दुर्ग । शौर्यपथ । हम सड़क निर्माण पर धर्म की लड़ाई लड़ते रहे और यहां आम जनता अपनी जान गवा दी रही पिछले कुछ दिनों से दुर्ग में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर एक प्रकार से धर्म की लड़ाई चल रही है सत्ता पक्ष इसे शहर के सुंदरता और विकास की बात कर रही है वहीं विपक्ष इसे धर्म की लड़ाई के रूप में देख रही है किंतु इन सब बातों से सत्ता पक्ष और विपक्ष यह भूल गई कि इंसानियत मर रही है।
बता दें कि इन दिनों नेहरू नगर चौक से पुलगांव चौक, पुलगांव चौक से अंजोरा एवं पुलगांव चौक से अंडा रोड का निर्माण कार्य चल रहा है किंतु इस निर्माण कार्य में ठेकेदार कंपनी एसकेसी जो बेमेतरा के विधायक आशीष छाबड़ा से पारिवारिक संबंध है यह सभी को ज्ञात है कि आशीष छाबड़ा प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री साहू के अत्यंत करीबी एवं कट्टर समर्थक हैं ऐसे में ठेकेदार द्वारा इन जगहों पर निर्माण के समय किसी भी तरह की सुरक्षा मानकों का उपयोग नहीं किया जा रहा है वही इस कार्य को देखने वाले विभागीय अधिकारी इंजीनियर गगन जैन एसडीओपी चंद्रशेखर ओगरे एवं कार्यपालन अभियंता अशोक श्रीवास द्वारा भी पूरे शहर और अंडा रोड एवं अंजोरा रोड तक के सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर मौन साधे बैठे हैं मंगलवार की रात ऐसे ही सुरक्षा साधनों के अभाव के कारण दुर्ग जिले के निवासी और भारतीय सेना के एक जवान जो छुट्टियों में अपने घर आए हुए थे निर्माणाधीन सड़क में सफर करते हुए दुर्घटना के शिकार हो गए और मौत की आगोश में सो गए किंतु इसके बाद भी इस मामले पर बोलने में इंजीनियर गगन जैन बचते रहे वही एसडीओपी साहब से मिलने की कोशिश की गई किंतु वह भी अपने कार्यालय से नदारद रहे इस बारे में जब शौर्य पर समाचार पत्र के टीम ने कार्यपालन अभियंता अशोक श्रीवास से उनका पक्ष जानना चाहा तो कार्यालय में उपस्थित होने के बावजूद भी कार्यपालन अभियंता अशोक श्रीवास इस मामले में बात करने से मना कर दिए क्या एक जवान की मौत के बावजूद भी यह जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों से बचकर आखिर कब तक ठेकेदार का साथ देते रहेंगे।
वही धर्म की लड़ाई लाने वाले संगठन और विपक्ष सहित सत्ता पक्ष आखिर कब तक ठेकेदार द्वारा सुरक्षा साधनों के बिना कार्य करने पर एवं आम जनता के जान को जोखिम डाल कर कार्य कर रहे ठेकेदारों के खिलाफ आवाज उठाने पर कतरा रहे हैं क्या आम जनता के जान की फिक्र नहीं है जब इंसानियत ही मर जाएगी तो धर्म को क्या करेंगे।
आज प्रदेश के मुखिया के घर में जश्न का माहौल है वहीं प्रदेश सरकार के द्वारा हो रहे विकास कार्यों में हो रही अनियमितता के कारण आज एक घर में मातम का माहौल है और जो जवान देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने के लिए फौज में भर्ती हुए हैं वह शासन की अवस्थाओं के कारण सड़क दुर्घटना में अपनी जान गवा चुके हैं क्या अब भी प्रदेश सरकार की प्रदेश सरकार के मुखिया की प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री की जिला प्रशासन दूर की पीडब्ल्यूडी अभियंता की और ठेकेदार की आंख नहीं खुलेगी क्या एक फौजी की एक सड़क दुर्घटना में मौत के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं खुलेगी क्या आम जनता सिर्फ अव्यवस्थाओं के सामने अपनी जान जोखिम में डालते रहेगा आखिर कब तक ऐसा चलेगा