नई दिल्ली /शौर्यपथ /ओस्लो / नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2020 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान कर दिया है. 'वर्ल्ड फूड प्रोग्राम' को शांति पुरस्कार दिया गया है. 'वर्ल्ड फूड प्रोग्राम' को प्रभावित क्षेत्रों में भुखमरी से लड़ने व शांति कायम करने से जुड़े सराहनीय कार्यों के चलते शांति पुरस्कार दिया गया है. ओस्लो में यह घोषणा की गई. नोबेल समिति अपने पसंदीदा उम्मीदवार को लेकर पूरी गोपनीयता बरतती है. इसके बावजूद विजेता की घोषणा से पहले अटकलें लगती रहती हैं.
इस बार, अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस साल का शांति पुरस्कार जलवायु कार्यकर्ता एवं स्वीडन की नागरिक ग्रेटा थनबर्ग, नर्व एजेंट हमले से उबर रहे रूस के नेता अलेक्सेई नवलनी और कोरोना वायरस संकट से निपटने में भूमिका के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन में से किसी को दिया जा सकता है. नवलनी ने अपने ऊपर हमले के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आरोप लगाया है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भी मानना था कि उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना चाहिए. इस पुरस्कार के लिए 318 उम्मीदवार थे, जिनमें से 211 व्यक्ति और 107 संगठन शामिल थे. नामांकन के लिए अंतिम समय सीमा 1 फरवरी, 2020 थी. इसका मतलब यह है कि मार्च में वैश्विक महामारी घोषित किए गए कोविड -19 से लड़ रहे योद्धाओं में से किसी को पुरस्कार मिलने की संभावना नहीं थी.