काठमांडू, ।
नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने वित्तीय अनियमितताओं और विवादित कारोबारी संबंधों के गंभीर आरोपों के बीच 22 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हैरानी की बात यह है कि उनकी नियुक्ति को महज 26 दिन ही हुए थे, जिससे यह मामला नई सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका बन गया है।
क्या है पूरा विवाद?
गुरुंग पर आरोप है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के घेरे में चल रहे व्यवसायी दीपक कुमार भट्ट की कंपनियों—लिबर्टी माइक्रो लाइफ इंश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस—में निवेश किया।
बताया गया कि उन्होंने दोनों कंपनियों में 25-25 हजार ‘फाउंडर शेयर’ खरीदे, जो सामान्य निवेश की तुलना में अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
जांच में सामने आए लेनदेन ने मामले को और गंभीर बना दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार:
- मई 2023 में उनके खाते में अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा बड़ी रकम जमा कराई गई
- चांग अग्रवाल ने ₹22.5 लाख और विजय कुमार श्रेष्ठ ने ₹37.5 लाख जमा किए
- इसके अगले ही दिन इन पैसों का इस्तेमाल शेयर खरीद में किया गया
इस पैटर्न ने संभावित बेनामी निवेश और फंड रूटिंग की आशंकाओं को जन्म दिया।
संपत्ति छिपाने का भी आरोप
आलोचकों का कहना है कि गुरुंग ने इन ‘अनलिस्टेड’ फाउंडर शेयरों को अपनी संपत्ति घोषणा में स्पष्ट रूप से अलग नहीं दिखाया, बल्कि सामान्य प्रतिभूतियों के साथ जोड़ दिया।
नेपाल के कानून के तहत मंत्रियों के लिए पारदर्शिता अनिवार्य है, ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया।
गुरुंग का बचाव
सुदन गुरुंग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा:
- शेयर उन्होंने वैध ऋण (Loan) के माध्यम से खरीदे
- उनकी घोषित संपत्ति ₹2 करोड़ से अधिक है
- किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने का उनका कोई इरादा नहीं था
इस्तीफे की वजह
गुरुंग ने अपने इस्तीफे में कहा कि:
“मैं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और किसी भी तरह के हितों के टकराव से बचने के लिए पद छोड़ रहा हूं।”
उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने गृह मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार खुद संभाल लिया है।
राजनीतिक असर: ‘एंटी-करप्शन’ छवि पर सवाल
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि:
- सुदन गुरुंग ‘Gen Z’ आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे
- यह आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ जन समर्थन के साथ उभरा था
- बालेन शाह की सरकार ने साफ-सुथरे शासन का वादा किया था
ऐसे में सरकार बनने के कुछ ही हफ्तों में इतना बड़ा विवाद सामने आना उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
विपक्ष का हमला और आगे की राह
नेपाल के विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- अगर जांच पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं हुई, तो यह मुद्दा सरकार के लिए लंबी राजनीतिक परेशानी बन सकता है
- वहीं, कड़ी और निष्पक्ष कार्रवाई सरकार की साख बचाने का एकमात्र रास्ता हो सकती है
निष्कर्ष:
सुदन गुरुंग का इस्तीफा केवल एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं, बल्कि उस राजनीतिक वादे की परीक्षा है, जिसमें भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का दावा किया गया था। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या बालेन शाह सरकार अपनी साख को बचा पाती है या नहीं।