नई दिल्ली /शौर्यपथ /मथुरा प्रियंका की यह चौथी किसान पंचायत है. किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाकर प्रियंका न केवल केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपना रही है बल्कि कांग्रेस के उस वोट बैंक को भी सहेजने की कोशिश कर रही है जो पिछले काफी समय से पार्टी से दूर छिटक गया है.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
ये कानून (कृषि कानून) नोटों की खेती करने वालों ने बनाया है. ये क़ानून खरबपतियों के लिए बनाया गया है
ये मथुरा की धरती अहंकार को तोड़ती है. यहां श्री कृष्णजी, इंद्र भगवान के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत लेकर आए थे. यहां 90 दिनों से 90 दिनों से किसान अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार ने उनकी पिटाई की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की. प्रधानमंत्री जो दुनिया के हर कोने तक घूम आए पर वो दिल्ली के बार्डर तक नहीं पहुंच पाए.
ब्रज क्षेत्र की गौशालाओं का बुरा हाल है, यहां पर गौवंश को न चारा मिल रहा है, न ही पानी. सरकार ने गौशालाओं के नाम पर 200 करोड़ आवंटित किए .. कहां हैं वो रूपए?
ये प्रधानमंत्री पिछली सरकार को दोषी ठहराते हैं.शुक्र करिए कि पिछली सरकार ने कुछ बनाया था. आपने तो कुछ बनाया नहीं. जो पिछली सरकारों ने बनाया वो जनता के उद्योग इन्होंने बेच दिए.
जब तक आप (किसान) लड़ते रहेंगे, तब तक मैं लड़ती रहूंगी. भगवान श्री कृष्ण इस सरकार का अहंकार तोड़ेंगे. इस सरकार का अहंकार हम तोड़ेंगे