फ्लाईदुबई FZ1073 में सह-पायलट के कथित हमले से मचा हड़कंप, विमान हजारों फीट नीचे आया; गंभीर रूप से घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर बचाई विमान में सवार लोगों की जान
दुबई/मुंबई। आसमान में करीब 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे एक यात्री विमान में अचानक ऐसी स्थिति पैदा हो गई, जिसने सैकड़ों जिंदगियों को कुछ ही क्षणों में खतरे में डाल दिया। लेकिन उस भयावह परिस्थिति में एक भारतीय पायलट की सूझबूझ, साहस और कर्तव्यनिष्ठा ने संभावित बड़ी विमान दुर्घटना को टाल दिया।
यह कहानी है मुंबई के रहने वाले कैप्टन स्मित मछार की, जो 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के कमांडर थे। दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में कथित तौर पर सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन मछार पर धारदार हथियार से हमला किया। संघर्ष के दौरान विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगा। उपलब्ध फ्लाइट-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार विमान कुछ ही समय में हजारों फीट नीचे आ गया।
कॉकपिट में खूनी संघर्ष, फिर भी नहीं हारी हिम्मत
रिपोर्टों के मुताबिक हमले में कैप्टन मछार गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने विमान पर नियंत्रण बनाए रखने और स्थिति को संभालने का प्रयास जारी रखा। बताया गया है कि संघर्ष के बीच उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद केबिन क्रू, यात्रियों और विमान में मौजूद अन्य प्रशिक्षित पायलटों ने हस्तक्षेप कर हमलावर को काबू करने में मदद की।
विमान को इसके बाद सऊदी अरब के तबूक स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी आपात लैंडिंग कराई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विमान में सवार यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया।
13 साल से ज्यादा का विमानन अनुभव
कैप्टन स्मित मछार मुंबई से हैं और जून 2022 में फ्लाईदुबई में डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन के तौर पर शामिल हुए थे। इससे पहले उन्होंने करीब 11 वर्षों तक स्पाइसजेट में काम किया, जहां वे वरिष्ठ कमांडर और बाद में लाइन ट्रेनिंग कैप्टन की भूमिका में रहे।
उनके पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार उनके पास 9,750 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है और वे बोइंग 737 परिवार के विमानों पर उड़ान भर चुके हैं।
दिलचस्प बात यह है कि विमानन उनका बचपन का सपना नहीं था। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने शुरुआत में टेक्सटाइल से जुड़ी पढ़ाई की थी और परिवार के कारोबार से जुड़ने की योजना थी। बाद में मुंबई में प्रबंधन की पढ़ाई के दौरान एक विमानन सेमिनार ने उनके करियर की दिशा बदल दी। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड में पायलट प्रशिक्षण लिया और विमानन क्षेत्र में प्रवेश किया।
गंभीर रूप से घायल, लेकिन खतरे से बाहर
हमले में घायल होने के बाद कैप्टन मछार को तबूक में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई और उनकी सर्जरी की गई। बाद की रिपोर्टों के अनुसार उन्हें आगे के उपचार के लिए दुबई ले जाया गया और उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है।
भारत से लेकर इजरायल तक सराहना
घटना के बाद कैप्टन मछार की बहादुरी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके साहस की सराहना की। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनके साहस को रेखांकित करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
मीडिया रिपोर्टों में इस घटना को संभावित रूप से एक बड़े विमान हादसे को टालने वाली घटना के रूप में वर्णित किया गया है। कुछ सार्वजनिक बयानों में इसकी तुलना “9/11 जैसी त्रासदी” की आशंका से भी की गई है। हालांकि, इस तुलना को घटना की जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित नेताओं और रिपोर्टों में व्यक्त आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
एक पायलट, एक कॉकपिट और सैकड़ों जिंदगियां
हजारों फीट की ऊंचाई पर जब हालात नियंत्रण से बाहर होते दिखाई दे रहे थे, तब गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मछार का विमान और उसमें सवार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रयास जारी रखना इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आया है।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि विमानन में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संकट की घड़ी में निर्णय लेने की क्षमता, प्रशिक्षण और मानसिक दृढ़ता कितनी महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल घटना की विस्तृत जांच जारी है। सह-पायलट की भूमिका, हमले का कारण और घटना के क्रम से जुड़े अन्य सवालों पर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन एक बात स्पष्ट है—30 सितंबर की उस उड़ान में कैप्टन स्मित मछार ने असाधारण दबाव के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाई और विमान को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।