दुर्ग।शौर्यपथ। नगर पालिका निगम चुनाव में दुर्ग शहर में कांग्रेस की हर को दुर्गतिपूर्ण हर के रूप में अगर कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी दुर्ग शहर कांग्रेस संगठन वर्तमान समय में पूरी तरह दिवालिया पन की कगार पर खड़ा हो गया है वही दुर्ग शहर कांग्रेस के कर्ताधर्ता के रूप में अरुण वोरा आज शहर कांग्रेस की बदहाल स्थिति के जिम्मेदार माने जा रहे हैं एक बार फिर दुर्ग के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मदन जैन ने अरुण वोरा पर झूठ बोलने और कांग्रेसियों को आपस में लड़ाने की बात का खुलासा किया है .
बता दे कि वार्ड नंबर 39 से चुनावी मैदान में कांग्रेस की तरफ से मदन जैन दावेदारी कर रहे थे और यह दावेदारी करने के लिए मदन जैन को पूर्व विधायक अरुण वोरा ने प्रेरित किया जबकि सभी को मालूम है कि इस वार्ड में श्रीमती शकुन ढीमर सालों से मेहनत कर रही है आज भले ही शकुन ढीमर की हार हो गई हो परंतु इस वार्ड में शकुंत ढीमर की दावेदारी प्रबल थी ऐसी स्थिति के बाद भी अरुण वोरा द्वारा मदन जैन को इस वार्ड से चुनाव लड़ाने के लिए प्रेरित करना स्पष्ट इशारा करता है कि कांग्रेस नेता अरुण बोरा कांग्रेसियों को आपस में ही लड़ा कर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने की जुगाड़ लगा रहे हैं और अपने 48000 के हार के गम को दूर करने के लिए दूसरे प्रत्याशियों को इससे बड़ी हार की कगार पर लाने का प्रयास किया जा रहा है .
शहर में ऐसी भी चर्चा है कि कांग्रेस के नेता अरुण वोरा जिस कांग्रेस पार्टी के कारण आज मान सम्मान पा रहे हैं उसी कांग्रेस को पूरी तरह बर्बाद करने पर तुले हुए हैं सालों से संगठन में कुछ लोगों का कब्जा और इस पर वोरा की सहमति कहीं ना कहीं शहर के कांग्रेसियों में अरुण वोरा के खिलाफ एक जबरदस्त विद्रोह उत्पन्न कर चुका है .वहीं राजनीतिक के जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि अपने से बड़ी हार को सामने दिखाकर अरुण वोरा अगले विधानसभा में फिर से विधानसभा में कांग्रेस से विधायक प्रत्याशी का टिकट लाने के लिए एक मिशन के तहत कार्य कर रहे हैं .वहीं जानकारों की माने तो भले ही भारतीय जनता पार्टी के विधायक कितने भी निष्क्रीय क्यों ना हो भारतीय जनता पार्टी स्थिति को भापकर प्रत्याशी बदलने का माद्दा रखती है और कांग्रेस में लगातार हार के बाद भी दुर्ग विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के लिए अरुण वोरा का चयन अगर आने वाले समय में होता है तो एक बार फिर कांग्रेस की दुर्ग शहर में फजिहत होगी .
वर्तमान समय में शहर कांग्रेस संगठन में निष्क्रियता के मामले में सभी पदाधिकारी पर सवालिया निशान लग रहे हैं युवा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में आयुष शर्मा ने जिस तरह से अरुण वोरा को आइना दिखाया भविष्य में ऐसे कई कांग्रेसी सामने आ जाएंगे जो अरुण वोरा को आइना दिखा देंगे और जिस तरह वर्तमान चुनाव में अरुण वोरा द्वारा कांग्रेसियों को आपस में लडाने की नीति के तहत कार्य किया जा रहा है अगर आने वाले विधानसभा चुनाव में किसी भी तरह से अरुण वोरा विधायक प्रत्याशी का टिकट ले आते हैं तो एक बार फिर कांग्रेसी कार्यकर्ता खुलकर अरुण वोरा का विरोध करेंगे और फिर से अरुण वोरा की एक बड़ी हार होगी .
राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि अगर कांग्रेस संगठन को बचाना है तो पूर्व विधायक की पसंद को संगठन में महत्व न देकर सक्रीय कार्यकर्ताओं और कांग्रेस को मजबूती प्रदान करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाना होगा वरना कांग्रेस जिस धरातल पर जा रही है उसकी गति में कोई परिवर्तन नहीं होगा . नगर निगम चुनाव के साथ अब चुनावी मौसम खत्म हो चुका है अब यह मौसम आने में लगभग 3 साल का समय लगेगा 3 साल तक कांग्रेस को विरोध की राजनीति पूरे जोश के साथ करनी होगी ताकि आम जनता में एक अच्छा संदेश जा सके.वही निष्क्रिय मठाधिश पदाधिकारियों से संगठन को दुरी बनाना भी एक चुनौती होगी साथ ही नए जिलाध्यक्ष जो सभी को साथ लेकर चल सके की तलाश भी अब दुर्ग कांग्रेस की ज़रूरत बान गई है .
आने वाले वक्त में कांग्रेस संगठन दुर्गा कांग्रेस को किस दिशा में ले जाएगा और संगठन की मजबूती के लिए क्या कदम उठाएगी यह देखने वाली बात होगी जिस पर कांग्रेसी वर्तमान समय से ही चर्चा कर रहे हैं वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के बदलने की शुभ विवाह भी तेज हो चुकी है प्रदेश में नगरी निकाय चुनाव में बड़ी हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की अगवाई में या लगातार तीसरी बड़ी का तमगा लग चुका है ऐसे में आने वाला भविष्य कैसा होगा यह संगठन में नियुक्त पदाधिकारी पर निर्भर करता है