दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम और घोटाला एक सिक्के के दो पहलु जैसे हो गए है . निगम के कार्य में जमीनी स्तर पर निरिक्षण करने वाले इंजीनियरों द्वारा ना जाने ऐसे कितने कार्य है जो सिर्फ कागजो पर हो गए और राशि आहरित कर ली गयी . ये तो एक लम्बी जाँच का विषय है . जाँच के बाद भी ये सुनिश्चित नहीं कि कोई कार्यवाही हो क्योकि कार्यवाही के लिए एक मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है जिसका अभाव अधिकारियो पर कम ही नजर आता है . एक तरफ तो निगम प्रशासन जनता से अपील करती नजर आती है की शहर की व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दे और अनियमितता की शिकायत करे किन्तु दुर्ग निगम प्रशासन के अधिकारी कार्यवाही के नाम पर आम जनता पर तो अपना प्रशासनिक ताकत दिखाते है किन्तु जब अनियमितता किसी अधिकारी के द्वारा होती है तो मामले को दबाने की हर संभव कोशिश की जाती है और एक समय तक सफल भी हो जाते है तभी तो आज तक ऐसे कई कार्यो के घोटालो की बात सामने आयी है किन्तु किसी पर कोई सख्त कार्यवाही हुई हो ऐसा प्रतीत नहीं होता .
ऐसे ही कुछ मामलो को लेकर शौर्यपथ समाचार पत्र प्रतिदिन निगम के एक घोटालो को मय दस्तावेज आम जनता के सामने लाता रहेगा निगम प्रशासन भले ही अपने जिम्मेदार अधिकारी को बचाते रहे किन्तु समाचार पत्र प्रतिदिन एक घोटाले सामने लाता रहेगा . दुर्ग निगम में सब इंजिनियर भीम राव द्वारा एक ऐसे जगह पाथवे का निर्माण किया गया जो सिर्फ दस्तावेजो में ही है और ऐसे स्थान का नाम दस्तावेज में अंकित है जिस पर किसी को शक भी होगा तो जा कर आसानी से देख सके ऐसा आम जनता के लिए संभव नहीं हो .
ऐसे ही एक मामले में वार्ड के तात्कालिक सब इंजिनियर के निरिक्षण में भाजपा की राष्ट्रिय महासचिव और राज्यसभा संसद डॉ सरोज पाण्डेय के निवास जल परिसर के बगल में सड़क किनारे पाथवे का निर्माण किया गया जिसकी लागत लगभग 48 हजार रूपये खर्च हुए और ये खर्च संधारण मद से किये गए चूँकि राशि 50 हजार से कम है इस लिए तात्कालिक नियम के अनुसार कोई निविदा नहीं निकली ऑफलाइन निविदा नियम के तहत ये कार्य हुआ . जबकि अगर जमीनी स्तर पर देखे तो जल परिसर के समीप सडक किनारे ऐसा कोई निरमान विगत 2 सालो में नहीं हुआ . फिर सब इंजिनियर भीम राव किस जगह पाथवे बना कर आ गए क्या मामले को संज्ञान में लेकर निगम के नए पीडब्ल्यूडी प्रभारी इस पर जाँच की पहल करेंगे ?
