दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम क्षेत्र में इन दिनों अमृत मिशन के कार्यो के कारण जगह जगह गड्डे नजर आ रहे है .नई बनी सडको को भी पाइप के कार्य के लिए खोद दिया गया . यहाँ तक तो सब ठीक चल रहा कार्य भी गति पर है किन्तु इस कार्य में एक कार्य ऐसा है जो निगम के बजट को कुछ सालो में बढ़ा देगा और जिम्मेदार अधिकारी ऑफिस में बैठे बैठे नए कार्य की राह देखेंगे .
निगम क्षेत्र में पाइप बिछाने के बाद फिलिंग का कार्य भी अमृत मिशन के द्वारा तय मानको में किया जाना है किन्तु वर्तमान में अमृत मिशन इस कार्य को कई हिस्सों में छोटे छोटे ठेकेदारों से करा रहा है और यह ठेकेदार दिल खोल कर मिलावट कर रहे है जिसके कारण फिलिंग के कार्य की गुणवत्ता निम्न स्तर की हो रही है और दूसरी तरफ अमृत मिशन से जुड़े अधिकारी निगम के इंजिनियर भीम राव , ईई बाबर मौन है जानकारी प्राप्त होने के बाद भी सिर्फ जाँच की बात करते नजर आते है वही अमृत मिशन के जिम्मेदार कपिश भी जानकारी के बाद चुप्पी साधे बैठे है शायद उन्हें भी मालुम चल गया होगा कि दुर्ग निगम के इंजिनियर की जाँच की सीमा कहा तक है और क्या कार्यवाही कर सकते है . केंद्र सरकार की इस महत्तवपूर्ण योजना में निगम के इंजीनियरों की लापरवाही किसी बड़े भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर रही है क्योकि कार्य भी लाखो का नहीं करोडो का है और करोडो के कार्य में हो रहे भ्रष्टाचार में मौन रहने से कइयो के वारे न्यारे हो सकते है और वारे न्यारे भी ऐसे की जिन्दगी भर ऐश से गुजर सकती है शायद यही मंशा लेकर निगम के जिम्मेदार अधिकारी खुले आम हो रहे भ्रष्टाचार पर मौन धारण किये हुए है .
छोटे छोटे ठेकेदारों के निर्माण को तुड़वाकर नया बनाने का आदेश देने वाले आयुक्त क्या इस पर कार्यवाही करेंगे
बीते हफ्ते एक निर्माण में शिकायत मिलने के बाद आयुक्त बर्मन द्वारा ठेकेदार को निर्माण को तोड़ कर फिर से किये जाने का आदेश दिया था जो एक अच्छी पहल है . अब देखना यह है कि आयुक्त बर्मन इंदिरा मार्केट जैसे व्यस्तम मार्ग में स्तरहीन निर्माण पर कार्यवाही करेंगे या फिर मौन रहकर अमृत मिशन के करोडो के भ्रष्टाचार युक्त कार्य में साथ देंगे .क्योकि उनके अधिनस्त ईई बाबर सिर्फ जाँच की बात करते रह गए वही सब इंजिनियर द्वारा भी सुचना देने पर जाँच की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आरहे है .
ऐसे हो रहा भ्रष्टाचार ...
अमृत मिशन द्वारा पाइप लाइन बिछाने के बाद फिलिंग का कार्य भी किया जाना है और फिलिंग के कार्य में ईस्तमाल होने वाला कंक्रीट एक निश्चित मापदंड के अनुसार ही होना चाहिए जिसे अगर सरल भाषा में कहा जाए तो एक तगाड़ी सीमेंट में तीन तडागी रेत और ६ तगाड़ी गिट्टी ९ इसकी जानकारी (कपिश द्वारा दी गयी ) अमृत मिशन के साइड इंजिनियर द्वारा दी गयी किन्तु ठेकेदार द्वारा यह रेशो १/8/९ का है अर्थार्त अत्यधिक निम्न स्तर का फिलिंग कार्य हो रहा है जो कुछ समय बाद एक बार फिर शहर के जनता के लिए परेशानी का कारण बनेगा और एक बार फिर निगम इसे मरम्मत के नाम पर लाखो करोडो खर्च करेगा इस तरह जनता के पैसे की बंदरबाट होगी सिर्फ चंद ऐसे इंजीनियरों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण जो जनता की सेवा के लिए निगम में जिम्मेदार पद पर आसीन है और शासन से मोटी मोटी तनखा पाते है क्या ऐसे लोगो पर आयुक्त बर्मन द्वारा कोई कार्यवाही होगी .
शौर्यपथ समाचार पत्र ने ऐसे जगहों के विडिओ बनाए है जिसमे मिलावट का खेल चल रहा है अब उम्मीद करते है कि निगम के आयुक्त बर्मन और महापौर बाकलीवाल मामले को संज्ञान में लेंगे एवं सम्बंधित अधिकारियों पर उचित कार्यवाही करेंगे क्योकि निगम के सम्बंधित प्रभारी ( जल विभाग )संजय कोहले को इस कार्य से कोई मतलब नहीं जैसा कि उन्होंने फोन पर जानकारी दी .
स्तरहीन कार्य सुधारने विधायक वोरा भी कह चुके है अधिकारियों को
अमृत मिशन के कार्यो कारण हो रही परेशानी और स्तरहीन कार्य पर दुर्ग विधायक वोरा भी काफी नाराजगी जाहिर कर चुके है अब अगर प्रमाण होने के बाद भी कार्यवाही करने का अधिकार रखने वाले आयुक्त मौन रहते है तो शहर को तैयार हो जाना होगा आगे फिर से इसी तरह की परेशानी का सामना करने के लिए क्योकि स्तरहीन कार्य की उम्र ज्यादा नही होती . अमृत मिशन वाले तो हाथ झाड़ते हुए निकल जायेंगे किन्तु निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा .
किस स्तर पर हो रहा है मिलावट देखिये विडिओ पर