नई दिल्ली / एजेंसी / वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 5 जनवरी, 2026 को न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में पेश किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर चलाए गए ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत 3 जनवरी को अमेरिकी विशेष बलों ने मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स को वेनेजुएला की राजधानी काराकास स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई के बाद दोनों को अमेरिका लाया गया।
सोमवार दोपहर मैनहट्टन के फेडरल कोर्ट में जज एल्विन हेलरस्टीन के समक्ष पेशी के दौरान मादुरो को बेड़ियों में देखा गया। अदालत में उन्होंने स्वयं को ‘युद्ध बंदी’ बताते हुए कहा कि उनका अपहरण किया गया है। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने मादुरो पर नारको-टेररिज्म और कोकीन तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अभियोग के अनुसार, मादुरो पर दशकों तक अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल के साथ मिलकर मादक पदार्थों की तस्करी को संरक्षण देने का आरोप है।
अदालत में मादुरो ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा, “मैं निर्दोष हूँ, मैं अपने देश का राष्ट्रपति हूँ और मुझे जबरन लाया गया है।” उनके वकीलों ने यह दलील दी कि एक संप्रभु राष्ट्र के प्रमुख होने के नाते उन्हें संप्रभु प्रतिरक्षा (sovereign immunity) प्राप्त है। हालांकि, कोर्ट ने इस स्तर पर जमानत देने से इनकार कर दिया और मादुरो व उनकी पत्नी को ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर (MDC) में रखने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च, 2026 को निर्धारित की गई है।
इस घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। देश में डेल्सी रोड्रिग्ज ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है। मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिका में चल रही कानूनी कार्रवाई को लेकर वेनेजुएला सहित वैश्विक राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।