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सत्ता बदल गयी किन्तु नहीं थम रहा दुर्ग निगम पीडब्ल्यूडी विभाग में भ्रष्टाचार , निगम के सबसे अनुभवी पार्षद गनी क्यों है मौन ? Featured

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दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम में 20 सालो तक भाजपा का राज रहा था . भाजपा के राज में निगम के पीडब्ल्यूडी विभाग में मनमानी और भ्रष्टाचार तात्कालिक विपक्षी पार्टी कांग्रेस का मुख्य मुद्दा रहा . जब तक कांग्रेस विपक्ष में रही तब तक सत्ताधारी पार्टी को घेरने के लिए विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस पीडब्ल्यूडी के भ्रष्टाचार को ही मुख्य मुद्दा बनाती रही . वार्ड में नव निर्मित नाली का टूट जाना , नाले की दीवाल का टूट जाना , सडको के कार्य में मिलावट का मामला , निर्माण में देरी आदि कई ऐसे कारण रहे जिसे लेकर भाजपा के राज में कांग्रेस हमलावार रही . दुर्ग की जनता ने भाजपा के 20 साल के शासन पर विराम लगाते हुए इस बार सत्ता की चाबी कांग्रेस को सौपी .
20 साल बाद कांग्रेस के हाँथ में सत्ता आयी और कांग्रेस ने युवा चेहरे धीरज बाकलीवाल को महापौर के रूप में जनता के सामने पेश किया . पेशे से व्यापारी रहे महापौर बाकलीवाल ने निगम के सबसे महत्तवपूर्ण प्रभार पर निगम के अनुभवी पार्षद अब्दुल गनी को बिठाया ताकि निगम के इस विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सके . किन्तु कांग्रेस के 11 महीने के कार्यकाल में जिसमे से 2 से 3 माह पूर्ण लॉक डाउन रहा तथा शेष बचे 7-8 माह के कार्य में ऐसी कई घटनाये हुई जिससे ऐसा कही से नहीं लगता कि निगम के पीडब्ल्यूडी विभाग में भ्रष्टाचार का अंत हुआ हो . ऐसे कुछ मामले है जिस पर नजर डाले जो निगम की नवनिर्मित सरकार की लापरवाही का नतीजा है जो आज सबके सामने है किन्तु जिम्मेदारो पर कार्यवाही तो दूर उन्हें परितोषित से नवाज़ा जा रहा है .
एमआईसी भवन के संधारण का कार्य ...
संधारण मद निगम का एक ऐसा मद है जिसे किसी भी कार्य में ईस्तमाल कर लिया जाता है इसी संधारण मद से निगम के एमआईसी भवन में लाखो का रंगरोगन का कार्य हुआ जो आज सभी के सामने है कि किस तरह के स्तर का कार्य हुआ क्योकि तुलना करने के लिए कही और नहीं जाना पड़ेगा निगम परिसर में एमआईसी भवन और मुख्य कार्यालय आमने सामने है दोनों ही भवन में एक दो महीने के अंतराल में रंगरोगन हुआ है किन्तु आज की स्थिति में दोनों भवन को देखने से ही साफ़ प्रतीत होता है कि कार्य का स्तर में कितना अंतर है . इस कार्य की सबसे बड़ी बात यह रही कि कार्य लेकर सजावट तक पहुँच गयी और लाखो का खर्च निगम मद से हुआ वो भी तब जब सिर्फ दुर्ग निगम ही नहीं पूरा देश और विश्व महामारी आपदा से गुजर रहा था तब स्तरहीन कार्य को अंजाम दिया जा रहा था . वही जिस कम्पनी के पास कार्य है उसी कंपनी को कुछ दिनों पहले कार्य में लापरवाही के चलते 6 माह के लिए निलंबित कर दिया गया था किन्तु अचानक एक बार फिर इस निलंबन पर राजनितिक दबाव के चलते निलंबन वापसी हुई और फिर से निलंबन वापसी के कुछ दिनों में ही लाखो का कार्य दे दिया गया ऐसा इस लिए कह सकते है क्योकि निगम में ठेकेदारों की फौज है और बहुत से ठेकेदार प्रतिभागी बनना चाहते है प्रतिभागी बनने से निविदा में कार्य 20 से 25 प्रतिशत तक बिलों जाती है किन्तु इन कुछ ठेकेदारों का कार्य इतने गुपचुप तरीके से होता है कि 4 से 6 प्रतिशत कम रेट पर कार्य प्राप्त हो जाता है और किसी को कानोकान खबर भी नहीं होती .
शौर्यपथ समाचार ने ऐसे कई मामले उजागर किये जिसमे कार्य पहले चालू हो जाता है है किन्तु निविदा बाद में निकलती है . इतना सब होने के बाद भी सालो तक विपक्ष में रही कांग्रेस पीडब्ल्यूडी के भ्रष्टाचार पर आवाज़ उठाने वाली वर्तमान कांग्रेस सरकार मौन है पीडब्ल्यूडी प्रभारी मौन है क्या इसमें कोई जबरदस्त कमीशन का खेल चल रहा है या फिर जनता को गुमराह कर खस्ताहाल निगम का मद के हिस्से का कुछ भाग निजी कार्यो में बंट रहा और एक बार फिर जनता भ्रष्टाचार युक्त सरकार का अनुभव ले रही क्या महपौर और विधायक मामले को संज्ञान लेंगे या फिर जनता अगले चुनाव के इंतज़ार और सुशान का इंतज़ार करती रहेगी ?
शौर्यपथ के अगले अंक में 6 लाख के फाउनटेन के संधारण का सच कार्य और विधायक निधि के वापसी का खुलासा

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शौर्यपथ