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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश कहर, भूस्खलन की वजह से अब तक 60 की मौत

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   नई दिल्ली /शौर्यपथ /सुंदर पहाड़ों और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बाढ़ के कारण इस सप्ताह अब तक कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई है, जो पिछले सप्ताह भारी बारिश की मार झेल रहा है. राज्य की राजधानी शिमला के समर हिल, कृष्णा नगर और फागली में रविवार से भूस्खलन में दर्जनों लोगों की मौत हो गई है, जबकि आज सुबह समर हिल में एक और भूस्खलन की सूचना मिली है.
  एक अधिकारी ने कहा कि समर हिल में मलबे से 13 शव बरामद किए गए हैं, फागली से पांच और कृष्णा नगर से दो शव बरामद किए गए हैं. सोमवार को ढहे मंदिर के मलबे में कई अन्य लोगों के दबे होने की आशंका है. कल शाम शिमला के कृष्णा नगर में भूस्खलन से लगभग आठ घर बह गए, जिससे दो लोगों की मौत हो गई. कई अन्य मकान खाली करा लिए गए. सोलन जिले में बादल फटने की घटना में सोमवार को सात लोगों की मौत हो गई.
     मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने हेलीकॉप्टर से उतर रहे बचाए गए नागरिकों का एक वीडियो साझा करते हुए आज कहा कि निचले इलाकों से 800 से अधिक लोगों को बचाया गया है और निकासी के प्रयास जारी हैं. उन्होंने पिछले तीन दिनों में मौत का आंकड़ा 60 आंका है. उन्होंने कहा, एक बैठक बुलाई गई थी जहां संरचनात्मक मानदंडों और जल निकासी के मुद्दों को उठाया गया था. उन्होंने बताया, "बारिश के कारण बहुत नुकसान हुआ है. जिसकी भरपाई में समय लगेगा, लेकिन इसके लिए युद्ध स्तर पर काम किया जाएगा."
    खराब मौसम को देखते हुए राज्य भर के सभी स्कूल और कॉलेज 19 अगस्त तक बंद रहेंगे. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने भी तब तक शिक्षण गतिविधियों को निलंबित कर दिया है. अधिकारियों ने कहा कि भूस्खलन के कारण राज्य में कम से कम 800 सड़कें अवरुद्ध हैं और इस मानसून सीजन में राज्य को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी उत्तराखंड, जहां इस मानसून के मौसम में दर्जनों मौतें हुई हैं, दोनों में अधिक बारिश होने की संभावना है.
   राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मदद मांगी है और कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिमाचल प्रदेश को आपदा प्रभावित राज्य घोषित करना चाहिए.

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शौर्यपथ

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