Print this page

विष्णुदेव साय सरकार के सुशासन का बस्तर वनमंडल कर रहा इंतज़ार एक बाबू पड़ गया भारी, अब क्या करेंगे वन विभाग के अधिकारी ? Featured

  • rounak group

जगदलपुर से नरेश देवांगन की ख़ास रिपोर्ट
जगदलपुर / शौर्यपथ / बस्तर वन मंडल कार्यालय में एक लेखापाल को वनमंडल से 31 जुलाई 2023 को  पदोन्नत कर कार्य आयोजना वनमंडल मे मुख्य लिपिक के पद पर उच्च अधिकारी के द्वारा पदस्थापना की गई, इसके बावजूद बाबू मलाइदार कुर्सी का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।
  मिली जानकारी के अनुसार मामला बस्तर वन मंडल कार्यालय का है, जहाँ पर विभाग के कर्मचारियों का कहना है, की नंद किशोर देशमुख को मुख्य लिपिक के पद पर संलग्नीकरण कर विभाग में व्यय शाखा, मनरेगा शाखा प्रभारी के पद में बैठाया गया है। जबकि श्री देशमुख लेखापाल को बस्तर वनमंडल से 31 जुलाई 2023 को पदोन्नत कर कार्य आयोजना वनमंडल मे मुख्य लिपिक के पद पर मुख्य वन संरक्षक द्वारा पदस्थापना की गई थी, लेकिन यहाँ तो बाबु से अपनी पुरानी कुर्सी छूट नहीं रही हैं। विभागीय सूत्र बताते है, की विभाग के कर्मचारी इस मामले को लेकर 25 /10/23 को बड़े अधिकारी से लिखित शिकायत किये थे।  जिस पर जाँच के लिए विभाग ने एक जाँच टीम का गठन किया था। टीम ने इस मामले की निष्पक्ष जाँच कर  समय पर जाँच रिपोर्ट उच्च अधिकारी को सौप दी है।
  जाँच रिपोर्ट में यह उल्लेख हैं की बयानों, आदेशों एवं निर्देशों के आधार पर जांच दल का निष्कर्ष है, कि एन.के.देशमुख (मुख्य लिपिक) एवं  दीपक कुमार भट्ट (उप वन क्षेत्रपाल) कार्यपालिका कर्मचारियों को नियम विरुद्ध कार्यालय में कार्य लिया जा रहा है, अतः जांच दल सर्व समिति से निर्णय लेती है कि श्री देशमुख मुख्य लिपिक का बस्तर वन मंडल कार्यालय जगदलपुर में संलग्नीकरण आदेश को समाप्त कर मूल पद स्थापना कार्यालय वन संरक्षक कार्य आयोजना जगदलपुर के लिए आदेशित करने की अनुशंसा की जाती है। वही दीपक कुमार भट्ट उप वन क्षेत्रपाल को कार्यालय बस्तर वन मंडल जगदलपुर में कार्य न करते हुए काष्टागार सरगीपाल में कार्य करने हेतु आदेशित करने की अनुशंसा की जाती है। अब सवाल गहरा रहा हैं की, कैसे बाबू नियमों को ताक पर रख कर बस्तर वन मंडल कार्यालय में बैठ कर, अपनी मनमर्जी कर शासन के पैसो को प्रतिपूर्ति के नाम पर फर्जी बिल बाउचर पास कर राशि निकाल, राशि का बन्दरबाट करने में लगे हैं ?
   गौरतलब है,  कि  विभाग के उच्च अधिकारी के आदेश का पालन न कर उसकी अवेहलना करने पर भी अधिकारी का इस मामले पर कुछ नहीं कर पाना इससे विभाग के अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ रहे है । कई ऐसा तो नही है बाबु को हटाने से इसका खामियाजा कहीं न कहीं विभाग को भी भुगतना पड़ सकता है ? शायद इसी डर से शिकायत पत्र पर कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति तो नहीं कर दिया गया हैं ? सूत्र आगे बताते हैं की  विभाग में बाबू ने अपने कार्य को करवाने के लिए एक डिप्टी रेंजर दीपक कुमार भट्ट को रखा हैं जबकि उनका मूल पदस्थापना स्थल काष्ठागार सरगीपाल है। डिप्टीरेंजर साहब विगत कई सालो से बस्तर वन मंडल में व्यय शाखा सहायक के रूप में बैठ कर सारा काम संभाल रहे है। इस मामले में बड़ा सवाल यह है की डिप्टी रेंजर साहब व्यय शाखा में दिन भर काम कर रहे है तो उनका मूल काम कौन कर रहा है ?
  इस पुरे मामले पर वन मण्डलाधिकारी श्री गुप्ता का कहना हैं, कि श्री भट्ट लंबे समय से व्यय शाखा का काम देख रहे हैं,व्यय शाखा का काम करने की योग्य हो गए हैं, जो क्षमता है उसका उपयोग करते हुए स्थानीय व्यय शाखा प्रभारी के सहायक के रूप में उनसे कार्य लिया जा रहा है। भट्ट 20 से 25 साल से यहां बैठ रहे हैं रही बात सरगीपाल डिपो में कार्य करने की तो मैं अभी आया हूं । भट्ट शुरू से ही यही कार्य कर रहे हैं। उनकी उपस्थिति पंजी कहां पर है यह देखना पड़ेगा। रही बात श्री देशमुख की तो मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से उनको अटेज किया गया है। वरिष्ठ कार्यालय द्वारा देखा जाएगा। उनकी नियुक्ति मुख्य वन संरक्षक कार्यालय द्वारा की गई है।

Rate this item
(1 Vote)
शौर्यपथ