दुर्ग । शौर्यपथ । वैसे तो दुर्ग निगम और भ्रष्टाचार एक दूसरे के पर्याय बन चुके है । प्रदेश का शायद एक मात्र निगम होगा दुर्ग निगम जिसमे निगम के हर कार्य में भ्रष्टाचार की बू आती है किंतु वर्तमान में एक ऐसा मामला सामने आया है जो मानवता को शर्मसार करता हुआ प्रतीत होता है । किसी भी परिवार के लिए अगर परिवार का कोई सदस्य इस दुनिया से अलविदा कह देता है तो उसके अपूर्ण दस्तावेज को पूर्ण करने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र अति आवश्यक हो जाता है और ना चाहते हुए भी दुखी परिवार अपने परिजनों का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने संबंधित शासकीय विभाग में जाता है । दुर्ग निगम क्षेत्र में अगर कोई व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसे मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए नगर पालिक निगम दुर्ग में मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा में जाना होता है जहां वह अपने परिजनों का मृत्यु प्रमाण पत्र बना सके प्रमाण पत्र बनाने के लिए निगम द्वारा शाखा में कोई फीस वसूली नहीं जाती है किंतु निगम के इस शाखा में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी रकम की मांग की जा रही है शौर्यपथ समाचार के पास ऐसे प्रमाण आए हैं जिसे साहब नजर आ रहा है कि किस प्रकार इस शाखा में आम जनता से प्रमाण पत्र के लिए नगद लेन देन किया जा रहा है एक तरफ शहर के विधायक अरुण वोरा कहते हैं कि शहर में सुशासन है और उनके इस सुशासन के दम पर ही अगला चुनाव आसानी से भारी मतों से जीत जाएंगे किंतु वही उनके विधानसभा के अंतर्गत आने वाले दुर्ग निगम में जहां निगम की सरकार और उसके मुखिया का चुनाव करने में विधायक वोरा का अहम योगदान था उसी निगम में मृत्यु पंजीयन शाखा में खुलेआम मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए रिश्वतखोरी चल रही है मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा वैसे ही चर्चा में रहता है इस विभाग में जिम्मेदार अधिकारी ना समय पर कार्यालय खोलते हैं और ना ही कार्य में निष्पक्षता बरतते है ।
बता दे की मृत्यू प्रमाण पत्र पंजीयन शाखा वही अधिकारी के अंतर्गत आता है जिस अधिकारी के ऊपर पूर्व में भी रिश्वतखोरी का आरोप लग चुका है जी हां आपने सही पढ़ा यह शाखा भी दुर्गेश गुप्ता के अंतर्गत आता है।
क्या शहर के महापौर धीरज बाकलीवाल आयुक्त मंडावी मामले को संज्ञान में लेकर ऐसे अधिकारी पर और उसके अधीनस्थ कार्य करने वाले कर्मचारियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करेंगे या आम जनता को गुमराह करने के लिए एक बार फिर नोटिस का खेल चलेगा जिस तरह सामान्य सभा में 3 दिनों के अंदर जांच पूर्ण होने की बात होने के बावजूद भी आज 2 महीने से ज्यादा हो गए हैं और रिश्वतखोरी के मामले में दुर्गेश गुप्ता के ऊपर बैठी जांच समिति अभी तक किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है क्या महापौर धीरज बाकलीवाल शहर को ऐसे ही सुशासन देंगे क्या संयुक्त कलेक्टर के अधिकारी मंडावी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के इस रिश्वतखोरी मामले पर मौन साधे रहेंगे या फिर कोई कड़ी कार्यवाही करेंगे..