दुर्ग /कोरबा / शौर्यपथ /
प्रदेश में एक बार फिर झोलाछाप चिकत्सको की भरमार देखने को मिल रही है . कुछ समय से यह देखने को मिल रहा कि ऐसे झोलाछाप चिकित्सक अब निजी नर्सिंग होम खोल कर अपने अकुशल पेशे से मरीजो की जान से खिलवाड़ कर रहे . निजी नर्सिंग होम में विजिटर चिकित्सको की लम्बी सूचि लगाकर उनकी आड़ में इस तरह के व्यापार को चलते हुए मरीजो से बड़ी राशि तो वसूल रहे है साथ ही उनकी जान से भी खिलवाड़ कर रहे है . दुर्ग जिले में भी ऐसे कई नर्सिंग होम है जो अकुशल चिकित्सको के मालिकाना हक से संचालित हो रहे . कई बार विभागीय जाँच में भी यह बात सामने आई कि मौके पर एमबीबीएस चिकित्सक उपलब्ध नहीं होते और अकुशल चिकित्सक ही इलाज करते हुए नजर आते है . लापरवाही के चलते हाल ही में दुर्ग के व्हीवाई हॉस्पिटल पर प्रशासन ने कार्यवाही की थी वही ओम परिसर स्थित गंगोत्री हॉस्पिटल में भी एमबीबीएस चिकित्सक की अनुपस्थिति के साथ मरीजो को गुमराह करते हुए पैसे कमाने के फेर में आयुष्मान योजना जो कि देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की एक महत्तवकांक्षी योजना है उसमे भी पारदर्शिता न लाते हुए घोटाला किया गया जिस पर विभाग द्वारा कार्यवाही भी की गई .
ऐसा ही एक मामला कोरबा जिले में आया . जहां मिली जानकारी अनुसार जिले में एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के चलते गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई, जबकि जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने स्थिति संभाली और महिला की जान बचा ली।
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम कोटाद्वारी की संगीता को 7 माह का गर्भ था। पेट में दर्द होने पर उसने गांव के ही एक झोलाछाप डॉक्टर से संपर्क किया, जिसने उसे एक इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के बाद गर्भवती महिला का दर्द और बढ़ गया। तब उसे परिवार के लोग जिला अस्पताल लेकर आए। डॉक्टरों ने पाया कि महिला की स्थिति गंभीर है।
जांच से पता चला कि उसके शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई है। महिला की नाजुक स्थिति थी। इलाज के बाद अब वह खतरे से बाहर है। सीएमएचओ डॉक्टर एसएन केसरी ने कहा है कि प्रशासन ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कई बार कार्रवाई की है, इसके बावजूद वे गांवों में सक्रिय है। बीएमओ से इस मामले में रिपोर्ट मंगाई गई है।