दुर्ग। शौर्यपथ। केंद्र की मोदी सरकार ने आम जनता की मूलभूत ज़रूरत शुद्ध जल के लिए अमृत मिशन योजना का शुभारंभ किया इस योजना के तहत निकाय क्षेत्र में इन दिनों पुराने पाइप लाइन को बदल कर नए पाइप लाइन बिछाने का कार्य जोरो पर है । वही कार्य इन दिनों दुर्ग निगम क्षेत्र में भी संचालित हो रहा है लगभग 144 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी महाराष्ट्र की कम्पनी लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन को मिला है । शासन की तय सीमा 30 माह में कम्पनी की यह कार्य करना है जिसमे शहर की पाइप लाइन के साथ 6 टंकियों के निर्माण की भी जवाबदारी है । महती और बड़े प्रोजेक्ट में निगम प्रशासन की बारीकी मॉनिटरिंग की अत्यंत आवश्यकता है जिसका अभाव दुर्ग निगम में लगातार नजऱ आ रहा है । नियमत: जनवरी 2018 से शुरू कार्य की सीमा जून 2020 तक खत्म हो जानी थी किन्तु वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि यह कार्य साल भर बाद ही खत्म होगा ।
एक्सटेंशन का भी नही मिला फायदा ...
कम्पनी को निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण नही करने से भुगतान में भुगतान राशि का 6 प्रतिशत नुकसान होता है स्थिति को देखते हुए निगम कमिश्नर को यह अधिकार होता है कि वह कार्य सीमा में कुछ महीनों का एक्सटेंशन दे सकते है दुर्ग निगम में भी यही हुआ कोरोना आपदा के कारण कार्य मे 4 से 8 महीने का एक्सटेंशन दे दिया गया । जबकि लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन द्वारा मात्र दो महीने का कार्य ही नही हो सका किन्तु 4 से 8 महीने का एक्सटेंशन देने से कंपनी के करीबन 10 लाख सूखे बच गए । अब लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है इतनी तेजी से कि गुणवत्ता को भी दरकिनार किया जा रहा है और निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी / इंजीनियर मौन है । वैसे भी अगर गुणवत्ता हीन कार्य की सूचना भी दी जाती है तो जि़म्मेदार निगम अधिकारी भीम राव द्वारा तुरंत संज्ञान ना लेकर ठेकेदारों से बात करने की सलाह दी जाती है । निगम द्वारा प्रदत्त आलीशान चेम्बर में बैठकर ही कागजो में गुणवत्ता की बात की जा रही है निगम अधिकारियों द्वारा । स्थिति तो यहां तक है कि प्रमाण देने के बाद भी निगम आयुक्त जांच की बात तो कहते है किंतु जांच कब होगी यह नही बताते ।
दिखावटी कार्यवाही का आश्वाशन ..
यदि मामले को निगम आयुक्त के संज्ञान में भी लाया जाता है तो एक सख्त अधिकारी की तरह अधिनस्त कर्मचारियों को तुरंत कॉल कर जांच की बात कहते है किंतु यह बात भी दिखावटी ही प्रतीति होती है । ऐसे ही एक मामले में शौर्यपथ समाचार ने कुछ जगहों पर स्तरहीन कार्य की मय प्रमाण सहित बात की तो आयुक्त द्वारा तुरंत संज्ञान लेकर जांच कराने का आदेश तो दे दिया किन्तु आदेश का पालन अधिनस्त कर्मचारी वर्तमान समय तक नही कर पाए । क्या इसका यह अर्थ नही निकलता कि या तो निगम आयुक्त के अधिनस्त निगम आयुक्त के आदेश को हल्के में लेते है या फिर अधिनस्त कर्मचारी और निगम आयुक्त शिकायत कर्ता के साथ सिर्फ दिखावे का कार्य कर रहे है ।
लेबर कांट्रेक्ट की आड़ में पेटी कांट्रेक्ट...
वर्तमान में दुर्ग निगम क्षेत्र में पाइप फिटिंग के बाद फिलिंग का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है जिसमे कार्य एजेंसी द्वारा शहर के ठेकेदारों को पेटी कांट्रेक्ट में कार्य देने का मामला सामने आ रहा है किंतु इसे चतुराई से लेबर कांट्रेक्ट का रूप देकर मामले को दबाया जा रहा है । कागजो में मजबूत अमृत मिशन के कार्य मे गुणवत्ताहीन कार्य के कई मामले उजागर हुई किन्तु निगम आयुक्त मौन , ईई मौन , इंजीनियर मौन और दुर्ग शहर की जनता परेशान ..

