शौर्यपथ लेख / रामदेव एक नाम एक ब्रांड है आज भारत में . बाबा रामदेव की पहचान योग गुरु के रूप में शुरू हो कर पतंजलि के ब्रांड पर पहुँच गयी . रामदेव पूरी दुनिया को योग की शिक्षा देने के कारण प्रसिद्द हुए और योग से निरोग की बात करते करते राजनीती में प्रवेश कर लिए २०११-से २०१४ तक बाबा रामदेव राजनीती में काफी सक्रीय रहे . तात्कालिक कांग्रेस सरकार पर लगातार हमला करने वाले रामदेव ने रामलीला मैदान में आन्दोलन शुरू कर दिया और अंत सलवार सूट के प्रसंग में हुआ . रामदेव ने २०१४ के चुनाव के पहले तात्कालिक सरकार को खूब परेशान किया आम जनता को भाजपा की सरकार आने पर पेट्रोल की कीमत ३५ रूपये तक मिलने की बात कही . आम जनमानस में रामदेव की बाते घर कर गयी और महंगाई की मार , पेट्रोल की बदती कीमत , सीमा पर जवानो के बलिदान के प्रसंगों का बहुत चतुराई से उपयोग किया . उपयोग इस लिए कहा जा सकता है कि २०१४ के बाद रामदेव ने कभी पेट्रोल की बढती कीमत पर कभी कुछ नहीं कहा ये तो रामदेव जाने और रामजी जाने . ऐसा नहीं कि नई सरकार आने के बाद पेट्रोल की कीमत कम हुई , महंगाई कम हुई , सीमा पर जवानो की शहादत कम हुई ,बेरोजगारी कम हुई , शिक्षका स्तर सुधरा , स्वास्थ्य का स्तर सुधरा किन्तु योग गुरु बाबा रामदेव मौन रहे या हो सकता है योग गुरु से व्यापारी रामदेव की राह पर व्यस्त हो जिस तरह रामदेव का व्यापार २०१४ के बाद तेजी से बढ़ा कई बार मन में ये सवाल उठता है कि रामदेव का दिखावा सिर्फ सत्ता परिवर्तन के लिए और अपने व्यापार की बढ़ोतरी के लिए ही था ? रामदेव योग से निरोग के साथ आयुर्वेद से निरोग का रास्ता अपनाते गए और भारत के बाज़ार के कई हिस्सों में कब्ज़ा कर लिया स्वदेशी का नारा देते हुए सामानों का मूल्य बढ़ाते गए और आज बाज़ार में ये स्थिति है कि महंगाई की मार झेल रही देशभक्त इंसान रामदेव के महंगे प्रोडक्ट खरीद रही है किन्तु बाबा रामदेव वर्तमान में महंगाई पर मौन है , तेल की बढती कीमत पर मौन है , बेरोजगारों की समस्या पर मौन है , स्वास्थ्य पर मौन है देशी वाहन से विदेशी वाहन के सफर में आज स्वदेशी का पाठ पढ़ाने वाले बाबा आखिर एक बार फिर जनता की भावनाओ के साथ खेलते हुए आयुर्वेद मंत्रालय के नियमो की पेजिदगीयो का फायदा उठाते हुए कोरोना संक्रमण के खौफ से जी रही दुनिया के सामने कोरोनिल ले आये . कोरोनिल एक आयुर्वेद दवा है और आयुर्वेद दवा का इंसानी शरीर में नकारात्मक असर ना के बराबर होता है ये सब जानते है .
आम जनमानस में ये धारणा है और कई वैज्ञानिक प्रमाण भी है कि आयुर्वेद की पद्दति से बनी दवा अगर शरीर को फायदा नहीं दे सकती तो नुक्सान भी नहीं होगा यही सबसे बड़ी खासियत है आयुर्वेद की किन्तु आयुर्वेद के नाम से बनी दवा से कोरोना ठीक होने का दावा करने वाले पतंजली के मालिक रामदेव को इस वैश्विक महामारी में क्या भारत सरकार के आयुष मंत्रालय को भरोसे में नहीं लेना चाहिए था . वो भी ऐसे वक्त जब सरकार कोरोना आपदा का दंश झेल रही है और देश में आर्थिक स्थिति चौपट जैसी है इस संजीवनी बूटी के परिक्षण के लिए पतंजलि को केंद्र सरकार को भरोसे में लेने से देश हित और देशभक्ति का उदाहरन तो पेश होता ही स्वदेशी की ताकत पर आम जनता को भी गर्व होता किन्तु केंद्र सरकार को भरोसे में लिए बिना आयुष मंत्रालय को भरोसे में लिए बिना कोरोना की दवा को बाज़ार में उतारने की आखिर क्या जल्दी थी रामदेव को आखिर क्या सन्देश देना चाहते है योग गुरु से व्यापारी गुरु बने रामदेव भारत सरकार और आम जनता को .
आम जनता सहित पूरी दुनिया यही प्रार्थना कर रही है कि कोई तो बना दे कोरोना की दवा . जब ऐसी स्थिति है तो व्यापारी रामदेव ने आखिर केंद्र सरकार को और आयुष मंत्रालय को भरोसे में क्यों नहीं लिया क्या केंद्र सरकार के कार्यो पर रामदेव को भरोसा नहीं रहा . हम तो अब भी यही प्रार्थना कर रहे है कि कोरोनिल से कोरोना का सफल इलाज हो सके और यह दवा कलयुग में संजीवनी का काम करे . वर्तमान में तो आयुष मंत्रालय ने इस दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी है किन्तु यही दुआ करते है कि बाबा रामदेव की दवा और दावा सही हो .... ( शरद पंसारी )