्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र की सक्रियता और मतदाताओं की जागरूकता को भी दर्शाते हैं। पंचायत स्तर पर चुने गए प्रतिनिधियों के सामने अब क्षेत्रीय विकास, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, पेयजल, सड़क, स्वच्छता और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
मचानपार और ककरेल के परिणामों ने यह स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे, जनसंपर्क और व्यक्तिगत विश्वसनीयता आज भी चुनावी सफलता का सबसे बड़ा आधार बने हुए हैं। आने वाले पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए भी इन परिणामों को महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेतक माना जा रहा है।
शौर्यपथ विश्लेषण:
राजनांदगांव जिले के इन उपचुनाव परिणामों ने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण मतदाता विकास, उपलब्धता और स्थानीय नेतृत्व की कार्यशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं। विजयी उम्मीदवारों के सामने अब जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी।
राजनांदगांव, । मानसून आगमन की संभावना के साथ जिले के किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। आगामी खरीफ सीजन में जिले में लगभग 1.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी संभावित है। किसानों को समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग द्वारा एक अप्रैल से ही सहकारी समितियों में भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में 45,650 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत 18,500 मीट्रिक टन यूरिया, 4,000 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी), 3,600 मीट्रिक टन म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) तथा 9,800 मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के एनपीके उर्वरकों का लक्ष्य शामिल है।
निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध अब तक जिले में 12,000 मीट्रिक टन से अधिक यूरिया, 365 मीट्रिक टन से अधिक एसएसपी, 2,755 मीट्रिक टन से अधिक एमओपी तथा लगभग 3,000 मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। खरीफ सीजन की तैयारी के साथ किसान लगातार उर्वरकों का उठाव कर रहे हैं और अब तक 17,205 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। वितरण के बावजूद जिले में वर्तमान में 12,584 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो किसानों की जरूरतों की पूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
बीज उपलब्धता के संबंध में विभाग ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए धान सहित विभिन्न दलहनी एवं तिलहनी फसलों हेतु 14,331 क्विंटल बीज की आवश्यकता का आकलन किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 7,236 क्विंटल बीजों का भंडारण सहकारी समितियों में किया जा चुका है। किसानों द्वारा लगातार बीजों का उठाव किया जा रहा है तथा अब तक 1,533 क्विंटल बीजों का वितरण भी किया जा चुका है।
कृषि विभाग किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा प्राकृतिक रूप से नत्रजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। इसके तहत जिले में 350 क्विंटल मूंग बीज एवं 100 क्विंटल धैचा बीज का भंडारण किया गया है। किसान इनका उपयोग हरी खाद के रूप में कर भूमि की उत्पादकता एवं जैविक गुणवत्ता में वृद्धि कर सकते हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खरीफ फसलों की बुआई के लिए आवश्यक खाद एवं बीज का समय पर उठाव करें तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करें।
इतिहास डेस्क | 05 जून
5 जून का दिन विश्व इतिहास और भारत के लिए कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। यह तिथि विशेष रूप से विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के रूप में जानी जाती है, जिसकी शुरुआत पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई थी। इसके अलावा इसी दिन ऑपरेशन ब्लू स्टार, एड्स के पहले मामलों की पहचान, और कई ऐतिहासिक घटनाएं दर्ज हुईं।
वर्ष 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन के दौरान 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद 5 जून 1974 को पहली बार यह दिवस मनाया गया।
आज यह दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण जागरूकता अभियान माना जाता है, जिसमें 150 से अधिक देशों के लोग और संस्थाएं भाग लेते हैं।
मुगल शासक औरंगजेब आधिकारिक रूप से दिल्ली की गद्दी पर बैठा और उसके शासनकाल की औपचारिक शुरुआत हुई।
अमेरिका के फिलाडेल्फिया और बाल्टीमोर के बीच टेलीग्राफ लाइन का संचालन शुरू हुआ, जिसने संचार क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रखा।
अमेरिकी लेखिका हैरियट बीचर स्टोव के प्रसिद्ध उपन्यास Uncle Tom's Cabin का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। इस पुस्तक ने दास प्रथा के खिलाफ जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मध्य पूर्व में इजरायल और अरब देशों के बीच छह दिवसीय युद्ध (Six-Day War) शुरू हुआ। युद्ध के पहले ही दिन इजरायल ने मिस्र के सैकड़ों लड़ाकू विमानों को नष्ट कर सैन्य बढ़त हासिल कर ली थी।
संयुक्त राष्ट्र ने स्टॉकहोम सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया।
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC (Centers for Disease Control and Prevention) ने पहली बार ऐसे मामलों की रिपोर्ट जारी की, जिन्हें बाद में AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) के रूप में पहचाना गया। यह आधुनिक चिकित्सा इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।
भारत के पंजाब राज्य में स्थित स्वर्ण मंदिर, अमृतसर परिसर में छिपे उग्रवादियों को हटाने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे चर्चित और संवेदनशील सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।
पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पूरी दुनिया में मनाया जाता है।
5 जून 1915 को डेनमार्क में लागू हुए नए संविधान ने महिलाओं को मतदान का अधिकार सहित कई लोकतांत्रिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया। इस उपलब्धि की स्मृति में संविधान दिवस मनाया जाता है।
5 जून केवल एक तिथि नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक चेतना, लोकतांत्रिक अधिकारों और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं की याद दिलाने वाला दिन है। यह दिन हमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने और इतिहास से सीख लेकर बेहतर भविष्य बनाने की प्रेरणा देता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
