24 घंटे में ही निरस्त हो गई नगर पंचायत उतई के एल्डरमैन कि सूची...रिसाली निगम के नियुक्ती से भी कार्यकर्ता नाराज...
रिसाली निगम की सूचि पर भी उठ रहे सवाल
दुर्ग ग्रामीण / शौर्यपथ / प्रदेश के गृह मंत्री साहू के विधानसभा के अंतर्गत एक नगर पंचायत और एक नगर निगम आते है जिसमे उतई पंचायत में एल्डरमैन के नाम की घोषणा होते ही जबरदस्त विरोध के कारण मात्र 24 घंटे के अन्दर ही जारी सूचि को शासन को निरस्त करना पड़ा . सूचि के निरस्त होते ही ये तो साफ़ हो गया कि स्थानीय विधायक के द्वारा किये गए नामो की अनुशंषा से कार्यकर्ता नाराज है . नामो की अनुशंषा तो स्थानीय विधायक और प्रदेश के गृह मंत्री ने ही की होगी किन्तु इन नामो को सरकाने वाले को क्या ये नहीं मालूम था कि इन नामो का विरोध होगा . जब से कांग्रेस सत्ता में आयी है तब से ही कई जमीनी कार्यकर्ता नाराज चल रहे है और लगातार उपेक्षा होने की बात कर रहे है पुराने कार्यकर्ताओ के अंदर का गुस्सा सूचि जारी होने के बाद आखिरकार फुट ही पडा और जबरदस्त विरोध के चलते सूचि जारी हो गयी . सूचि में नाम परिवर्तन तो हो जाएगा और हो सकता है इस बार जमीनी कार्यकर्ताओ को पुराने कार्यकर्ताओ को मौका मिल जाए किन्तु जो हुआ उसे वापस नहीं बदला जा सकता . जो ग़ुस्सा कार्यकर्ताओ के अंदर था और जिस प्रकार विरोध हुआ उससे इस तरफ इशारा है कि स्थानीय विधायक जमीनी हकीकत को नहीं देख पा रहे है और चाटुकारों से घिरे हुए है . वर्तमान की घटना को देखने के बाद एक बात याद आयी जब स्थानीय विधायक को प्रदेश में गृह मंत्री की खुर्सी मिली तब एक कार्यकर्ता सम्मलेन में ये बात कही गयी थी गृहमंत्री साहू के द्वारा कि कोई भी कार्यकर्ता जब चाहे तब मिल सकता है क्योकि कार्यकत्र्ता की मेहनत से ही चुनाव में विजय प्राप्त हुई है इस लिए हर कार्यकर्ता की बात का सम्मान किया जाएगा तब सभा में खूब जयजयकार हुई थी किन्तु धीरे धीरे कार्यकर्ता दूर होते गए और चाटुकार नजदीक शायद इन्ही कारणों से जमीनी कार्यकर्ताओ के मन मे धीरे धीरे बगावत के सुर थे जो आज बुलंद हो गए और एक विवाद का जन्म हो गया .
ऐसी ही हालत से नवनिर्मित रिसाली निगम भी गुजर रहा है . रिसाली निगम के निर्माण का वादा गृह मंत्री साहू ने चुनाव के पूर्व किया था और वादा निभाया भी किन्तु इस वादा निभाने का ये मतलब नहीं हुआ कि अब जमीनी कार्यकर्ताओ की मर्जी का कोई ख्याल नहीं रखा जायेगा . जैसा कि देखने को मिला है सोशल मिडिया में कि किस तरह कार्यकत्र्ता तो क्या पदाधिकारी भी अपने आप को आहात महसूस कर रहे है और मंत्री जी से सवाल पुच रहे है कि कौन है ये एल्डरमैन और कब कांग्रेस में आया गए क्या जमीनी कार्यकर्ताओ का उपयोग सिर्फ चुनाव में झंडा उठाने तक के लिए किया जाता रहेगा ऐसे कई सवाल होंगे जो अभी कार्यकर्ताओ और पुराने कांग्रेसी के मन में विचरण कर रहे होंगे . आज मंत्री जीई प्रदेश के कद्द्वर मंत्री है किन्तु शायद ये भूल गए कि दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के ये वही कार्यकत्र्ता है जो उनके लिए दिन रात मेहनत किये और चुनाव में जीत दिलाई .
इसमें कोई दो राय नहीं कि रिसाली निगम बनाने में मंत्री साहू की अहम् भूमिका रही है किन्तु कार्यकर्ताओ के बिना न पार्टी है और पार्टी के बिना कोई पद .वर्तमान में ऐसे कार्यकर्ता आहात है जो सालो से कांग्रेस के लिए मैदान में जमे रहे है इस उम्मीद में कि जब सत्ता आएगी तो सत्ता का लाभ भी मिलेगा किन्तु जैसा सोशल मिडिया में चर्चा हो रही है उससे जमीनी और पुराने कार्यकत्र्ता नाराज तो है ही आहत भी है . अब तो मंत्री जी के उपर ही निर्भर करता है कि कि रिसाली निगम के लिए ज़ारी सूचि में फेर बदल की पहल करे या रूठे कार्यकर्ताओ को मनाये जो भी हो किन्तु दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस को जो भी करना होगा जल्द ही करना होगा चार महीने बाद रिसाली निगम में चुनाव होने वाले है ऐसे में अगर स्थिति को नहीं संभाला गया तो रिसाली निगम की सत्ता से हाँथ धोना पड़ सकता है कांग्रेस को क्योकि रिसाली क्षेत्र में भाजपा महासचिव राज्यसभा सांसद जो उनका गृह क्षेत्र भी है सक्रीय है ऐसे में वर्तमान विरोध का समाधान नहीं निकला तो निकाय चुनाव में इसके दुष्परिणाम भी सामने आ सकते है .
सोशल मिडिया पर किस तरह हो रही बात जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह उपेक्षित महसूस कर रहे कांग्रेसी कार्यकर्त्ता ...





