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छत्तीसगढ़ में गरमाया कुलपति नियुक्ति विवाद राज्यपाल बोली कुलपति एक ही समाज से क्यों , मुख्यमंत्री बघेल ने कहा राज्यपाल राजनीती कर रही जो प्रदेश हित में सही नहीं Featured

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विशेष संवाददाता ( शौर्यपथ )
रायपुर । छत्तीसगढ़ में सरकार और राज्यपाल के बीच एक बार फिर से तकरार शुरू हो गया है। इस बार विवाद राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद पर स्थानीय की नियुक्ति को लेकर है। इस मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यपाल अनुसुईया उइके को राजनीति नहीं करने की नसीहत देकर विवाद को और गरमा दिया है।
  शनिवार को उत्तर प्रदेश के चुनावी दौरे पर रवाना होने से पहले बघेल ने कहा कि (राज्यपाल) जो राजनीति कर रही हैं वह ठीक नहीं है। वह बेहद दुर्भाग्यजनक और राज्य के हित में नहीं है। वहीं, इस मामले में राज्यपाल का कहना है कि वे संविधान के दायरे में रहते हुए मेरिट के आधार पर काम करती हैं।
  उइके ने कहा कि यदि किसी को लगता है कि मैं नियमों में रहकर काम नहीं करती हूं तो न्यायालय के दरवाजे खुले हैं। वहां जा सकते हैं। इसलिए इसे राजनीतिक तरीके से नहीं देखना चाहिए। बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब राजभवन और सरकार के बीच विवाद की स्थिति बनी है। उइके के 2019 में राज्यपाल बनने के बाद से ऐसा कई बार हो चुका है।

सीएम ने पूछा- इस बार तकलीफ क्यों?
   एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि राज्यपाल तो किसी से भी मिलने चली जाती हैं तो इस बार उन्हें तकलीफ क्यों हो रहा है? बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग मांग कर रहे हैं तो यह गलत नहीं है। यहां प्रतिभा है तो उसकी अनदेखा नहीं करनी चाहिए। हाल- फिलहाल कुलपति के पद पर जिनती भी नियुक्तियं हुई हैं वो छत्तीसगढ़ के नहीं है। ं राज्यपाल हमारे संवैधानिक प्रमुख हैं। उन्होंने पूछा कि क्या छात्र राज्यपाल के समकक्ष अपनी बात नहीं रख सकते है।

एक ही समाज के हैं ज्यादातर विवि के कुलपति
  मुख्यमंत्री बघेल की नाराजगी की वजह राज्यपाल का वह बयान है जिसमें उइके ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एक ही समाज के कुलपति होने की बात की है। राज्यपाल ने कहा था कि राज्य के 14 में से नौ विश्वविद्यालयों में राज्य के लोग ही कुलपति हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह मुझे यह नहीं कहना चाहिए लेकिन कहना पड़ रहा है कि ज्यादातर कुलपति एक ही समाज के लोग का प्रतिनिधत्व करते हैं, जबकि राज्य में 32 प्रतिशत एसीट और 14 प्रतिशत एसी लोग हैं।

इस बार यह विवाद की ताजा वजह
  प्रदेश के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के लिए कुलपति चयन की प्रक्रिया चल रही है। स्थानीय व्यक्ति को कुलपति बनाने की मांग को लेकर पिछले बुधवार को विश्वविद्यालय शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचा था। इस दौरान स्थानीय को कुलपति बनाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की गई। शिक्षक संघ का कहना हैं कि नारेबाजी संघ की तरफ से नहीं की गई बल्कि वहां बिना बुलाए पहुंचे छात्रों ने किया था। इसे गंभीरता से लेते हुए राजभवन ने कुलपति से जवाब तलब किया है।
केंद्र सरकार और आरएसएस पर निशाना
  वहीं कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने भी इस मामले पर केंद्र सरकार और आरएसएस का बिना नाम लिए निशाना साधा है. उन्होंने रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, सभी लोगों को छत्तीसगढ़ के हित की रक्षा करनी है, कोई भी निर्णय छत्तीसगढ़ के हित को प्रभावित ना करें, इसका ख्याल रखना चाहिए. जब भी ऐसी कोई परिस्थिति बनती है तो दिल्ली वाले और नागपुर वाले सक्रिय हो जाते हैं यहां की व्यवस्थाओं पर अपना निर्णय थोपने की कोशिश करते हैं.

करीब डेढ़ वर्ष पहले शुरू हुआ था विवाद
  कुलपति की नियुक्ति को लेकर राजभवन और सरकार के बीच विवाद करीब डेढ़ वर्ष पहले पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति के साथ शुरू हुआ था। मार्च 2020 में इन दोनों विश्वविद्यालयों में राजभवन ने जिन लोगों को कुलपति नियुक्त किया उनके नामों पर राज्य सरकार सहमत नहीं थी। इसी तरह कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नाम बदलने का विधेयक भी राजभवन में लंबित है।

अधिकार अपने पास रखना चाहती है सरकार
  संवैधानिक रुप से कुलपति की नियुक्ति और उन्हें हटाने का अधिकार राज्यपाल के पास है, लेकिन राज्य के दो विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार ने कुलपति की नियुक्ति और हटाने का अधिकार अपने पास रखने का फैसला किया। इसके लिए सरकार ने विधानसभा में विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित कर चुकी है, लेकिन राज्यपाल की अनुमति नहीं मिलने के कारण यह लागू नहीं हो पाया है।

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Last modified on Sunday, 20 February 2022 21:37
शौर्यपथ